sn vyas
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#ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः #ॐ नमो भगवते वासुदेवाय #ॐ #जय श्री हरि विष्णु #शुभ गुरुवार `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🙏🏻🦚` `#प्रभात_वंदन – श्रीगोविन्दाष्टकम्` `रचयिता – श्रीमच्छङ्कराचार्य जी` `गुरुवार – गोविन्द का दिन🌷` *सत्यं ज्ञानमनन्तं नित्यमनाकाशं परमाकाशं* *गोष्ठप्राङ्गणरिङ्खणलोलमनायासं परमायासम् ।* *मायाकल्पितनानाकारमनाकारं भुवनाकारं* *क्ष्मामानाथमनाथं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ १॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 जो सत्य , ज्ञान , अनन्त , नित्य हैं । जो आकाश से परे परमाकाश हैं । जो गोकुल के आँगन में बिना प्रयास रेंगते हैं , वही समस्त प्रयासों के कारण हैं । जो माया से अनेक रूप धारण करते हैं ,वही निराकार एवं समस्त भुवन के आकार हैं । जो पृथ्वी के नाथ होकर भी अनाथों के नाथ हैं – उन परमानन्द गोविन्द को प्रणाम ।` *मृत्स्नामत्सीहेति यशोदाताडनशैशव सन्त्रासं* *व्यादितवक्त्रालोकितलोकालोकचतुर्दशलोकालिम् ।* *लोकत्रयपुरमूलस्तम्भं लोकालोकमनालोकं* *लोकेशं परमेशं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ २॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 "मिट्टी खाई है" इस कारण यशोदा मैया के डांट तथा भय से डरने वाले । जिन्होंने मुख खोलकर १४ लोक दिखाए । जो तीनों लोकों के आधार स्तंभ हैं । जो दृश्य-अदृश्य दोनों से परे हैं । उन लोकेश परमेश गोविन्द को प्रणाम ।` *त्रैविष्टपरिपुवीरघ्नं क्षितिभारघ्नं भवरोगघ्नं* *कैवल्यं नवनीताहारमनाहारं भुवनाहारम् ।* *वैमल्यस्फुटचेतोवृत्तिविशेषाभासमनाभासं* *शैवं केवलशान्तं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ ३॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 जो देवताओं के शत्रुओं , पृथ्वी के भार औऱ भवसागर के रोग को हरते हैं । जो मोक्ष स्वरूप हैं। जो माखन खाने वाले होकर भी कुछ नहीं खाते एवं समस्त जगत को धारण करते हैं । उन केवल शांत शिवस्वरूप गोविन्द को प्रणाम ।` *गोपालं प्रभुलीलाविग्रहगोपालं कुलगोपालं* *गोपीखेलनगोवर्धनधृतिलीलालालितगोपालम् ।* *गोभिर्निगदितगोविन्दस्फुटनामानं बहुनामानं* *गोपीगोचरपथिकं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ ४॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 जो गोपाल हैं । जिनकी लीला ही विग्रह है । जो कुल के रक्षक हैं । जिन्होंने गोपियों के साथ खेल/क्रीड़ा कर गोवर्धन उठाया । जिनका नाम गायों ने भी गोविन्द कहा । जिनके अनेक नाम हैं । उन गोपियों के प्रिय गोविन्द को प्रणाम ।` *गोपीमण्डलगोष्ठीभेदं भेदावस्थमभेदाभं* *शश्वद्गोखुरनिर्धूतोद्गतधूलीधूसरसौभाग्यम् ।* *श्रद्धाभक्तिगृहीतानन्दमचिन्त्यं चिन्तितसद्भावं* *चिन्तामणिमहिमानं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ ५॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 जो गोपियों की मंडली में रहते हुए भी भेद में अभेद हैं । जिनके शरीर पर गायों के खुरों से उड़ी धूल का सौभाग्य है । जो श्रद्धा-भक्ति से मिलते हैं । जो चिंतामणि के समान हैं । उन गोविन्द को प्रणाम ।` *स्नानव्याकुलयोशिद्वस्त्रमुपादायागमुपारूढं* *व्यादित्सन्तीरथ दिग्वस्त्रा ह्युपुदातुमुपाकर्षन्तम् ।* *निर्धूतद्वयशोकविमोहं बुद्धं बुद्धेरन्तस्थं* *सत्तामात्रशरीरं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ ६॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 जो स्नान करती गोपियों के वस्त्र लेकर कदंब पर चढ़ गए । जब गोपियाँ वस्त्र मांगने आईं तो उन्हें दिखाने के लिए खींचा । जो शोक-मोह से रहित , बुद्धि के अंदर विराजमान औऱ सत्ता मात्र शरीर वाले हैं । उन गोविन्द को प्रणाम ।` *कान्तं कारणकारणमादिमनादिं कालमनाभासं* *कालिन्दीगतकालियशिरसि मुहुर्नृत्यन्तं नृत्यन्तम् ।* *कालं कालकलातीतं कलिताशेषं कलिदोषघ्नं* *कालत्रयगतिहेतुं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ ७॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 जो कारण के भी कारण , आदि एवं अनादि , काल के भी काल हैं । जो यमुना में कालियानाग के फन पर नृत्य करते हैं । जो काल से परे तथा कलियुग के दोषों को हरने वाले हैं । उन तीनों कालों के स्वामी गोविन्द को प्रणाम ।` *वृन्दावनभुवि वृन्दारकगणवृन्दाराध्यं वन्देऽहं* *कुन्दाभामलमन्दस्मेरसुधानन्दं सुहृदानन्दम् ।* *वन्द्याशेषमहामुनिमानसवन्द्यानन्दपदद्वन्द्वं* *वन्द्याशेषगुणाब्धिं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम् ॥ ८॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 वृन्दावन में देवताओं से पूजित , कुंद के फूल जैसी मंद मुस्कान वाले , संतों को आनंद देने वाले ,महामुनियों के वंदनीय चरणों वाले एवं संपूर्ण गुणों के सागर गोविन्द को मैं प्रणाम करता हूँ ।` `💦 फलश्रुति –` *गोविन्दाष्टकमेतदधीते गोविन्दार्पितचेता य* *गोविन्दाङ्घ्रिसरोजध्यानसुधाजलधौतसमस्ताघो* *गोविन्दं परमानन्दामृतमन्तःस्थं स तमभ्येति ॥* `श्लोकार्थ 👉🏻 जो गोविन्द को अर्पित मन से इसे पढ़ता है , उसके समस्त पाप धुल जाते हैं तथा वो परमानन्द गोविन्द को प्राप्त करता है ।` `जय श्री हरिहर🙏🏻` `ॐ नमः शिवाय🙏🏻` `ॐ नमो नारायणाय🙏🏻` `जय जय शङ्कर🚩` `हर हर शङ्कर🚩` `© सर्वाधिकार सुरक्षित । सर्वज्ञ शङ्कर🚩 चैनल` `🌄🌆 प्रभात वन्दन 🌆🌄` `#सर्वज्ञ_शङ्कर` `#गुरुवार_प्रभात_वंदन` `#श्रीगोविन्दाष्टकम्` `#आदिगुरु_शङ्कराचार्य` `#गोविन्द` `#परमानन्द` `#वृन्दावन` `#शिव_विष्णु_अभेद`
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