sn vyas
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#🐍 नाग दोष उपचार✡️ #📖 नाग पंचमी पूजा विधि एवं कथा 🪔🐍 #🙏 नाग पंचमी की शुभकामनाएं 🐍✨ नागपंचमी विशेष स्त्रोत्र एवं अरिष्ट शांति के उपाय 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 ।।श्री सर्प सूक्तम।। ब्रह्मलोकेषु ये सर्पा शेषनाग परोगमा:। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।1।। इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासु‍कि प्रमुखाद्य:। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।2।। कद्रवेयश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।3।। इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखाद्य। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।4।। सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।5।। मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखाद्य। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।6।। पृथिव्यां चैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।7।। सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।8।। ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पप्रचरन्ति। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।9।। समुद्रतीरे ये सर्पाये सर्पा जंलवासिन:। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।10।। रसातलेषु ये सर्पा: अनन्तादि महाबला:। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।11।। (१)नाग गायत्री मंत्र :- 〰〰〰〰〰〰 ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात ll (२) सर्प-भय-नाशक मनसा-स्तोत्र— 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 महाभारत में जब राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने तक्षक से बदला लेने के लिए सर्पनाश का यज्ञ किया तो सब सांप मरने लगे , उस समय उन्हें आस्तिक नामक मुनि ने बचाया जो भगवान शिव की मानस पुत्री मनसा देवी के पुत्र थे। मनसा देवी के इस स्तोत्र का पाठ करने से सर्प दंश से रक्षा होती है और मनसा देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ध्यानः- 〰〰〰 चारु-चम्पक-वर्णाभां, सर्वांग-सु-मनोहराम् । नागेन्द्र-वाहिनीं देवीं, सर्व-विद्या-विशारदाम् ।। ।। मूल-स्तोत्र ।। 〰〰〰〰〰 ।। श्रीनारायण उवाच ।। नमः सिद्धि-स्वरुपायै, वरदायै नमो नमः । नमः कश्यप-कन्यायै, शंकरायै नमो नमः ।। बालानां रक्षण-कर्त्र्यै, नाग-देव्यै नमो नमः । नमः आस्तीक-मात्रे ते, जरत्-कार्व्यै नमो नमः ।। तपस्विन्यै च योगिन्यै, नाग-स्वस्रे नमो नमः । साध्व्यै तपस्या-रुपायै, शम्भु-शिष्ये च ते नमः ।। ।। फल-श्रुति ।। 〰〰〰〰〰 इति ते कथितं लक्ष्मि ! मनसाया स्तवं महत् । यः पठति नित्यमिदं, श्रावयेद् वापि भक्तितः ।। न तस्य सर्प-भीतिर्वै, विषोऽप्यमृतं भवति । वंशजानां नाग-भयं, नास्ति श्रवण-मात्रतः ।। (३) यह मनसा देवी का महान् स्तोत्र कहा है । जो नित्य भक्ति-पूर्वक इसे पढ़ता या सुनता है – उसे साँपों का भय नहीं होता और विष भी अमृत हो जाता है । उसके वंश में जन्म लेनेवालों को इसके श्रवण मात्र से साँपों का भय नहीं होता । जो पुरुष पूजा के समय इन बारह नामों का पाठ करता है, उसे तथा उसके वंशज को भी सर्प का भय नहीं हो सकता। इन बारह नामों से विश्व इनकी पूजा करता है। उसके सामने उग्र से उग्र सर्प भी शांत हो जाता है। जरत्कारुर्जगद्गौरी मनसा सिद्धयोगिनी । वैष्णवी नागभगिनी शैवी नागेश्वरी