sn vyas
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#जय हनुमानजी #🙏🌺ॐ रामदूताय नमः🌺🙏 🙏 जय श्री राम🙏 🙏🌺 जय हनुमानजी 🌺🙏 जय बालाजी महाराज #जय हनुमानजी 🙏🙏 #🌺🎋जय हनुमानजी 🌲🌷 #🌼🙏जय वीर हनुमानजी 💐शुभ मंगलवार 🌼श्री हनुमान चालीसा 🌼
*🔱 " तौ हनुमंत कहाऊँ " – सूरदास जी का औजपूर्ण वीररसमय भक्तिपद 🔱*
`मूल पद –`
*हौं प्रभु जू कौ आयसु पाऊँ ।*
*अबहीं जाइ , उपारि लंक गढ़ , उदधि पार लै आऊँ ॥*
*अबहीं जंबूद्वीप इहाँ तैं , लै लंका पहुँचाऊँ ।*
*सोखि समुद्र उतारौं कपि-दल , छिनक बिलंब न लाऊँ ॥*
*अब आवैं रघुबीर जीति दल , तौ हनुमंत कहाऊँ ।*
*‘सूरदास’ सुभ पुरी अजोध्या, राघव सुबस बसाऊँ ॥*
[ `सूर-रामचरितावली` ]
*प्रसङ्ग –* `महाकवि सूरदास जी कृत ‘सूर-रामचरितावली’ से । यह वह क्षण है जब लंका विजय के लिए समुद्र लांघने की मंत्रणा चल रही है । सेवक हनुमान अपने स्वामी श्रीराम के चरणों में अपना सम्पूर्ण पराक्रम निवेदन कर रहे हैं । यह दास्य-भक्ति में वीरता की पराकाष्ठा है ।`
*शब्दार्थ –*
*आयस* `– आज्ञा /आदेश ,`
*उपारि* `– उखाड़ कर ,`
*उदधि* `– समुद्र ,`
*जंबूद्वीप* `– भारतवर्ष ,`
*सोखि* `– सुखा कर ,`
*कपि-दल* `– वानर सेना ,`
*छिनक* `– क्षण भर भी ,`
*सुबस* `– सुखपूर्वक एवं अच्छे से बसाना ।`
`भावार्थ 👉🏻 ( हनुमान जी कहते हैं ~ ) हे प्रभु ! यदि आपकी आज्ञा पा जाऊँ तो अभी इसी क्षण लंका के गढ़ को जड़ से उखाड़ कर समुद्र के इस पार ले आऊँ । अभी जंबूद्वीप को यहाँ से उठाकर लंका पहुँचा दूँ । समुद्र को सोख कर समस्त वानर-सेना को पार करा दूँ तथा क्षणभर भी विलंब न करूँ ।`
`जब रघुवीर अपनी सेना के साथ विजय प्राप्त करके आएँ , तभी मैं सच्चा ‘हनुमंत’ कहलाऊँगा , औऱ सूरदास कहते हैं – तभी श्रीराम को अयोध्या की शुभ पुरी में सुखपूर्वक बसा पाऊँगा ।`
`🪶 यह पद बताता है कि सच्चा सेवक कार्य को टालता नहीं , अपितु वह असंभव को भी संभव करने का संकल्प रखता है ।`
`जय बजरङ्गबली🚩`
`हर हर महादेव🌼`
`जय श्री राम🙏🏻`
`जय जय शङ्कर🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
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