sn vyas
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सरल भावार्थ: श्रीरामजी ने माता सतीजी #जय श्री राम को देखते ही हाथ जोड़कर प्रणाम किया। उन्होंने अपनी पहचान भी बहुत विनम्रता से बताई—अपने पिता राजा दशरथ का नाम लेकर स्वयं को राम बताया। फिर श्रीरामजी ने सहज भाव से पूछा— “वृषकेतु अर्थात् भगवान शिवजी कहाँ हैं? आप इस घने वन में अकेली किस कारण घूम रही हैं?” इस प्रसंग की खास बात यहाँ श्रीरामजी का सर्वज्ञ स्वरूप बहुत सुंदर ढंग से प्रकट होता है। सतीजी ने सीताजी का रूप बनाकर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी, लेकिन श्रीरामजी ने— उन्हें प्रणाम किया, उनके पति भगवान शिवजी का नाम लिया, और यह भी पूछा कि वे अकेली वन में क्यों घूम रही हैं। अर्थात् श्रीरामजी उनके वास्तविक स्वरूप और परिस्थिति से पूरी तरह परिचित थे, फिर भी उन्होंने सतीजी को लज्जित नहीं किया और अत्यंत विनम्र एवं मधुर व्यवहार किया। एक पंक्ति में सार: श्रीरामजी ने सतीजी को प्रणाम करके अपने पिता सहित अपना परिचय दिया और सहज भाव से पूछा कि भगवान शिवजी कहाँ हैं तथा वे अकेली वन में किस उद्देश्य से आई हैं। 🙏🚩
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