सुशील मेहता
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कल्कि अवतार जयंती
हिंदू धर्म में और मुख्य रूप से वैष्णव परंपरा में वैष्णवों द्वारा हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती के रूप में मनाया जाता है| हर साल कल्कि जयंती पर भगवान विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है| इस दिन, भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपने द्वारा किए गए सभी बुरे कार्यों या पापों के लिए माफी मांगते हैं। साथ ही, वे अपने परिवार के शांतिपूर्ण जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं| भगवान कल्कि के आगमन को चिह्नित करने के लिए कल्कि जयंती का त्यौहार मनाया जाता है। भगवान कल्कि देवता, भगवान विष्णु के दसवें अवतार हैं। देवता के सभी 10 अवतारों में से 9, पहले ही अवतारित हो चुके हैं और केवल दसवें यानी अंतिम अवतार, भगवान कल्कि प्रकट होना बाकी है। सत्य युग के पुनरुत्थान और बुरे कर्मों (अधर्म) को खत्म करने के लिए, भगवान महाविष्णु के कलयुग में भगवान कल्कि के रूप में आने की उम्मीद है। इसलिए, दुनिया भर में देवता के आगमन की उम्मीद करने और आनंद लेने के लिए त्यौहार देश भर में कल्कि जयंती के रूप में मनाया जाता है। संस्कृत शब्द से, "कालका", नाम, 'कल्कि' उत्पन्न हुआ है। "कल्कि" नाम उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो इस ब्रह्मांड से सभी तरह की गंदगी और कचरे को समाप्त करता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु भगवान कल्कि के रूप में प्रकट होंगे ताकि अंधेरे बलों और इस दुनिया से बुराई को दूर किया जा सके, जिससे इस ब्रह्मांड में धार्मिकता (धर्म) और शांति स्थापित हो सके। यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्युत्थानम अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ||” ये श्लोक तो आपने सुना ही होगा भगवत गीता में जब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा, कि जब-जब धर्म की हानि होती है अधर्म का प्रकोप बढ़ने लगता है तब तब मेरा अवतार इस सृष्टि को पाप मुक्त करने हेतु निश्चित तौर पर होता है। आप यह जान लीजिए जब भी किसी प्रकार की आतताई बढ़ने लगती है तब भगवान का अवतार अवश्य होता है। चाहे वह कौन सा भी युग हो। अभी वर्तमान में कल युग चल रहा है और इस कलयुग में “कल्कि अवतार” होगा ऐसा शास्त्रों का कहना है। कल्कि अवतार के रूप में भगवान विष्णु अपना दसवां रुप प्रकट करेंगे ऐसा शास्त्रों का मानना है। #शुभ कामनाएँ 🙏
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