सुशील मेहता
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सिंह संक्रांति
सिंह संक्रांति के दिन सूर्य देव अपनी राशि बदलते हैं. इस दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से आरोग्यता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में इसका विशेष महत्व है. सूर्य देव आज यानी 17 अगस्त, बुधवार को कर्क के निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिंह संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इसके अलावा इस दिन भगवान विष्णु और नरसिंह देव की पूजा की जाती है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ग्रहों के देवता सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं। हिंदू वेदों में बताया गया है कि संक्रांति के दिन व्यक्ति को पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए और सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को धन, वैभव, यश, बल, बुद्धि की प्राप्ति होती है. सिंह संक्रांति का प्रचलन दक्षिण भारत में अधिक है. मान्यता है कि भादव माह के इस पर्व पर भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह की उपासना करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ इस दिन भगवान सूर्य को भी विधिवत पूजा करने से और उन्हें अर्घ्य देने से सभी गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है। बता दें कि सिंह संक्रांति को घी संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. वह इसलिए क्योंकि इस दिन घी का सेवन किया जाता है. आयुर्वेद में भी गाय के घी का सेवन सेहत के लिए सबसे फायदेमंद बताया गया है. सिंह संक्रांति के दिन घी का सेवन करने से कुंडली में राहु-केतु के द्वारा पड़ रहे अशुभ प्रभाव कम किए जा सकते हैं. साथ ही घी का सेवन करने से ऊर्जा, तेज, बुद्धि और स्मरण शक्ति में बढ़ोतरी होती है. इससे आत्म बल और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है. शास्त्रों के अनुसार भादो मास के दौरान सूर्य देव को जल अर्पित करने से व्यक्ति को उत्तम लाभ होते हैं। सिंह संक्रांति
सिंह संक्रांति के दिन सूर्य देव अपनी राशि बदलते हैं. इस दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से आरोग्यता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में इसका विशेष महत्व है. सूर्य देव आज यानी 17 अगस्त, बुधवार को कर्क के निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिंह संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इसके अलावा इस दिन भगवान विष्णु और नरसिंह देव की पूजा की जाती है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ग्रहों के देवता सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं। हिंदू वेदों में बताया गया है कि संक्रांति के दिन व्यक्ति को पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए और सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को धन, वैभव, यश, बल, बुद्धि की प्राप्ति होती है. सिंह संक्रांति का प्रचलन दक्षिण भारत में अधिक है. मान्यता है कि भादव माह के इस पर्व पर भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह की उपासना करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ इस दिन भगवान सूर्य को भी विधिवत पूजा करने से और उन्हें अर्घ्य देने से सभी गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है। बता दें कि सिंह संक्रांति को घी संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. वह इसलिए क्योंकि इस दिन घी का सेवन किया जाता है. आयुर्वेद में भी गाय के घी का सेवन सेहत के लिए सबसे फायदेमंद बताया गया है. सिंह संक्रांति के दिन घी का सेवन करने से कुंडली में राहु-केतु के द्वारा पड़ रहे अशुभ प्रभाव कम किए जा सकते हैं. साथ ही घी का सेवन करने से ऊर्जा, तेज, बुद्धि और स्मरण शक्ति में बढ़ोतरी होती है. इससे आत्म बल और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है. शास्त्रों के अनुसार भादो मास के दौरान सूर्य देव को जल अर्पित करने से व्यक्ति को उत्तम लाभ होते हैं। #शुभ कामनाएँ 🙏
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