sn vyas
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#श्री शिव महापुराण कथा कुछ लोगों के मन में प्रश्न आता है, यदि परमेश्वर शिव ही सर्वोपरि है तो सभी लोग उनका पूजन क्यों नहीं करते है, इसका कारण है शिव माया, परमेश्वर शिव की माया सभी को मोहित कर देती है जिसके कारण साधारण लोग उन्हें जान नहीं पाते है और उन्हें परमेश्वर न जानकर केवल देवता मान लेते है। सनत्कुमार नो वेत्ति महिमानं महेशितुः। चतुर्भुजोऽपि विष्णुर्वै चतुर्वक्त्रोऽपि वै विधिः॥ ३ ॥ ​ हे सनत्कुमार! चतुर्भुज विष्णु तथा चतुर्मुख ब्रह्माजी भी महेश्वर की महिमा को नहीं जान पाते हैं॥ ​ चित्रमत्र न किञ्चिद्वै दुर्ज्ञेया खलु शाम्भवी। तया संमोहिताः सर्वे नार्चयन्त्यपि तं परम्॥ ४ ॥ ​ इसमें कोई आश्चर्य नहीं है; क्योंकि शिवजी की माया दुर्ज्ञेय है। उसी माया से मोहित होकर ये सभी संसारी लोग उन परमेश्वर की पूजा नहीं करते हैं॥ ​ वेदयेद्यदि वात्मानं स एव परमेश्वरः। तदा विदन्ति ते सर्वे स्वेच्छया न हि केऽपि तम्॥ ५ ॥ ​ यदि वे परमेश्वर स्वयं ही अपना ज्ञान करा दें, तभी वे सभी लोग उन्हें जान सकते हैं, अपनी इच्छा से कोई भी उन्हें नहीं जान पाता है॥ सर्वगोऽपि महेशानो नेक्ष्यते मूढबुद्धिभिः। देववद् बुध्यते लोके योऽतीतो मनसां गिराम्॥ ६ ॥ यद्यपि महेश्वर सर्वव्यापी हैं, किंतु मूढ़ बुद्धिवाले उन्हें देख नहीं पाते हैं। जो वाणी एवं मनसे परे हैं, उन्हें लोग मात्र देवता ही समझते हैं॥ शिव महापुराण, शतरूद्र संहिता ,अध्याय 8
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