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jasbir - Author on ShareChat
jasbir
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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
नमसतं नृधूते ।।नमसरने अभूतै 0 नमसतं अलोके।।नमसर्त् असोकेा जाप साहिब की इन पंक्तियों में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी अकाल पुरख (ईश्वर) मीठा के उस सर्वशक्तिमान , असीम और निराकार स्वरूप का वंदन करते हैं, जो इस भौतिक जगत की तमाम सीमाओं ' से पूरी तरहू परे है। सांसारिक प्राणी जीवन की अनिश्चितताओं , मोह और भय के कारण निरंतर मानसिक रूप से लगे विचलित रहते हैं और कांपते रहते है। इसके विपरीत , परमात्मा किसी भी भय, काल या हलचल से परे स्थिर अचल और अडिग तेरा गुरु साहिब ईश्वर के इसी निर्भय स्वरूप को नमन करते हैं। जहाँ संसार का और वस्तु ' पंचतत्वों ( पृथ्वी, जल अग्नि, वायु, आकाश) से प्रत्येक जीव  निर्मित है और समय के साथ नष्ट होने के लिए बाध्य है वैहीं ईश्वर किसी भी भाणा भौतिक तत्व या योनि से उत्पन्न नहीं हुआ है। वह अजन्म, अमर और निराकार वृह जन्म औ़र मरण के इस् चक्र से पूर्णतः मुक्त है। इसके साथ ही॰ यह भौतिक ब्रह्मांड और इसके विभिन्नॅ लोक समय और स्थान की में बंधे हुए  हैं। परमात्मा इन सभी लोकों का रचयिता होकर भी इनसे सीमाओं अतीतः (परे) हैः उसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है॰ वह सर्वव्यापक है सांसारिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा सुख और दुख का चक्र है, जिससे हर प्राणी प्रभावित होता है, परंतु ईश्वर विकारों, और मोहनमाया के प्रभावों से दुखों 9ತ್ತ' पूरी तरह अछूता और सदैव आरनंदस्वरूप है। उसे कोई ' या शोक स्पर्श नहीं कर सकता। यह पावन बाणी मनुष्य को यह बोध कराती है कि उसका सच्चा आश्रय और शरण केवल वही अकाल पुरख है, जो भय, जन्म, लोक (सीमा) और शोक -इन चारों सांसारिक बंधनों से सदा मुक्त है। नमसतं नृधूते ।।नमसरने अभूतै 0 नमसतं अलोके।।नमसर्त् असोकेा जाप साहिब की इन पंक्तियों में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी अकाल पुरख (ईश्वर) मीठा के उस सर्वशक्तिमान , असीम और निराकार स्वरूप का वंदन करते हैं, जो इस भौतिक जगत की तमाम सीमाओं ' से पूरी तरहू परे है। सांसारिक प्राणी जीवन की अनिश्चितताओं , मोह और भय के कारण निरंतर मानसिक रूप से लगे विचलित रहते हैं और कांपते रहते है। इसके विपरीत , परमात्मा किसी भी भय, काल या हलचल से परे स्थिर अचल और अडिग तेरा गुरु साहिब ईश्वर के इसी निर्भय स्वरूप को नमन करते हैं। जहाँ संसार का और वस्तु ' पंचतत्वों ( पृथ्वी, जल अग्नि, वायु, आकाश) से प्रत्येक जीव  निर्मित है और समय के साथ नष्ट होने के लिए बाध्य है वैहीं ईश्वर किसी भी भाणा भौतिक तत्व या योनि से उत्पन्न नहीं हुआ है। वह अजन्म, अमर और निराकार वृह जन्म औ़र मरण के इस् चक्र से पूर्णतः मुक्त है। इसके साथ ही॰ यह भौतिक ब्रह्मांड और इसके विभिन्नॅ लोक समय और स्थान की में बंधे हुए  हैं। परमात्मा इन सभी लोकों का रचयिता होकर भी इनसे सीमाओं अतीतः (परे) हैः उसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है॰ वह सर्वव्यापक है सांसारिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा सुख और दुख का चक्र है, जिससे हर प्राणी प्रभावित होता है, परंतु ईश्वर विकारों, और मोहनमाया के प्रभावों से दुखों 9ತ್ತ' पूरी तरह अछूता और सदैव आरनंदस्वरूप है। उसे कोई ' या शोक स्पर्श नहीं कर सकता। यह पावन बाणी मनुष्य को यह बोध कराती है कि उसका सच्चा आश्रय और शरण केवल वही अकाल पुरख है, जो भय, जन्म, लोक (सीमा) और शोक -इन चारों सांसारिक बंधनों से सदा मुक्त है।
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    #satnam waheguru ji
    Wahegunuji 6 लोगों का प्यार वक़्त के साथ बदल जाता है, गुरू का प्यार पर हर हाल में साथ निभाता है। सिर्फ दुनिया चेहरा  देखती है, दिल और नीयत देखते हैं। सतनाम श्री वाहेगुरु जी Wahegunuji 6 लोगों का प्यार वक़्त के साथ बदल जाता है, गुरू का प्यार पर हर हाल में साथ निभाता है। सिर्फ दुनिया चेहरा  देखती है, दिल और नीयत देखते हैं। सतनाम श्री वाहेगुरु जी
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  • srikanthdusija - Author on ShareChat
    srikanthdusija
    #satnam waheguru ji #satnam waheguru
    सभी को सुख देने की क्षमता भले ही ৪মাই ম্াথ মঁ ন ৪্ী किन्तु  किसी को दुख न पहुँचे यह तो हमारे हाथ में ही है। वाहेगुरू जी ~e  श्री ९ सतनाम सभी को सुख देने की क्षमता भले ही ৪মাই ম্াথ মঁ ন ৪্ী किन्तु  किसी को दुख न पहुँचे यह तो हमारे हाथ में ही है। वाहेगुरू जी ~e  श्री ९ सतनाम
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    #satnam waheguru ji
    24 3 & बॅ4 भा्ललवा.. उठठा ठप्ल ला वे 34 Hiar , GUQU NANAK Goodnyomginev j` Hcucod Cn 'oon ২০২০ 24 3 & बॅ4 भा्ललवा.. उठठा ठप्ल ला वे 34 Hiar , GUQU NANAK Goodnyomginev j` Hcucod Cn 'oon ২০২০
    24
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    #satnam waheguru ji
    66 बिना कर्मों के न गुरबाणी पडी जा सकती है और न ही गुरू घर जाया जा सकता है, बहुत किस्मत वाली होती हैं वे शख्स्यितें जिन पर परमात्मा यह मेहर करता है! 66 बिना कर्मों के न गुरबाणी पडी जा सकती है और न ही गुरू घर जाया जा सकता है, बहुत किस्मत वाली होती हैं वे शख्स्यितें जिन पर परमात्मा यह मेहर करता है!
