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अनिल साहू - Author on ShareChat
अनिल साहू
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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
Ming Tct ವu< 8uRoqluLL0,1dJM7 q೩5935೩೩೩  सदूचिन्तनः. मिंकर२६ . 08,0g.38 भगवान Oaarl कृष् जिनको हन परमला काा मानने ( , जिन्हने अपनेजीवन க3ன नें मह५ कार्यकिय हैं अनुकणण कखे हमशीक्ुदर गरणगकीओर কিল্ু? ध्र्ने उ॰कोे इतनी लेक॰ Sorr &rqaa& ! टॅप्रियग ह किलखं व्यक्त उनको अपना आर्ननकर पूजतेहं | ख्चे अर्थेनें उनको प्ूजायी ह किहमभी उबक रवहर् स्मनें बनय हुए नुर्ग पर्चलें | कष्णा <न्मष्ट ahonotnicial . Shantikun] RIshl Chintan  shantikunj Vided WWawgporg
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    शुभ अरुणोदय "देह" ম ঐষা "रोग" अपनी होकर भी हानि पहुंचाता है.. और "औषधि" वन में पैदा होकर भी हमारा लाभ ही करती है.. "हित' वाला पराया भी अपना है॰. चाहने और अहित करने वाला अपना भी पराया है..!! गुरुदेव जय
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् कंस और चाणूर जैसे असुरों का संहार करने वाले, देवकी और वसुदेव के हृदय को परम आनंद प्रदान करने वाले, संपूर्ण संसार के मार्गदर्शक और जगद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण के पावन चरणों में कोटि-कोटि वंदन समस्त जगत के तारणहार, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की आपको और आपके पूरे परिवार को मंगलमय हार्दिक शुभकामनाएँ माखनचोर, बंशीधर का आशीर्वाद आपके जीवन में सुख शांति, समृद्धि और अपार आनंद लेकर आए हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।।
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं बिनु  सेएँ मम स्वामी Rf= হাম নমামি নমামি নমামী सरन गएँ मो से अघ रासी होहिं सुद्ध नमामि अबिनासी तुलसीदास जी स्पष्ट करते हैं कि जीव चाहे कितने भी प्रयास राम की कृपा और सेवा के बिना मोक्ष या कर ले॰ लेकिन श्री भवसागर से मुक्ति संभव नहीं है, संसार-चक्र और अज्ञानता से मुक्ति पाने का एकमात्र सहज साधन भगवान श्री राम की अनन्य भक्ति और सेवा ही है, जीव चाहे कितना भी पापी क्यों न हो, यदि वह सच्चे मन से प्रभु की शरण में चला जाता है॰ तो ईश्वर उसके सारे पाप नष्ट कर उसे परम पावन बना देते हैं॰ ऐसे कृपालु स्वामी श्री राम को मैं बार-बार हूँ, नमस्कार करता हूँ॰ नमस्कार करता हूँ नमस्कार करता
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गुरुर्बह्मा गुरुविंष्णुः गुरुदेंवो महेश्वरः || [ गुरुः साक्षातू परं बहा तस्मै श्रीगुरवे नमः || शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं शुभकामनाएं देने वाला नहीं , शिक्षक केवल  নান  बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला होत है। वह समाज और राप्ट्र के निर्माण का आथार है, क्योंकि सच्चे शिक्षक ही संस्कार , चरित्र और उज्जवल भविप्य की नींव रखवे हैं। ಶ ಹT  எ सम्मान ही सच्ची सस्कार থিঃা ৪. चरित्र उज्जवल भविप्य अखिल विश्व गायत्री परिवार
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    स्वीकार की हुई गलती एक विजय है.
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गायत्रीतीर्थ शान्तिकञ्ज मन की शक्ति अपार है। वेगवान होने के कारण वह शीघ्र वश में नहीं आता | बिगड़ उठे तो ऊँट में चढ़ने के इच्छुक बालक की तरह झकझोर कर रख देता है। यदि मन शुद्ध , पवित्र और संकल्पवान बन जाए तो हमारे जीवन की धारा ही बदल सकती है। जिसने मन को जीत लिया उसने जगत को जीत लिया की कहावत चरितार्थ होे सकती है। ज्योति, १९६७ जुलाई Nअखण्ड युग बदलेगा , हम बदलेंगे - हम सुधरेंगे -  युग सुधरेगा शताद्दी  दाप ২০০: స్త్ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शनाकी 1926 2026 அ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YoUTUBB Shantikunj Rishi chintan 8439014110 wwwawgporg
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गायत्रीतीर्थ शान्तिकुञ्ज लोहा जब तक भट्टी में रहता है , लाल रहता है, भट्टी से बाहर निकालते ही फिर काला होे जाता है। साँसारिक मनुष्य की भी यही हालत है, वह पूजा के स्थान में या साधुओं के सत्संग में रहने के समय धार्मिक भावों से भरा रहता है , पर इनसे अलग होते ही सारे श्रेष्ठ भावों को खो बैटता है। ~अखण्ड ज्योति, १९६४ फरवरी युग सुधरेगा  युग बदलेगा , हम बदलेंगे - हम सुधरेंगे -  शताद्दी  दाप 1 वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शनाकी 1926 2026 அ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YoUTOBB Shantikunj Rishi chintan 8439014110 wwwawgporg
