sn vyas
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#शुभ बुधवार #ॐ गं गणपतये नमः #जय श्री गणेश
*॥ गणितालोक – मङ्गलाचरण ॥*
`🕉️ श्री गणेशाय नमः 🚩`
*चत्वारि शृङ्गा त्रयो अस्य पादा द्वे शीर्षे सप्तहस्तासो अस्य ।*
*त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति महो देवो मर्त्याँ आ विवेश ॥*
[ `ऋक्-संहिता ४.५८.३` ]
`श्लोकार्थ 👉🏻 इस मंत्र में वृषभ-रूप परमेश्वर का वर्णन है । उसके चार सींग हैं , तीन चरण/पग/पैर हैं , दो सिर हैं एवं सात हाथ हैं । वह तीन प्रकार से बँधा हुआ है , वह वृषभ रोरवीति अर्थात् – नाद करता है । वह महान् देव मनुष्यों में प्रविष्ट हुआ है ।`
`भावार्थ 👉🏻 ( गणित का वैदिक स्वरूप ) यह वृषभ कोई सामान्य पशु नहीं है । यह गणित-रूपी गणपति है !`
*चत्वारि शृङ्गा –* `इसके चार शृङ्ग/सिंग – योग + ( एकत्रीकरण ) , ऋण – ( वियोग ) , गुणन × (गुणितिकरण ) तथा भाग ÷ ( विभाजन ) हैं । ये ही गणित के चार प्रधान कर्म हैं ।`
*त्रयो अस्य पादाः –* `इसके तीन पाद/पैर – १ , ९ , औऱ १० हैं । इन्हीं तीन से सम्पूर्ण संख्या-जगत् की गति बनती है ।`
*द्वे शीर्षे –* `इसके दो शीर्ष/सिर हैं – एक आरोह एवं दूसरा अवरोह अथवा एक सिर अङ्काम्नाय तथा दूसरा सिर अक्षराम्नाय है ।`
*सप्तहस्तासः –* `इसके सात हाथ – १ औऱ ९ के मध्य के ७ अङ्क – २ , ३ , ४ , ५ , ६ , ७ , व ८ जो सम्पूर्ण अर्थों को सिद्ध करते हैं ।`
*त्रिधा बद्धः –* `यह देश , काल एवं वस्तु – इन तीनों से बँधा हुआ है ।`
*रोरवीति –* `यह अभीष्ट फल की वर्षा करने वाला तथा शब्द-ब्रह्म-रूप में गर्जना करने वाला है ।`
`🙇🏻♂️ ऐसे गणित के आदिदेव , गणपति-संज्ञक श्रीमहादेव का मैं तादात्म्यभाव से स्मरण , वन्दन औऱ अनुगमन करता हूँ ।`
*गणेशं प्रमथाधीशं निर्गुणं सगुणं विभुम् ।*
*योगिनो यत्पदं यान्ति तं गौरीनन्दनं भजे ॥*
[ `गणेशपूर्वतापिन्युपनिषत्` ]
`○●○॥ गणित ही गणेश है , गणेश ही गणित है ॥○●○`
`जय श्री गणेश🚩`
*वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।*
*निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥*
`आप समस्त का आज का दिवस मङ्गलमय हो , गणपति महाराज सभी के कार्य निर्विघ्न पूर्ण करें💐🚩`
`ॐ गं गणपतये नमः`
`ॐ वक्रतुण्डाय नमः`
`गणाधिपतये नमः`
`हर हर महादेव🔱`
`जय जय शङ्कर🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
`~ सर्वज्ञ शङ्कर🚩`
`🌄🌆 प्रभात वन्दन 🌆🌄`
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