तथा ।। जरत्कारुप्रियाऽऽस्तीकमाता विषहरीति च । महाज्ञानयुता चैव सा देवी विश्वपूजिता ।। द्वादशैतानि नामानि पूजाकाले तु यः पठेत् । तस्य नागभयं नास्ति तस्य वंशोद्भवस्य च ।। (४)कालसर्प योग एवम राहु केतु शांति हेतु:- 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 चांदी और तांबे के 1-1 जोड़ी सर्प लेकर नाग देवता मन्दिर में अर्पण करें। दूध से अभिषेक एवं चन्दन का तिलक कर भोग अर्पण करें। नाग मन्दिर न हो तो शिव लिंग पर इन्हें चढ़ाकर ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र से यथासम्भव अधिकाधिक जप करते हुए अभिषेक करें। (५) नाग देवता कृपा प्राप्ति मंत्र :- इस मंत्र का जप करते हुए सांप की बाम्बी या किसी बड़े वृक्ष जिसके नीचे बिल या कोटर हो मिट्टी के पात्र में दूध चढ़ाएं। 'सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले। ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।। ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:। ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।' अर्थात् - संपूर्ण आकाश, पृथ्वी, स्वर्ग, सरोवर-तालाबों, नल-कूप, सूर्य किरणें आदि जहां-जहां भी नाग देवता विराजमान है। वे सभी हमारे दुखों को दूर करके हमें सुख-शांतिपूर्वक जीवन दें। उन सभी को हमारी ओर से बारंबार प्रणाम...। (६) धन धान्य प्राप्ति:- मान्यता है कि पृथ्वी के नीचे पाताल पुरी के सप्तलोकों में एक नाग लोक भी है जिसके राजा नागदेवता हैं। पाताल लोक सोने चांदी, बहुमूल्य रत्नों और विभिन्न प्रकार के दुर्लभ मणियों से भरा है। नाग देवता की नियमित पूजा करने पर वो प्रसन्न होकर वे अपने अमूल्य खजाने से व्यक्ति को धन और ऐश्वर्य से परिपूर्ण कर देते हैं। ।।नवनाग स्तोत्र ll 〰〰〰〰〰〰 अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलं शन्खपालं ध्रूतराष्ट्रं च तक्षकं कालियं तथा एतानि नव नामानि नागानाम च महात्मनं सायमकाले पठेन्नीत्यं प्रातक्काले विशेषतः तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत ll इति श्री नवनाग स्त्रोत्रं सम्पूर्णं ll (७) भय नाश एवं रक्षा हेतु:- श्री नाग स्तोत्र 〰〰〰〰 अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशम्पायन एव च । सुमन्तुजैमिनिश्चैव पञ्चैते वज्रवारका: ॥१॥ मुने: कल्याणमित्रस्य जैमिनेश्चापि कीर्तनात् । विद्युदग्निभयं नास्ति लिखितं गृहमण्डल ॥२॥ अनन्तो वासुकि: पद्मो महापद्ममश्च तक्षक: । कुलीर: कर्कट: शङ्खश्चाष्टौ नागा: प्रकीर्तिता: ॥३॥ यत्राहिशायी भगवान् यत्रास्ते हरिरीश्वर: । भङ्गो भवति वज्रस्य तत्र शूलस्य का कथा ॥४॥ ॥ इति श्रीनागस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥ (८) कन्या के विवाह हेतु:- जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो वे नाग देवता के मंदिर में ऐसी प्रतिमा जिसमें नाग नागिन का जोड़ा हो या दो नाग सम्मुख आलिंगन बद्ध यानी लिपटे हुए हों, उनका देवी एवं देवता का अलग अलग श्रृंगार चढ़कर कर विधि विधान से पूजन करवाएं। (९) विशेष भोग:- नाग देवता की प्रसन्नता के लिए इस दिन खीर बनाकर पूजन कर भोग लगाकर किसी पेड़ की नीचे खीर रख दें। ( विशेष बात: ये खीर सिर्फ नाग देवता के लिये होती है इसे भूलकर भी स्वयम न खायें न ही बच्चों या किसी अन्य व्यक्ति को दें, इसलिए थोड़ी ही बनाएं और भगवान को अर्पित कर दें) साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰
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