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MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
2[46 गुरू प्रेम का, बिसरे तन मन का भान | सुख दुःख की चिंता नहीं, हर पल रहे सतगुरू का ध्यान...!! Generated by ONEPLUS Al 2[46 गुरू प्रेम का, बिसरे तन मन का भान | सुख दुःख की चिंता नहीं, हर पल रहे सतगुरू का ध्यान...!! Generated by ONEPLUS Al
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    अनमोल समय जन्म बहुत नष्ट न ಹಗಸಿ करो 8 रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय | हीना जन्म अनमोल था, कोड़ी बदले जाय II अनमोल समय जन्म बहुत नष्ट न ಹಗಸಿ करो 8 रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय | हीना जन्म अनमोल था, कोड़ी बदले जाय II
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    अपने मन का Aa& , अपना नाश कराए। ज्यू लोहे का जंग ही, लोहे को खा जाय Il Based on an ONEPLUS Al generation अपने मन का Aa& , अपना नाश कराए। ज्यू लोहे का जंग ही, लोहे को खा जाय Il Based on an ONEPLUS Al generation
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    साहेब बंदगी साहेब
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  • saheb bandagi group - Author on ShareChat
    saheb bandagi group
    #🙏 भक्ति #🙏गुरु महिमा😇 #🙏 भजन संग्रह 🎵 #🙏Saprem Saheb Bandagi Saheb🙏 #🙏🙏saheb bandagi saheb🙏🙏
    भक्ति, गुरु महिमा
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    सदुगुरु कबीर साहेब जी মাত্রী माला फेरत जुग भया , फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।। भावार्थः- हे भाई! ताने हाथ की माला तो बहुत फेरी , लेकिन मन का फेर नहीं पाया। हाथ के मनकों को छोड़कर मन के मनकों को फेर अर्थात् मन को सच्चे नाम से जोड।। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब जी सदुगुरु कबीर साहेब जी মাত্রী माला फेरत जुग भया , फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।। भावार्थः- हे भाई! ताने हाथ की माला तो बहुत फेरी , लेकिन मन का फेर नहीं पाया। हाथ के मनकों को छोड़कर मन के मनकों को फेर अर्थात् मन को सच्चे नाम से जोड।। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब जी
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    कबीर वाणी 66 मन की डोरी ढीली पडे़ , चले माया के संग | सत्य-्नाम जो थाम ले, मिटे जन्म का जंग| १९ भावार्थ संत कबीरदास जी मन की चंचल प्रवृत्ति को माया का मूल कारण बताते हैं। जब मन स्थिर नहीं रहता, तो वह इच्छाओं , लालच और दिखावे के पीछे भागता है, जिससे जीव जन्म-्जन्मांतर के बंधनों में फँसा रहता है। लेकिन सत्य ्नाम" का आश्रय लेने और सच्ची भक्ति अपनाने से भीतर के संधर्ष शांत होने लगते हैं। ईश्वर का स्मरण मन को स्थिरता , शांति और वास्तविक आनंद प्रदान करता है। ப सन कबीर वाणी 66 मन की डोरी ढीली पडे़ , चले माया के संग | सत्य-्नाम जो थाम ले, मिटे जन्म का जंग| १९ भावार्थ संत कबीरदास जी मन की चंचल प्रवृत्ति को माया का मूल कारण बताते हैं। जब मन स्थिर नहीं रहता, तो वह इच्छाओं , लालच और दिखावे के पीछे भागता है, जिससे जीव जन्म-्जन्मांतर के बंधनों में फँसा रहता है। लेकिन सत्य ्नाम" का आश्रय लेने और सच्ची भक्ति अपनाने से भीतर के संधर्ष शांत होने लगते हैं। ईश्वर का स्मरण मन को स्थिरता , शांति और वास्तविक आनंद प्रदान करता है। ப सन
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    सत्यनाम Kabir bhakti am सत्यनाम Kabir bhakti am
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    एक परमात्मा है ~ जो बेहिसाब M'೫೨RyL देता हैं ~2c3 > एक हम है जो नाम गिन गिन कर जपते हैं साहेब बंदगी साहेब एक परमात्मा है ~ जो बेहिसाब M'೫೨RyL देता हैं ~2c3 > एक हम है जो नाम गिन गिन कर जपते हैं साहेब बंदगी साहेब
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    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    माटी का एक नाग बनाके , पूजे लोग लुगाया II fiat नाग जब घर मे, निकले ले लाठी धमकाया ।। माटी का एक नाग बनाके , पूजे लोग लुगाया II fiat नाग जब घर मे, निकले ले लाठी धमकाया ।।
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    आज कहे हरि कल भजुंगा , काल कहे फिर काल | कालके करत ही , आज अवसर जासी चाल I अर्थ जो व्यक्ति आज भगवान का भजन करने का संकल्प करता है कि कल से भजन करूँगा , उसके लिए काल (मृत्यु ) कह देता है - फिर उसके पास समय नहीं होगा| इसलिए हे मानव! आज ही भजन कर, क्यॉकि समय और अवसर किसी की प्रतीक्षा नहीं करते। सबको अपने वश में कर लेता है। काल इसलिए आज का दिन ही सबसे अनमोल है इसे भजन सेवा और सत्कर्म में लगाओ , यही जीवन की सच्ची पूँजी है। Kabir Bhajan Gyan सत साहेब कबीसभजन ಞilor आज कहे हरि कल भजुंगा , काल कहे फिर काल | कालके करत ही , आज अवसर जासी चाल I अर्थ जो व्यक्ति आज भगवान का भजन करने का संकल्प करता है कि कल से भजन करूँगा , उसके लिए काल (मृत्यु ) कह देता है - फिर उसके पास समय नहीं होगा| इसलिए हे मानव! आज ही भजन कर, क्यॉकि समय और अवसर किसी की प्रतीक्षा नहीं करते। सबको अपने वश में कर लेता है। काल इसलिए आज का दिन ही सबसे अनमोल है इसे भजन सेवा और सत्कर्म में लगाओ , यही जीवन की सच्ची पूँजी है। Kabir Bhajan Gyan सत साहेब कबीसभजन ಞilor
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