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अनिल साहू - Author on ShareChat
अनिल साहू
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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
ऊँ भूर्भुवः स्वः মীমনায 24-08-2026 आज का सदचिंतन | ^ शीर्षकः- परमात्मा के लिए पुकार है उपासना | उपासना का अर्थ है- दैवीय शक्तियों के समीप बैठना। बैठनाः 7 उगते हुए सूरज के सामने बैठकर गुरु के पास उसके ध्यान में तल्लीन हो जाना- यही उपासना है। () 34ামনা ম সন্ থান, মীন নঠা সানা ই, নন মী अंतरात्मा की वाणी सुनाई देती है, परमात्मा का स्वर निखर उठता है। उपासना में जब आँखें बंद होती हैं तब ही वे दृश्य उभरते हैं, जो आँखों से नहीं பளி देखें जा सकते। इस तरह से उपासना ही वह माध्यम है, जो हमें वास्तव में अंतरात्मा से जोड़ती है, परमात्मा के समीप ले जाती है। अतः उपासना वास्तव में हमारे जीवन को योगमय बनाने की पद्धति है, परमात्मा से साधन है। इसलिए उपासना का अभ्यास हमें जुड़ने का  अपने दैनिक जीवन में नित्य करना चाहिए। अखंड ज्योति , अप्रैल-२०१७ प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ, पटना (बिहार) -00~ For More Updates Follow Us On < YOUTUBE CHANNEL:- PYP BIHAR FACEBOOK:- PYP BIHAR INSTAGRAM:- PYP BIHAR
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं पितु  स्वामि सखा मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ भगवान जब वनवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पहुँचते हैं और हैं, तब महर्षि वाल्मीकि उनसे रहने के लिए योग्य स्थान পুত্তন श्रीराम के वास्तविक स्वरूप को पहचानते हुए बताते हैं कि उनके रहने के लिए सबसे उत्तम स्थान कहाँ है बाल्मीकि जी कहते है कि हे तात! जिनके स्वामी, मित्र, पिता, माता और गुरु सब कुछ केवल आप ही हैं, उनके मन रूपी मंदिर में आप सीता जी और अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ निवास कीजिए॰ ईश्वर को पाने के लिए बाहरी स्थानों की तलाश करने के बजाय अपने मन को निष्काम, निर्मल और अनन्य भक्ति से भरकर उसे प्रभु का मंदिर बनाना चाहिए हरि शरणं पितु  स्वामि सखा मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ भगवान जब वनवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पहुँचते हैं और हैं, तब महर्षि वाल्मीकि उनसे रहने के लिए योग्य स्थान পুত্তন श्रीराम के वास्तविक स्वरूप को पहचानते हुए बताते हैं कि उनके रहने के लिए सबसे उत्तम स्थान कहाँ है बाल्मीकि जी कहते है कि हे तात! जिनके स्वामी, मित्र, पिता, माता और गुरु सब कुछ केवल आप ही हैं, उनके मन रूपी मंदिर में आप सीता जी और अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ निवास कीजिए॰ ईश्वर को पाने के लिए बाहरी स्थानों की तलाश करने के बजाय अपने मन को निष्काम, निर्मल और अनन्य भक्ति से भरकर उसे प्रभु का मंदिर बनाना चाहिए
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं मनिदीप, धरू जीह देहरीं द्वार যাম নাম तुलसी भीतर बाहेरहु, जौं उजिआर 4/67 तुलसीदास जी कहते हैं कि यदि तुम अपने अंदर तमन) और बाहर ।संसार) दोनों जगह उजाला चाहते हो॰ तो अपनी जीभ रूपी चौखट पर राम-्नाम रूपी दीपक को रख लो अर्थात जिस तरह घर की चौखट पर रखा दीपक घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ रोशनी फैलाता है॰ उसी तरह जीभ से नाम जप करने से मन का अंतःकरण शुद्ध होता है और व्यक्ति का राम व्यवहार व कर्म श्रेष्ठ बनता है
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    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् कंस और चाणूर जैसे असुरों का संहार करने वाले, देवकी और वसुदेव के हृदय को परम आनंद प्रदान करने वाले, संपूर्ण संसार के मार्गदर्शक और जगद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण के पावन चरणों में कोटि-कोटि वंदन समस्त जगत के तारणहार, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की आपको और आपके पूरे परिवार को मंगलमय हार्दिक शुभकामनाएँ माखनचोर, बंशीधर का आशीर्वाद आपके जीवन में सुख शांति, समृद्धि और अपार आनंद लेकर आए हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।।
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    स्वीकार की हुई गलती एक विजय है.
