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#सांचा ज्ञान कबीर का #तुम_सतगुरू_तुम_हंस.... 🌼🌼🌼 सच्चे भगवान का निर्णायक ज्ञान देने वाले पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद में अपने समय में एकमात्र तत्वदर्शी सन्त रहे सन्त गरीबदास जी महाराज ने अपने सतगुरू कबीर साहेब का परिचय देते हुए कहा हैं कि तुम साहेब तुम सन्त हो, तुम सतगुरू तुम हंस * गरीबदास तुम रूप बिना, और ना दूजा अंश ** और यही भेद हमारे पवित्र वेद (यजूर्वेद) भी दे रहे हैं। आइये जानते हैं पवित्र यजूर्वेद के इस श्लोक को.... "पवित्र यजुर्वेद,अध्याय 29 मंत्र 25" समिद्धोऽअद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान्यजसि जातवेदः। आ च वह मित्रमहश्चिकित्वान्त्वं दूतः कविरसि प्रचेताः।। समिद्धः-अद्य-मनुषः-दुरोणे-देवः-देवान्-यज्-असि- जात-वेदः-आ- च-वह-मित्रमहः-चिकित्वान्-त्वम्-दूतः- कविर्-असि-प्रचेताः। हमारे ‌सतगुरू देव जी इस श्लोक का वास्तविक अर्थ बताते हैं कि अद्य = आज जब मनुषः = मननशील मनुष्यों के द्वारा समिद्धः = अग्णि के समान जलाकर नष्ट कर देने वाले शास्त्र रहित मनमानी पूजा साधना में मानव समाज को दुरोणे = दुराग्रह पूर्वक आरूढ़ कर दिया जाता हैं तब ऐसे समय में उसके स्थान पर देवान् = देवताओं के देवः = देवता अर्थात् जातवेदः = पूर्ण परमात्मा सतपुरूष की वास्तविक (यज्) पूजा का विंधान असि = है। चिकित्वान् = अपने स्वस्थ ज्ञान (मूल ज्ञान,तत्वज्ञान) अर्थात् यथार्थ भक्ति मार्ग प्रचेताः = बोध (ज्ञान) कराने के लिए दूतः = आप स्वयं ही दूत / संदेशवाहक बनकर (सन्त) रूप में वह = लेकर आने वाले च = और मित्रमहः = सब जीवों का सच्चा मित्र और आ = दयालु परमेश्वर त्वम् = आप कबीर = कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर हैं । सारांश - यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान,मूल ज्ञान,तत्वज्ञान का उपदेश देने वाला सन्त कोई और नहीं अपितु सन्त वेष में स्वयं #पूर्ण_प्रभू_कबीर_परमेश्वर ही होते हैं। अब आप विचार करें कि ऐसे लीला क्या ब्रम्हा विष्णु महेश दुर्गा गणेश राम, कृष्ण, हनुमान इन्द्र कूबेर आदि ये देवी देवतागण करते हैं क्या,जिन्हें आप सच्चे भगवान मानकर जीवन समर्पित कर दिया हैं ? और अधिक जानकारी हेतु सपरिवार देखिए साधना टीवी चैनल सायं 07:30 pm. से ।
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