Mahendra Narayan
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समय समन्दर समय नदी है । समय गगन तो समय जमी है ॥ समय वतन है समय जहां है । समय नही फिर कौन कहाँ है ॥ जीव समय सब नर आधारा I साँसें जीवन रिश्ता सारा ॥ सृष्टि प्रकृति सब समय समाए । देव समय सब रूप बनाए ॥ #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #कविता #📚कविता-कहानी संग्रह #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍
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