sn vyas
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धन का सदुपयोग 🕉️उपयोग, उपभोग एवं नाश, शास्त्रों में धन की ये तीन गतियां बताई गई हैं। धन से जितना आप चाहो सुख के साधनों को अर्जित करो बाकी बचे धन को सृजन कार्यों में, सद्कार्यों में, अच्छे कार्यों में अवश्य लगाओ। अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो समझ लेना फिर आपका धन नाश को प्राप्त होने वाला है। 🕉️धन का दुरूपयोग अथवा अनुपयोग ही धन का नाश है। दुनिया आपको इसलिए याद नहीं करती कि आपके पास बड़ा धन है अपितु इसलिए याद करती है कि आपके पास बड़ा मन है और आप केवल धन का अर्जन ही नहीं करते आवश्यकता पड़ने पर विसर्जन भी करते हैं। 🕉️धन के साथ एक बड़ा विरोधाभास यह भी है, कि जब-जब आप धन को केवल संचित करने में लगे रहते हो तब-तब समाज में आपका मूल्य भी घटता जाता है। और जब-जब आपने इसे अच्छे कार्यों में लगाने का काम किया तब-तब समाज में आपका मूल्य स्वतः बढ़ने लगता है। अत: केवल धन का संचय समाज में व्यक्ति के मूल्य को घटा देता है तो धन का सदुपयोग उसके मूल्य को बढ़ा देता है। जय श्री कृष्ण #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏श्री कृष्ण वचन🌹 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🌸 जय श्री कृष्ण😇
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