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peer Mohammad Shaikh - Author on ShareChat
peer Mohammad Shaikh
686 views • 9 days ago
#👌 दोहे
{uT; करता था सो क्यों अब करि क्यों पछताय | बोया पेड़ बबूल का, 3াম ক্রম্ভকাঁ মী স্রায? {uT; करता था सो क्यों अब करि क्यों पछताय | बोया पेड़ बबूल का, 3াম ক্রম্ভকাঁ মী স্রায?
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  • .. हर हर महादेव - Author on ShareChat
    💗𝚅.𝙺.𝙲𝚛𝚎𝚊𝚝𝚒𝚘𝚗💗 🌹🙏हर हर महादेव🙏🌹
    #मेरे प्यारे दोस्तों मेरी अच्छी पोस्ट को दिखने के लिए sharechat पे follow करे....... ......धन्यवाद। #🖋️ कबीर दास जी के दोहे #कबीर दोहे
    ५ प्रसिद्ध दोहे अर्थ सहित देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय 1 बुरा जो ( मुझसे बुरा न कोय जो मन खोजा आपना, | | স বুসহী স ব্রুবান ঐস্রন নিকলা, নী কীরন্ ব্রুহা নন্ী সিলা ! अर्थः जब मैंने अपने मन को टटोला, तो बुरा कोई नहीं निकला। gsT সন efR?-efR? ? धीरे सब कुछ होय | 2 मना, माली सींचे सौ घड़़ा , ऋतु आए फल होय ।। 31*: हे मन! धैर्य रखो, सब कुछ धीरे-धीरे होता है। जैसे माली सौ घड़े पानी देता है, फिर भी फल ऋतु आने पर ही होते हैं। साई इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय 3 मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय ।। अर्थः हे प्रभु! मुझे इतनी ही देन दीजिए जिसमें मेरा परिवार चल जाए। मैं भी भूखा न रहूँ और मेरे द्वार आने वाला साधु भी भूखा न जाए। निंदक नियरे राखिए, आँगन ತಾಿ 8ಾ | बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय I 31*: निंदक (आलोचक) को हमेशा पास रखना चाहिए, उसे अपने साबुन के चाहिए। वह बिना पानी और आँगन में कुटिया बनाकर रखना ही आपके स्वभाव को निर्मल कर देता है। चलती चाकी देख कर, दिया कबीरा रोय | 5 दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय ।। चलती हुई चक्की को देखकर कबीर रो पडे़। 31*: दो पाटों के बीच में कोई भी साबुत (बचकर) नहीं रह पाता। दोहे हमारे जीवन को सही दिशा दिखाते हैं और हमें श्रेष्ठ इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं। ५ प्रसिद्ध दोहे अर्थ सहित देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय 1 बुरा जो ( मुझसे बुरा न कोय जो मन खोजा आपना, | | স বুসহী স ব্রুবান ঐস্রন নিকলা, নী কীরন্ ব্রুহা নন্ী সিলা ! अर्थः जब मैंने अपने मन को टटोला, तो बुरा कोई नहीं निकला। gsT সন efR?-efR? ? धीरे सब कुछ होय | 2 मना, माली सींचे सौ घड़़ा , ऋतु आए फल होय ।। 31*: हे मन! धैर्य रखो, सब कुछ धीरे-धीरे होता है। जैसे माली सौ घड़े पानी देता है, फिर भी फल ऋतु आने पर ही होते हैं। साई इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय 3 मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय ।। अर्थः हे प्रभु! मुझे इतनी ही देन दीजिए जिसमें मेरा परिवार चल जाए। मैं भी भूखा न रहूँ और मेरे द्वार आने वाला साधु भी भूखा न जाए। निंदक नियरे राखिए, आँगन ತಾಿ 8ಾ | बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय I 31*: निंदक (आलोचक) को हमेशा पास रखना चाहिए, उसे अपने साबुन के चाहिए। वह बिना पानी और आँगन में कुटिया बनाकर रखना ही आपके स्वभाव को निर्मल कर देता है। चलती चाकी देख कर, दिया कबीरा रोय | 5 दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय ।। चलती हुई चक्की को देखकर कबीर रो पडे़। 31*: दो पाटों के बीच में कोई भी साबुत (बचकर) नहीं रह पाता। दोहे हमारे जीवन को सही दिशा दिखाते हैं और हमें श्रेष्ठ इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
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    ★️𝆺𝅥⃝💙🇦𝐧𝐧𝐮❥آآ꯭❣️➻⏤
    #📓 हिंदी साहित्य #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👌 दोहे #✍️ साहित्य एवं शायरी #☝अनमोल ज्ञान
    साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूं साधु ना भूखा जाय।। " साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूं साधु ना भूखा जाय।। "
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  • peer Mohammad Shaikh - Author on ShareChat
    peer Mohammad Shaikh
    #👌 दोहे
    कबीरा इस संसार में , अजब बड़ा इंसान | मुर्दे जिंदा ना कर सके , पत्थर डाले प्राण।l कबीरा इस संसार में , अजब बड़ा इंसान | मुर्दे जिंदा ना कर सके , पत्थर डाले प्राण।l
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  • ऊंची उड़ान - Author on ShareChat
    ऊंची उड़ान
    #👌 दोहे #🙏सुविचार📿 #☝ मेरे विचार #🕊️ ऊंची उड़ान 🏃 #💔 हमारी भावनाऐं ❤️
    66 कबीरा देखे जगत को कैसी बदली चाल, के सिर ताज है मूर्खों ज्ञानी रहे बेहाल.! 66 कबीरा देखे जगत को कैसी बदली चाल, के सिर ताज है मूर्खों ज्ञानी रहे बेहाल.!
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    #👌 दोहे #✍️ साहित्य एवं शायरी #☝अनमोल ज्ञान #📓 हिंदी साहित्य #✍मेरे पसंदीदा लेखक
    कंकर-पाथर जोरि के, मस्जिद लई बनाय| ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय। | कंकर-पाथर जोरि के, मस्जिद लई बनाय| ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय। |
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