sn vyas
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###श्रीमद्भागवत् महापुराण@sn7873 #2026श्रीमद्भागवत्_महापुराण07 ।। श्रीमद्भागवतमहापुराणम्।। 🚩प्रथमः स्कन्धः_ _अथ प्रथमोऽध्यायः 🚩 ⁉️श्रीसूतजी से शौनकादि ऋषियों का प्रश्न ⁉️ 📕 कथा प्रारम्भ। 📕 🍀( श्लोक संख्या 1 से 3 मंगलाचरण के हैं जो पूर्व में भेजा जा चुका हैं ) 🍀 ( दिए हुए संस्कृत श्लोक के नीचें हिंदी अर्थ लिखा हुआ हैं 👇) *नैमिषेऽनिमिषक्षेत्रे ऋषयः शौनकादयः।* *सत्रं स्वर्गाय लोकाय सहस्रसममासत॥४॥* *त एकदा तु मुनयः प्रातर्हुतहुताग्नयः।* *सत्कृतं सूतमासीनं पप्रच्छुरिदमादरात्॥५॥* _*ऋषय ऊचुः।*_ *त्वया खलु पुराणानि सेतिहासानि चानघ।* *आख्यातान्यप्यधीतानि धर्मशास्त्राणि यान्युत॥६॥* *यानि वेदविदां श्रेष्ठो भगवान् बादरायणः।* *अन्ये च मुनयः सूत परावरविदो विदुः ॥७॥* *वेत्थ त्वं सौम्य तत्सर्वं तत्त्वतस्तदनुग्रहात् ।* *ब्रूयुः स्निग्धस्य शिष्यस्य गुरवो गुह्यमप्युत ॥८॥* *तत्र तत्राञ्जसायुष्मन् भवता यद्विनिश्चितम् ।* *पुंसामेकान्ततः श्रेयस्तन्नः शंसितुमर्हसि ॥९॥* ✍️एक बार भगवान्‌ विष्णु एवं देवताओं के परम पुण्यमय क्षेत्र नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों ने भगवत्-प्राप्ति की इच्छा से सहस्र वर्षों में पूरे होने वाले एक महान् यज्ञ का अनुष्ठान किया ॥ ४ ॥ एक दिन उन लोगों ने प्रात: काल अग्रिहोत्र आदि नित्यकृत्यों से निवृत्त होकर सूतजी का पूजन किया और उन्हें ऊँचे आसनपर बैठाकर बड़े आदर से यह प्रश्न किया ॥ ५ ॥ऋषियों ने कहा—सूतजी ! आप निष्पाप हैं। आपने समस्त इतिहास, पुराण और धर्मशास्त्रों का विधिपूर्वक अध्ययन किया है तथा उनकी भलीभाँति व्याख्या भी की है ॥ ६ ॥ वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ भगवान्‌ बादरायण ने एवं भगवान्‌ के सगुण-निर्गुण रूप को जानने वाले दूसरे मुनियों ने जो कुछ जाना है—उन्हें जिन विषयों का ज्ञान है, वह सब आप वास्तविक रूप में जानते हैं। आपका हृदय बड़ा ही सरल और शुद्ध है, इसी से आप उनकी कृपा और अनुग्रह के पात्र हुए हैं। गुरुजन अपने प्रेमी शिष्य को गुप्त-से-गुप्त बात भी बता दिया करते हैं ॥ ७-८ ॥ आयुष्मन् ! आप कृपा करके यह बतलाइये कि उन सब शास्त्रों, पुराणों और गुरुजनों के उपदेशों में कलियुगी जीवों के परम कल्याण का सहज साधन आपने क्या निश्चय किया है ॥ ९ ॥ ✍️ क्रमशः ........
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