sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_३४/१
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🦚 कर्म योग -- भक्ति योग-- ध्यान योग 🦚
परमात्मा को प्राप्त करने के तीन मार्ग हैं : कर्म मार्ग ,, भक्ति मार्ग और ज्ञान मार्ग । जीव जिस मार्ग का अधिकारी होता है , उसे उसी अधिकार के अनुसार अपना मार्ग चुनना चाहिए।
*अर्जुन ,,, कर्म मार्ग का अधिकारी था । गीता के पहले अध्याय में उसने भगवान के समक्ष संन्यास लेने की इच्छा प्रकट की , किंतु भगवान ने उसे युद्ध के समय संन्यास लेने से रोक दिया और कर्म मार्ग में प्रवृत किया । विदुर जी भक्ति मार्ग के अधिकारी थे । इसी कारण महाभारत के युद्ध के दौरान उन्हें यात्रा पर जाने की आज्ञा दी । उद्धव ज्ञान मार्ग का अधिकारी जीव था । इसलिए श्रीमद्भागवत के एकादश स्कंध में भगवान ने उसे ज्ञान मार्ग का उपदेश दिया।*
*वैद्य मरीज की नब्ज देखकर किसी मरीज को सलाह देता है कि आपको केवल दही ही खाना है , और कुछ नहीं खाना है । जबकि दूसरे मरीज को सलाह देता है कि अगर तूने थोड़ा सा भी दही खाया तो तू मर जाएगा ।*
*इसी प्रकार जो जीव जिस मार्ग का अधिकारी होता है , उसी प्रकार का उपदेश इसके लिए कल्याणकारी होता है । आखिर में तीनों ही मार्ग आगे चलकर एक हो जाते हैं । तीनों में से किसी भी एक मार्ग पर चलने वाला जीव अंत में परमात्मा को ही प्राप्त करता है।*
*जैसे कि --- सर्वदेव नमस्कार: केशवं प्रति गच्छति ।*
*जनक आदि राजा कर्म में प्रवृत हुए । शंकराचार्य आदि ज्ञान मार्ग पर चले । जो जिसका अधिकारी था उसी मार्ग पर चला । नरसी मेहता भक्ति मार्ग पर चले , किंतु आखिर में भक्ति मार्ग आगे जाकर ज्ञान के साथ मिल जाता है। नरसी मेहता भक्ति मार्ग पर होते हुए भी उनके पदों में केवल ज्ञान का ही प्रकाश मिलता है।*
*कर्म मार्ग विशाल राजमार्ग है। राजमार्ग पर आंख बंद करके चले तो भी गिरने का भय नहीं होता है । शास्त्रों और संतो की आज्ञा अनुरूप न्याय , नीति, धर्म से अपने नियत कर्म करने से जीवन का प्रत्येक कर्म भक्ति बन जाता है ।*
*नाई का काम करते-करते (सेना नाई) , कसाई का काम करते-करते( सदन कसाई), कुम्हार का काम करते करते (गोरा ) ,,, जैसे अनेक भक्त कर्म मार्ग पर न्याय , नीति , धर्म से चलते हुए और शास्त्रों का संतो की आज्ञा अनुसार संसार में रहते हुए भी अपने प्रत्येक कर्म को भक्ति मय बनाने में सफल हुए । जहां उनकी प्रत्येक क्रिया भक्ति में परिवर्तित हो जाती थी।*
क्रमश: आगे का भाग कल पढेगे ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
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