sn vyas
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#🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🕉️सनातन धर्म🚩
..........शरीर केवल साधन मात्र है, शरीर से साधना की जा सकती है, शरीर के माध्यम से संसार के समस्त वैभवों को एवं परमात्मा के एहसास (अखण्ड आनन्द) को प्राप्त किया जा सकता है परन्तु शरीर में रहने वाली चेतना के बिना यह शरीर कुछ भी करने में समर्थ नहीं है। जो कुछ भी हमारे पास है जब हम उसे अपना मानते है तो हम अहंकार के शिकार हो जाते हैं जबकि अपना वह होता है जो हमेशा प्रत्येक परिस्थिति में हमारे साथ रहें। संसार का वैभव अपना नहीं हो सकता क्योंकि यह वैभव हमारे पास स्थाई नहीं रहता है। वैभव का अहंकार, ज्ञान का अहंकार, रिद्धी-सिद्धी की प्राप्ति का अहंकार, मान-सम्मान का अहंकार एवं प्रसिद्धि का अहंकार अर्थात सभी प्रकार का अहंकार ही हमारे पतन का कारण होता है। हमें इन्द्रियों,शरीर एवं संसार को नहीं बल्कि चेतना को जानना है जो चीटीं एवं हाथी जैसे शरीरों में समान है। हमें संसार में विरक्त होकर रहना है यहाँ अपना कोई नहीं है परन्तु चेतना(आत्मा, परमात्मा के अंश) के कारण पराया भी कोई नहीं है, हमें राग-द्वेष,शत्रु-मित्र से ऊपर उठना है। शरीर में चेतना के कारण ही संसार अपना सा भासता है वास्तव में हम अकेले ही है, हम आये भी अकेले, जायेगें भी अकेले,यह संसार तो केवल दर्शन मेला है, यह सब व्यक्तिगत रुप से अनुभव का विषय है।
जय श्री लक्ष्मी नारायण 🌹🙏🏻
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