sn vyas
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#हनुमानजी #🙏🌺ॐ रामदूताय नमः🌺🙏 🙏 जय श्री राम🙏 🙏🌺 जय हनुमानजी 🌺🙏 जय बालाजी महाराज #🌼🙏जय वीर हनुमानजी 💐शुभ मंगलवार 🌼श्री हनुमान चालीसा 🌼 #🚩 जय श्री रामजी🚩 🚩जय श्री हनुमानजी🚩
🚩 हनुमान जी की गदा का खोया हुआ दिव्य रहस्य
यह कथा है उस गदा की जो कोई साधारण गदा नहीं, स्वयं काल को भी रोक देती है। हनुमान जी के हाथ में जो गदा आप देखते हैं, उसका एक बहुत बड़ा रहस्य है जो बहुत कम लोग जानते हैं।
कहते हैं जब हनुमान जी का जन्म हुआ तो पवन देव ने उन्हें आशीर्वाद में एक दिव्य गदा दी थी। पर यह गदा उन्हें मिली कहाँ से? इसकी कहानी कुबेर के खजाने से जुड़ी है।
प्राचीन काल में, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तब समुद्र से 14 रत्न निकले थे। उन्हीं रत्नों में से एक था - कौमोदकी गदा का अंश। भगवान विष्णु ने अपनी गदा कौमोदकी से एक छोटा सा टुकड़ा तोड़कर वायु देव को दिया था, और कहा था - "हे वायुदेव, जब तुम्हारा पुत्र, जो मेरा ही रुद्र अवतार होगा, जन्म लेगा तो यह अंश उसके हाथ में सुशोभित होगा और यह गदा कभी भी अधर्म के सामने नहीं झुकेगी।"
वायु देव ने उस दिव्य अंश को अपनी तपोभूमि पर रखा और हजारों वर्षों तक उसकी रक्षा की।
फिर आया हनुमान जन्म का समय। जब बाल हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था, तब इंद्र ने उन पर वज्र से प्रहार किया था। हनुमान जी मूर्छित हो गए। तब वायुदेव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपनी वायु रोक दी। सारा संसार तड़पने लगा। तब सभी देवता ब्रह्मा जी के साथ वायुदेव को मनाने आए।
तब ब्रह्मा जी ने वायुदेव से कहा - "अपने पुत्र को देखो।"
वायुदेव ने देखा तो हनुमान जी के हाथ में वही दिव्य कौमोदकी का अंश, जो अब एक छोटी सी सुनहरी गदा के रूप में चमक रहा था, स्वयं प्रकट हो गया था। यह देखकर सभी देवताओं ने हनुमान जी को वरदान दिए। कुबेर ने वरदान दिया - "तुम्हारी यह गदा कभी खाली नहीं जाएगी, इसका वार कभी विफल नहीं होगा।"
यही गदा लेकर हनुमान जी ने लंका में राक्षसों का संहार किया, यही गदा लेकर उन्होंने कालनेमि को मारा।
पर फिर एक ऐसी घटना घटी कि हनुमान जी को अपनी यह प्रिय गदा खोनी पड़ी।
रामायण के बाद, द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण का समय था, तब एक बार भीम को घमंड हो गया कि मुझसे ज्यादा बलशाली कोई नहीं है। भगवान कृष्ण ने भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमान जी को याद किया। हनुमान जी एक बूढ़े वानर के रूप में रास्ते में लेट गए और अपनी पूंछ से भीम का रास्ता रोक दिया। भीम ने बहुत कोशिश की पर पूंछ नहीं हिला पाया। तब भीम को एहसास हुआ कि यह कोई साधारण वानर नहीं है। तब हनुमान जी ने अपने असली रूप में दर्शन दिए।
उस समय हनुमान जी ने अपनी गदा भीम को आशीर्वाद के रूप में दे दी थी और कहा था - "हे भीम, तुम भी पवनपुत्र हो, आज से यह गदा तुम्हारी है, इससे तुम अधर्म का नाश करना।"
भीम ने उस गदा से महाभारत में बहुत युद्ध किया। पर महाभारत के अंत में, जब भीम ने गदा युद्ध में दुर्योधन को मारा, तो उस गदा पर दुर्योधन के अधर्मी रक्त की एक बूंद पड़ गई।
गदा, जो कि विष्णु अंश से बनी थी, अपवित्र हो गई। वह रोने लगी।
हनुमान जी ने अपनी दिव्य दृष्टि से यह देखा और तुरंत वहाँ प्रकट हुए। उन्होंने कहा - "भीम, यह गदा अब अपवित्र हो गई है, इसे अब पृथ्वी पर नहीं रखा जा सकता। इसे मुझे वापस हिमालय की गोद में तपस्या के लिए छोड़ना होगा, जब तक कि यह फिर से पवित्र न हो जाए।"
हनुमान जी ने उस गदा को उठाया और हिमालय के एक गुप्त पर्वत - गदा पर्वत पर ले गए। वहाँ उन्होंने उस गदा को एक कुंड के बीच में गाड़ दिया और उसके चारों ओर एक सुरक्षा चक्र बना दिया और कहा - "जब कलियुग में अधर्म बढ़ेगा, और जब कोई सच्चा रामभक्त यहाँ आकर सच्चे मन से राम नाम का जाप करेगा, तब यह गदा फिर से चमकेगी और फिर से धर्म की रक्षा के लिए मेरे हाथों में आएगी।"
कहते हैं वह गदा आज भी वहीं है। हिमालय के किसी अनजान हिस्से में, जहाँ आज तक कोई इंसान नहीं पहुँच पाया है, वहाँ एक कुंड है जिसके बीच में एक सुनहरी गदा आज भी तपस्या कर रही है। कई संतों ने हिमालय में तपस्या के दौरान दूर से उस गदा का प्रकाश देखा है।
तिब्बत के कुछ पुराने ग्रंथों में लिखा है कि उस गदा के आसपास कोई भी पक्षी नहीं जाता, वहाँ की बर्फ कभी नहीं पिघलती, और अमावस्या की रात को वहाँ से "जय श्री राम" की ध्वनि सुनाई देती है।
इसलिए कहते हैं, हनुमान जी आज गदा धारण नहीं करते, वे हाथ जोड़े हुए राम की भक्ति में लीन हैं। क्योंकि उनकी असली गदा तो भक्ति ही है। और वह दिव्य गदा तब तक तपस्या करेगी, जब तक कलियुग में फिर से धर्म की स्थापना की जरूरत नहीं पड़ती।
जब भी आप हनुमान जी की मूर्ति देखें जिसमें उनके हाथ में गदा नहीं है, तो समझ जाइएगा - वह भक्ति वाली मुद्रा है। और जब गदा है, तो वह रक्षा वाली मुद्रा है।
इस कथा की सीख है - शक्ति तभी तक पवित्र है जब तक वह धर्म के साथ है। अहंकार और अधर्म का एक बूंद भी बड़ी से बड़ी शक्ति को तपस्या करने पर मजबूर कर देता है।
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