sn vyas
4K views • 1 months ago
#जय मां भवानी
*॥ एक ही शिवा — दो स्वरूप — धर्मरूपा एवं विपद्रूपा ॥*
`📖 प्रसङ्ग — ऋषियों ने पूछा — देवी कभी श्री बनकर आती हैं , कभी विपत्ति बनकर क्यों ? सूतजी बोले — देवी का भेद नहीं है , अपितु तुम्हारी मति का भेद है ! जहाँ धर्म–बुद्धि है वहाँ वही शिवा श्री हैं , जहाँ अहंकार से धर्म का हेलन है वहाँ वही शिवा दर्पोपशमनी बन जाती हैं !`
> यत्र धर्ममतिः शान्तिस्तत्र श्रीः कान्तिरेव च ।
> अधर्मो यत्र सा तत्र विपद्रूपा स्वयं शिवा ॥३२॥
> अहंकृतिवशाद्यो हि कुरुते धर्महेलनम् ।
> दर्पोपशमनी तस्य सैव देवी महामते ॥३३॥
[ `श्रीदेव्युपपुराण ( महाभागवत ) , अध्याय ४२ , श्लोक ३२–३३`]
`📝 श्लोकार्थ 👉🏻 जहाँ धर्ममति है वहीं शान्ति , श्री तथा कान्ति का वास है , जहाँ अधर्म है वहाँ वे शिवा स्वयं विपत्ति बनकर आ जाती हैं ॥३२॥`
`अहंकार के वश में होकर जो धर्म का हेलन ( अवहेलना/अपमान/उल्लंघन ) करता है , हे महामते ! वे ही देवी उसके घमण्ड को चूर कर देती हैं ॥३३॥`
`🌹 भावार्थ 👉🏻 देवी दो नहीं हैं ! तुम्हारी मति निश्चित/तय करती है कि — देवी किस स्वरूप में आयेंगी ! धर्ममति है तो वही देवी — शान्ति बनकर घर में विराजमान होंगी , श्री बनकर वर्षा करेंगी , कान्ति बनकर उजियारा प्रसरित करेंगी ! अधर्म है तो वही देवी — विपद्रूपा बनकर समस्त हर लेंगी ! औऱ जो अहंकार में आकर कहता है "मैं ही धर्म हूँ" एवं धर्म का हेलन ( अवहेलना/अपमान/उल्लंघन ) करता है , उसका दर्प तोड़ने स्वयं देवी आती हैं — सैव देवी !`
`🎯 सरल सूत्र — धर्ममति रखोगे तो — देवी श्री स्वरूप हैं ! अहंकार रखोगे तो — देवी विपत्ति स्वरूप हैं ! चुनाव तुम्हारा है !`
`जय माँ आदिशक्ति🙏🏻🚩`
`ललिताम्बिकायै नमः🌺`
`श्रीविद्यायै नमः🌸`
`त्रिपुरसुन्दर्यै नमः🌹`
`श्रीमात्रे नमः🚩`
`श्रीकाल्यै नमः🚩`
`श्रीतारायै नमः🚩`
`श्रीत्रिपुरायै नमः🚩`
`श्रीभुवनेश्वर्यै नमः🚩`
`श्रीअम्बिकायै नमः🚩`
`श्रीदुर्गापरमेश्वर्यै नमः🚩`
`नमश्चण्डिकायै🚩`
`श्रीदक्षिणामूर्तये नमः🚩`
`शिव शिव शिव शिव शिव🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
`जय जय शङ्कर🚩`
`श्री गुरुभ्यो नमः🙇🏻♂️👣`
`🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄`
`© सर्वाधिकार सुरक्षित । सर्वज्ञ शङ्कर🚩 चैनल`
`#प्रभातवन्दन`
`#दर्पोपशम`
`#विपद्रूपा_शिवा`
`#यत्र_धर्ममतिः`
`#धर्ममति`
`#धर्महेलन`
`#शान्ति_श्री_कान्ति`
`#देव्युपपुराण`
`#महाभागवत`
`#सर्वज्ञ_शङ्कर🚩`
`#आदिअनादि अनन्तशिवहर🔱`
28 shares