-
1K views • 18 days ago
2122. 1212. 22/112
राज जुबाँ से निकल गया कैसे
हाथ अपनो पर चल गया कैसे
हो गया ज़िस्म रूह से जुदा
ज़िस्मसे दम निकल गया कैसे
जब्त था जो किया हुआ हमने
फिर वो आँसू मचल गया कैसे
ख्वाइशें भी सहम गई मेरी
घर ख़ुशी से ये जल गया कैसे
थे इरादे तो पक्के मेरे भी
देख उन्हें फिसल गया कैसे
रंज तो ये नहीं मिला धोखा
रंज है दिल दहल गया कैसे
गम माजूर -ऐ - मुहब्बत का है
आज वो फिर छल गया कैसे
(लक्षमण दावानी जबलपुर✍️)
गिरह बंद शेर
दोस्त था तो बदल गया कैसे
अक्से खुशबू में ढल गया कैसे #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
11 shares