M P SINGH
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धूप सी तुम, छांव सा मैं... सुनहरी सी शाम तुम, ठहरा हुआ सा वक्त मैं। फर्क बस इतना है— तुम इस सादगी में भी किसी ख्वाब जैसी लगती हो, और मैं तुम्हें बस एकटक निहारने का आदी। — इस सादे हुस्न पर पूरी कायनात न्योछावर है, चलो अब बिना नखरे किए मेरी किस्मत बन जाओ..❤️💫 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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