sn vyas
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#जय श्री हरि #ॐ नमो भगवते वासुदेवाय #ओम नमो भगवते वासुदेवाय
अजरममरमेकं ध्येयमाद्यन्तशून्यं
सगुणमगुणमाद्यं स्थूलमत्यन्तसूक्ष्मम् ।
निरुपममुपमेयं योगिविज्ञानगम्यं
त्रिभुवनगुरुमीशं सम्प्रपद्यस्व विष्णुम् ॥
जो अजर, अमर, अद्वितीय, ध्येय, अनादि, अनन्त, सगुण, निर्गुण, सबके आदि कारण, स्थूल, अत्यन्त सूक्ष्म, उपमारहित, उपमाके योग्य तथा योगियोंके लिये ज्ञानगम्य हैं, उन त्रिभुवनगुरु भगवान् विष्णुकी शरण लो।
॥ ॐ नमो नारायणा ॥
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