sn vyas
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#जय श्री हनुमान
`🕉️ श्रीमदाद्यशंकराचार्यकृतं श्रीहनुमत्पञ्चरत्नस्तोत्रम्🚩`
*वीताखिलविषयेच्छं जातानन्दाश्रुपुलकमत्यच्छम् ।*
*सीतापतिदूताद्यं वातात्मजमद्य भावये हृद्यम् ॥१॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जिनके हृदय से समस्त विषयों की इच्छा दूर हो गयी है ( श्रीराम प्रेम में विभोर होने से ) , जिनके नेत्रों में आनन्द के आँसू एवं शरीर रोमांचित हो रहा हैं , जो अत्यन्त निर्मल हैं , सीतापति श्रीरामचन्द्र जी के प्रधान दूत हैं , मेरे हृदय को प्रिय लगने वाले उन पवनकुमार हनुमानजी का मैं ध्यान करता हूँ ।`
*तरुणारुणमुखकमलं करुणारसपूरपूरितापाङ्गम् ।*
*संजीवनमाशासे मञ्जुलमहिमानमञ्जनाभाग्यम् ॥२॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 बाल रवि के समान जिनका मुखकमल लाल है , करुणारस के समूह से जिनके लोचन-कोर भरे हुए हैं , जिनकी महिमा मनोहारिणी है , जो अञ्जना के सौभाग्य हैं , जीवनदान देने वाले उन हनुमानजी से मुझे बड़ी आशा है ।`
*शम्बरवैरिशरातिगमम्बुजदलविपुललोचनोदारम् ।*
*कम्बुगलमनिलदिष्टं बिम्बज्वलितोष्ठमेकमवलम्बे ॥३॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो कामदेव के बाणों को जीत चुके हैं , जिनके कमलपत्र के समान विशाल तथा उदार लोचन हैं , जिनका शंख के समान कण्ठ औऱ बिम्बफल के समान अरुण ओष्ठ हैं , जो पवन के सौभाग्य हैं , एकमात्र उन हनुमानजी की ही मैं शरण लेता हूँ ।`
*दूरीकृतसीतार्तिः प्रकटीकृतरामवैभवस्फूर्तिः ।*
*दारितदशमुखकीर्तिः पुरतो मम भातु हनुमतो मूर्तिः ॥४॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जिन्होंने सीताजी का कष्ट दूर किया एवं श्रीरामचन्द्र जी के ऐश्वर्य की स्फूर्ति को प्रकट किया , दशवदन रावण की कीर्ति को मिटाने वाली वह हनुमानजी की मूर्ति मेरे समक्ष/सामने प्रकट हो ।`
*वानरनिकराध्यक्षं दानवकुलकुमुदरविकर-सदृक्षम् ।*
*दीनजनावनदीक्षं पवनतपः पाकपुञ्जमद्राक्षम् ॥५॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो वानर-सेना के अध्यक्ष हैं , दानवकुलरूपी कुमुदों के लिये सूर्य की किरणों के समान हैं , जिन्होंने दीनजनों की रक्षा की दीक्षा ले रखी है , पवनदेव की तपस्या के परिणामपुञ्ज उन हनुमानजी का मैंने दर्शन किया ।`
`💦 फलश्रुति –`
*एतत् पवनसुतस्य स्तोत्रं यः पठति पञ्चरत्नाख्यम् ।*
*चिरमिह निखिलान् भोगान् भुक्त्वा श्रीरामभक्तिभाग् भवति ॥६॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 पवनकुमार श्रीहनुमानजी के इस 'पञ्चरत्न' नामक स्तोत्र का जो पाठ करता है , वह इस लोक में चिर-काल तक समस्त भोगों को भोगकर श्रीराम-भक्ति का भागी होता है ।`
*॥ इति श्रीमदाद्यशङ्कराचार्यकृतं हनुमत्पञ्चरत्नस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥*
*🕉️ श्री हनुमत् पञ्चरत्न - सरल भावार्थ 🚩*
*१. वीताखिलविषयेच्छं...*
`भावार्थ 👉🏻 जिनके मन में राम जी के अतिरिक्त कोई इच्छा ही नहीं बची , जिनकी आँखें राम-प्रेम में आँसुओं से भर आती हैं , जो सर्वाधिक पवित्र हैं , ऐसे सीता-राम के प्यारे दूत पवनपुत्र को मैं अपने हृदय में बसाता हूँ ।`
*२. तरुणारुणमुखकमलं...*
`भावार्थ 👉🏻 जिनका मुख प्रातःकाल के सूर्य के जैसा लाल एवं सुंदर है , जिनकी आँखों में करुणा भरी है , जिनकी महिमा अत्यंत मधुर है , जो माता अंजनी के लाडले हैं – ऐसे जीवन देने वाले हनुमान जी ही मेरी एकमात्र आशा हैं ।`
*३. शम्बरवैरिशरातिगं...*
`भावार्थ 👉🏻 जिन्होंने काम-वासना को जीत लिया है , जिनके नेत्र कमल की पंखुड़ी के समान विशाल तथा सुंदर हैं , जिनका गला शंख जैसा औऱ होंठ लाल हैं – मैं केवल उन्हीं पवनपुत्र की शरण में हूँ ।`
*४. दूरीकृतसीतार्तिः...*
`भावार्थ 👉🏻 जिन्होंने सीता माता का दुःख दूर किया , जिन्होंने श्रीराम की महिमा सँसार को दिखाई , जिन्होंने रावण का घमंड तोड़ा – ऐसे हनुमान जी की मूर्ति सदैव मेरी आँखों के सन्मुख रहे ।`
*५. वानरनिकराध्यक्षं...*
`भावार्थ 👉🏻 जो वानर सेना के मुखिया हैं , जो राक्षसों के लिए सूर्य के समान तेजस्वी हैं , जिन्होंने निर्धन-दीनों की रक्षा का व्रत लिया है , ऐसे पवनदेव की तपस्या के फल हनुमान जी के मैंने दर्शन कर लिए ।`
*💦 फलश्रुति –*
`जो रोज़ इस पाँच रत्न जैसे स्तोत्र को पढ़ेगा , उसे इस सँसार के समस्त/सारे सुख मिलेंगे एवं अंत में श्रीराम की सच्ची भक्ति मिलेगी ।`
`जय बजरङ्गबली🚩`
`हर हर महादेव🌼`
`जय श्री राम🙏🏻`
`जय जय शङ्कर🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
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`🌄🌆 प्रभात वन्दन 🌆🌄`
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