RadheRadheje
534 views • 4 hours ago
एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी... .
मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ ... .
बड़ी मिनतो के बाद मईया ने एक लिफाफा मेरे हाथ मे रख दिया... .
मैंने लिफाफा खोल कर देखा उसमे चार पेड़े, 200 रूपये और इत्र से सनी एक कपड़े की कातर थी ... .
मैंने मईया से पूछा, मईया ये क्या है... .
मईया बोली मैं वृंदावन बिहारी जी के मंदिर गई थी, मैंने गुलक में 200 रूपये डाले और दर्शन के लिऐ आगे बिहारी जी के पास चली गई ... .
वहाँ गोस्वामी जी ने मेरे हाथ मे एक पेड़ा रख दिया, मेने गोस्वामी जी को कहा मुझे दो पेड़े दे दो पर गोस्वामी जी ने मना कर दिया.. .
मैंने उससे गुस्से मे कहा मैंने 200 रूपये डाले है मुझे पेड़े भी दो चाहिए पर गोस्वामी जी नहीं माने ... .
मैंने गुस्से मे वो एक पेड़ा भी उन्हे वापिस दे दिया और बिहारी जी को कोसते हुए बाहर आ कर बैठ गई ... .
मैं जैसे ही बाहर आई तभी एक बालक मेरे पास आया और बोला मईया मेरा प्रसाद पकड़ लो मेने जूते पहनने है... .
वो मुझे प्रसाद पकड़ा कर खुद जूते पहनने लगा और फिर हाथ धोने चला गया ... . फिर वो नही आया .. मै पागलो की तरह उसका इंतजार करती रही ... . काफी देर के बाद मैंने उस लिफाफे को खोल कर देखा ... . उसमें 200 रूपये, चार पेड़े और एक कागज़ पर लिख रखा था ...... ( मईया अपने लाला से नाराज ना होया करो) ये ही वो लिफाफा है ... . #भगवान_किस_रुप__में_आ_जाये_कोई_नही_जानता .
जय श्री कृष्ण
#☝आज का ज्ञान
• 15 shares