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गॅ्तिभानगीता madby 0 Day One Shloka Keeps Stress Away श्रृणुयादपि यो नरः। श्रद्धावाननसयश्च सोउपि मुक्तः शुभाँल्लोकान् प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम्।। 1 8. ७१ जो मनुष्य श्रद्धायुक्त और दोषदृष्टि से रहित होकर इस गीताशास्त्र का श्रवण க, वह भी पापों से मुक्त होकर भी उत्तम कर्म करने वालों के श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त होगा।
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    মীতুন संसार में हैं ? क्या स्वर्ग और नरक इसी सबके मूल में स्वर्ग जितने भी सात्विक दैवी भाव हैं 37 की स्वर्णिम आभा है। उन्हें धारण करने में मनुष्य आंतरिक सुख का अनुभव करता है। क्षमा, दया, प्रेम॰ मृदुता, और संतोष सहानुभूति इन सभी दैवी  को अपने जीवन में गुणों सत्याचार उतारने से स्वर्ग जैसा सुख मिलता है। इन सबके मूल में भगवान भगवान की विशेष कृपा से मनुष्य इनके अनंत सुख का हैं उसका विवेक जाग्रत होता है । उसके हृदय में अनुभव करता है विराजित परम प्रभु उसे स्वर्ग का सुख प्रदान करते हैं | स्वर्ग आप की भी पहुँच के भीतर है, क्योंकि आप इन ईश्वरीय गुणों को धारण कर सकते हैं| चरित्र का पूर्ण विकास कर सकते हैं। रखिए मनुष्य शुभ कार्य करके देव बनते हैं। अतः याद शुभ कर्म कीजिए और इसी शरीर से भूसुर का पवित्र पद प्राप्त कीजिए। शुभ कार्य ही हैं | उन्हें करने में मनुष्य स्वर्ग का पुजते सुख और शांति प्राप्त करता है। आप शुद्ध, तेजस्वी, आनंदमय एवं प्रकाशवान् हैं | इसलिए आत्मबंधु दैवी को धारण करके स्वर्ग का सुख लूटिए। TUi नरक का प्रधान कारण तामसी भाव है। मनुष्य जब अज्ञान में होता है, तभी पाप करता है। मन में जमे हुए मनुष्य से दुर्भाव कराते हैं, अनेक नारकीय परेशानियों में धकेलते हैं दुष्कर्म अनीति और अधर्म के विचार सर्वथा त्यागने योग्य है।जो दैवी गुणों की उपेक्षा कर असत्य और पाशविक भावों को अपनाते हैं, उन्हें अपयश ही मिलता है ज्योति फरवरी १९६० पृष्ठ-१२ १४ २६८ अखण्ड মীতুন संसार में हैं ? क्या स्वर्ग और नरक इसी सबके मूल में स्वर्ग जितने भी सात्विक दैवी भाव हैं 37 की स्वर्णिम आभा है। उन्हें धारण करने में मनुष्य आंतरिक सुख का अनुभव करता है। क्षमा, दया, प्रेम॰ मृदुता, और संतोष सहानुभूति इन सभी दैवी  को अपने जीवन में गुणों सत्याचार उतारने से स्वर्ग जैसा सुख मिलता है। इन सबके मूल में भगवान भगवान की विशेष कृपा से मनुष्य इनके अनंत सुख का हैं उसका विवेक जाग्रत होता है । उसके हृदय में अनुभव करता है विराजित परम प्रभु उसे स्वर्ग का सुख प्रदान करते हैं | स्वर्ग आप की भी पहुँच के भीतर है, क्योंकि आप इन ईश्वरीय गुणों को धारण कर सकते हैं| चरित्र का पूर्ण विकास कर सकते हैं। रखिए मनुष्य शुभ कार्य करके देव बनते हैं। अतः याद शुभ कर्म कीजिए और इसी शरीर से भूसुर का पवित्र पद प्राप्त कीजिए। शुभ कार्य ही हैं | उन्हें करने में मनुष्य स्वर्ग का पुजते सुख और शांति प्राप्त करता है। आप शुद्ध, तेजस्वी, आनंदमय एवं प्रकाशवान् हैं | इसलिए आत्मबंधु दैवी को धारण करके स्वर्ग का सुख लूटिए। TUi नरक का प्रधान कारण तामसी भाव है। मनुष्य जब अज्ञान में होता है, तभी पाप करता है। मन में जमे हुए मनुष्य से दुर्भाव कराते हैं, अनेक नारकीय परेशानियों में धकेलते हैं दुष्कर्म अनीति और अधर्म के विचार सर्वथा त्यागने योग्य है।जो दैवी गुणों की उपेक्षा कर असत्य और पाशविक भावों को अपनाते हैं, उन्हें अपयश ही मिलता है ज्योति फरवरी १९६० पृष्ठ-१२ १४ २६८ अखण्ड
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  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    दिनांक : 5 ன்! எர் !! रुको मत !!! जब तक कि लक्ष्य न प्राप्त हो जाए। ক্রর 37 दूसरा हमारे प्रति बुराई करे {4 उद्वेगजनक बात कहे तो और उसे उत्तर মঙ্কত लेन्ै आगे नर्हीं बढ़ता | अपने ही मन में कह चाहिए कि इसका सबसे अच्छा उत्तर में जुटा मौन। जो अपने कर्त्तव्य कार्य 67 [ತವ್ಷತೆ के अवगुणों की खोज में नहीं है और आंतरिक प्रसन्नता रहती है। ফেনা जीवन में उतार- चढ़ाव आते हो रहते हैं। हँसते रहो, मुस्करांते रहो। ऐसा मुख किँस काम का जो हँसे नहीं मुस्कराए नर्हीं| जो व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति स्थिर रखना चाहते हैं , उनको दूसरों की आलोचनाओं से चिढ़ना नहीं चाहिए। हारिए न हिम्मत /६
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