सुशील मेहता
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हरियाली तीज हरियाली तीज हिन्दूओं का एक प्रसिद्ध त्योहार है यह त्योहार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन हिन्दू महिलाएँ उपवास रखती है। उत्तरी भारत के सब नगरों में विशेष रूप से मनाया जाता है। घर-घर में झूले पड़ते हैं। नारियों के समूह लोक गीत गाती है। सावन में सुन्दर से सुन्दर पकवान, गुँजिया, घेवर, फैनी आदि बेटियों को सिंधारा भेजा जाता है। इस तीज पर मेंहदी लगाने को विशेष महत्त्व है। स्त्रियाँ पैरों आलता भी लगाती हैं जो सुहाग का चिन्ह माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शिव और पार्वती का इस दिन पुनर्मिलन हुंआ था। इस दिन हिन्दू महिलाएँ भगवान शिव और पार्वती कीपूजा करती है। इस दिन को छोटी तीज व श्रावण तीज के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी कहा जाता है कि भगवान शिव ने देवी पार्वती जी के कहने पर यह आर्शीवाद दिया कि जो कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी तो उसके विवाह में आने वाली बाधायें दूर होगी। इस दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया था। इस दिन महिलायें उपवास रखती है और हरियाली तीज की कथा सुनती है। भगवान शिव व पार्वती की पूजा करती है। विवाहित महिलायें यह व्रत इसलिए करती है उनके पति की आयु लम्बी हो और उनका परिवार में सुखों की वृद्धि हों। भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि इस व्रत को जो भी स्त्री पूर्ण श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग प्राप्त होगा। #शुभ कामनाएँ 🙏
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