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    #satnam waheguru ji
    SHT SRIAKHL मउठभ নবচ খবধ BosB fsoeg भर्गउ শনম గిఠే পন্রতী gaqfell II wfeHg ரளfe HgII वै बी मन ठग्ठव गेमी 31#9|11| eifaayg Haaggs1ad, GOODMORNING SHT SRIAKHL मउठभ নবচ খবধ BosB fsoeg भर्गउ শনম గిఠే পন্রতী gaqfell II wfeHg ரளfe HgII वै बी मन ठग्ठव गेमी 31#9|11| eifaayg Haaggs1ad, GOODMORNING
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  • Anita bajaj - Author on ShareChat
    Anita bajaj
    #🙏गुरुद्वारा #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻गुरबानी #🌞गुड मॉर्निंग☕🌞 #🙏🏼 satnam waheguru
    हे बख्शनहारा हमारी भुल्ला बक्शो. सारे जग पर आ्ई बळा को दुर करो 6 हे बख्शनहारा हमारी भुल्ला बक्शो. सारे जग पर आ्ई बळा को दुर करो 6
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    #satnam waheguru ji
    १८ मड वे भग्लव प्टेव गै 5 af& Il ভ্ূরলা मग्ठे नगउ रा भग्लव टिव थन्भग्उभा चै॰ वेष्टी ठिम दठगा गेठ ಸಾೆ:I| বরাবূ বাঁম সাবিম্র নী -- 5=- ೧೬ೆನ e مم णत নিবনত নব ೯ ಕಷ 5 ஈப d8B ಶ 90T =foag ferudt గౌౌ সন্ত মাম এিসব নব মদয হ্াবিবার ' दर्गग्गुतु सी वा भग्लमा , মী নী নন্তবি १८ मड वे भग्लव प्टेव गै 5 af& Il ভ্ূরলা मग्ठे नगउ रा भग्लव टिव थन्भग्उभा चै॰ वेष्टी ठिम दठगा गेठ ಸಾೆ:I| বরাবূ বাঁম সাবিম্র নী -- 5=- ೧೬ೆನ e مم णत নিবনত নব ೯ ಕಷ 5 ஈப d8B ಶ 90T =foag ferudt గౌౌ সন্ত মাম এিসব নব মদয হ্াবিবার ' दर्गग्गुतु सी वा भग्लमा , মী নী নন্তবি
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    #satnam waheguru ji
    3 ಔತಪರಠರಬ್8tತ ஆப்குதததிக் தத &[0} ಪ್ರೊಣತತಔ[ daaad பத {খথেনেমন্ক্ ಕರೆಠಠರಣತೆ ٥ ಕತಣ್ಟಸೆ ಐರಣೆ good Morning 3 ಔತಪರಠರಬ್8tತ ஆப்குதததிக் தத &[0} ಪ್ರೊಣತತಔ[ daaad பத {খথেনেমন্ক্ ಕರೆಠಠರಣತೆ ٥ ಕತಣ್ಟಸೆ ಐರಣೆ good Morning
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    #satnam waheguru ji
    कैसी है तेरी बाणी , নানা নানক্ধ जो तन और मन दोनों को पवित्र कर दे। क्या महिमा गाऊँ तेरी, নানা নানক্ধ] तू तो पापियों को भी क्षमा कर देता है। धन-्धन श्री गुरू नानक देव जी। Amritvela Sack€laug कैसी है तेरी बाणी , নানা নানক্ধ जो तन और मन दोनों को पवित्र कर दे। क्या महिमा गाऊँ तेरी, নানা নানক্ধ] तू तो पापियों को भी क्षमा कर देता है। धन-्धन श्री गुरू नानक देव जी। Amritvela Sack€laug
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    #satnam waheguru ji
    క్షీ Good క్షీ Good
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