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    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं बिनु  सेएँ मम स्वामी Rf= হাম নমামি নমামি নমামী सरन गएँ मो से अघ रासी होहिं सुद्ध नमामि अबिनासी तुलसीदास जी स्पष्ट करते हैं कि जीव चाहे कितने भी प्रयास राम की कृपा और सेवा के बिना मोक्ष या कर ले॰ लेकिन श्री भवसागर से मुक्ति संभव नहीं है, संसार-चक्र और अज्ञानता से मुक्ति पाने का एकमात्र सहज साधन भगवान श्री राम की अनन्य भक्ति और सेवा ही है, जीव चाहे कितना भी पापी क्यों न हो, यदि वह सच्चे मन से प्रभु की शरण में चला जाता है॰ तो ईश्वर उसके सारे पाप नष्ट कर उसे परम पावन बना देते हैं॰ ऐसे कृपालु स्वामी श्री राम को मैं बार-बार हूँ, नमस्कार करता हूँ॰ नमस्कार करता हूँ नमस्कार करता
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गायत्रीतीर्थ शान्तिकञ्ज मन की शक्ति अपार है। वेगवान होने के कारण वह शीघ्र वश में नहीं आता | बिगड़ उठे तो ऊँट में चढ़ने के इच्छुक बालक की तरह झकझोर कर रख देता है। यदि मन शुद्ध , पवित्र और संकल्पवान बन जाए तो हमारे जीवन की धारा ही बदल सकती है। जिसने मन को जीत लिया उसने जगत को जीत लिया की कहावत चरितार्थ होे सकती है। ज्योति, १९६७ जुलाई Nअखण्ड युग बदलेगा , हम बदलेंगे - हम सुधरेंगे -  युग सुधरेगा शताद्दी  दाप ২০০: స్త్ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शनाकी 1926 2026 அ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YoUTUBB Shantikunj Rishi chintan 8439014110 wwwawgporg
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गुरुर्बह्मा गुरुविंष्णुः गुरुदेंवो महेश्वरः || [ गुरुः साक्षातू परं बहा तस्मै श्रीगुरवे नमः || शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं शुभकामनाएं देने वाला नहीं , शिक्षक केवल  নান  बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला होत है। वह समाज और राप्ट्र के निर्माण का आथार है, क्योंकि सच्चे शिक्षक ही संस्कार , चरित्र और उज्जवल भविप्य की नींव रखवे हैं। ಶ ಹT  எ सम्मान ही सच्ची सस्कार থিঃা ৪. चरित्र उज्जवल भविप्य अखिल विश्व गायत्री परिवार
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गायत्रीतीर्थ शान्तिकुञ्ज लोहा जब तक भट्टी में रहता है , लाल रहता है, भट्टी से बाहर निकालते ही फिर काला होे जाता है। साँसारिक मनुष्य की भी यही हालत है, वह पूजा के स्थान में या साधुओं के सत्संग में रहने के समय धार्मिक भावों से भरा रहता है , पर इनसे अलग होते ही सारे श्रेष्ठ भावों को खो बैटता है। ~अखण्ड ज्योति, १९६४ फरवरी युग सुधरेगा  युग बदलेगा , हम बदलेंगे - हम सुधरेंगे -  शताद्दी  दाप 1 वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शनाकी 1926 2026 அ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial YoUTOBB Shantikunj Rishi chintan 8439014110 wwwawgporg
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गॅ्तिभानगीता madby 0 Day One Shloka Keeps Stress Away श्रृणुयादपि यो नरः। श्रद्धावाननसयश्च सोउपि मुक्तः शुभाँल्लोकान् प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम्।। 1 8. ७१ जो मनुष्य श्रद्धायुक्त और दोषदृष्टि से रहित होकर इस गीताशास्त्र का श्रवण க, वह भी पापों से मुक्त होकर भी उत्तम कर्म करने वालों के श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त होगा।
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    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    दिनांक : 5 ன்! எர் !! रुको मत !!! जब तक कि लक्ष्य न प्राप्त हो जाए। ক্রর 37 दूसरा हमारे प्रति बुराई करे {4 उद्वेगजनक बात कहे तो और उसे उत्तर মঙ্কত लेन्ै आगे नर्हीं बढ़ता | अपने ही मन में कह चाहिए कि इसका सबसे अच्छा उत्तर में जुटा मौन। जो अपने कर्त्तव्य कार्य 67 [ತವ್ಷತೆ के अवगुणों की खोज में नहीं है और आंतरिक प्रसन्नता रहती है। ফেনা जीवन में उतार- चढ़ाव आते हो रहते हैं। हँसते रहो, मुस्करांते रहो। ऐसा मुख किँस काम का जो हँसे नहीं मुस्कराए नर्हीं| जो व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति स्थिर रखना चाहते हैं , उनको दूसरों की आलोचनाओं से चिढ़ना नहीं चाहिए। हारिए न हिम्मत /६
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