sn vyas
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#मां #मां दुर्गा
`#शरणागति – माँ ललिता का दिव्य प्रमाण🌹`
_*श्रीब्रह्माण्डमहापुराण , उत्तरभाग , ललितोपाख्यान , अध्याय – ४१.७१-७७*
_अगस्त्य मुनि ने पूछा –_
*शरणागतशब्दस्य कोऽर्थो वद हयानन ।*
*वत्सं गौरिव यं गौरी धावन्तमनुधावति ॥७१॥*
`हयग्रीव भगवान ने कहा –`
*यः पुमानखिलं भारमैहिकामुष्मिकात्मकम् ।*
*श्रीदेवतायां निक्षिप्य सदा तद्गतमानसः ॥७२॥*
*सर्वानुकूलः सर्वत्र प्रतिकूलविवर्जितः ।*
*अनन्यशरणो गौरीं दृढं सम्प्रार्थ्य रक्षणे ॥७३॥*
*रक्षिष्यतीति विश्वासस्तत्सेवैकप्रयोजनः ।*
*वरिवस्यातत्परः स्यात्सा एव शरणागतिः ॥७४॥*
`भावार्थ 👉🏻 जो मनुष्य अपने ऐहिक-आमुष्मिक समस्त भार को श्रीलिता देवी पर छोड़कर , सर्वथा उनके अनुकूल रहकर , अनन्य शरण होकर "माँ अवश्य रक्षा करेंगी" – इस विश्वास के साथ उनकी सेवा में तत्पर रहता है – वही शरणागत है ।`
*यदा कदाचित्स्तुतिनिंदनादौ निंदन्तु लोकाः स्तुवतां जनो वा ।*
*इति स्वरूपं सुधिया समीक्ष्य विषादखेदौ न भजेत्प्रपन्नः ॥७५॥*
`भावार्थ 👉🏻 शरणागत स्तुति-निंदा में सम रहता है । वह जानता है लोग क्या कहें , मुझे केवल माँ से प्रयोजन है ।`
*अनुकूलस्य संकल्पः प्रतिकूलस्य वर्जनम् ।*
*रक्षिष्यतीति विश्वासो गोप्तृत्ववरणं तथा ॥७६॥*
*आत्मनिक्षेपकार्पण्ये षड्विधा शरणागतिः ।*
`भावार्थ 👉🏻 शरणागति के ६ अंग हैं – १. अनुकूल संकल्प , २. प्रतिकूल का त्याग , ३. रक्षा का विश्वास , ४. गोप्तृत्व वरण , ५. आत्मनिक्षेप , तथा ६ .कार्पण्य ।`
*अङ्गीकृत्यात्मनिक्षेपं पञ्चांगानि समर्पयेत् ।*
*न ह्यस्य सदृशं किंचिद्धक्तिमुक्त्योस्तु साधनम् ॥७७॥*
`भावार्थ 👉🏻 अपनी ५ इन्द्रियों सहित स्वयं को माँ को समर्पित कर देना । भक्ति औऱ मुक्ति का इससे बड़ा कोई साधन नहीं ।`
`🎯 सार –`
`वत्स/बछड़े के पीछे दौड़ती गौ के समान श्रीलिता माँ अपने शरणागत के पीछे दौड़ती हैं ।`
`😊 अब सरल रूप से समझें शरणागत कौन है?`
*जो अपने* `सांसारिक एवं परलोक के सारे भार` *माँ ललिता को सौंप दे ।*
*तदोपरान्त हर पल मन माँ में लगाकर , "माँ रक्षा करेंगी" इस* `अटल विश्वास` *के साथ उनकी सेवा में लग जाए ।*
`☝🏻 शरणागति के ६ अंग सरलता से जानें –`
`१. अनुकूलस्य संकल्प: 👉🏻 जो माँ को प्रिय हो वही करने का संकल्प ।`
`२. प्रतिकूलस्य वर्जनम् 👉🏻 जो माँ को अप्रिय हो उसका त्याग करना ।`
`३. रक्षिष्यतीति विश्वासः 👉🏻 "माँ अवश्य रक्षा करेंगी" – ये दृढ़ विश्वास होना ।`
`४. गोप्तृत्ववरणम् 👉🏻 माँ को ही अपना सर्वस्व मानना ।`
`५. आत्मनिक्षेपः 👉🏻 स्वयं को सम्पूर्णतः माँ के आधीन कर देना ।`
`६. कार्पण्यम् 👉🏻 "माँ मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता" – ये विनम्र भाव रखना ।`
*🪷 शरणागत की २ विशेष लक्षण –*
`१. स्तुति-निंदा में सम 👉🏻 सँसार चाहे स्तुति करे अथवा निंदा , उसे कोई अंतर नहीं पड़ता । उसे तो केवल माँ से प्रयोजन है ।`
`२. सम्पूर्ण समर्पण 👉🏻 अपनी ५ इंद्रियों सहित स्वयं को माँ को अर्पण कर देना ।`
*वत्सं गौरिव* `– जैसे गाय अपने बछड़े के पीछे भागती है , वैसे ही माँ ललिता अपने शरणागत के पीछे दौड़ती हैं ।`
`भेद त्यागो , अभेद अपनाओ ।`
`शिव व शक्ति एक ही हैं ।`
`ललिताम्बिकायै नमः🌺`
`श्रीविद्यायै नमः🌸`
`त्रिपुरसुन्दर्यै नमः🌹`
`श्रीमात्रे नमः🚩`
`श्रीकाल्यै नमः🚩`
`श्रीतारायै नमः🚩`
`श्रीत्रिपुरायै नमः🚩`
`श्रीभुवनेश्वर्यै नमः🚩`
`श्रीअम्बिकायै नमः🚩`
`श्रीदुर्गापरमेश्वर्यै नमः🚩`
`नमश्चण्डिकायै🚩`
`श्रीदक्षिणामूर्तये नमः🚩`
`शिव शिव शिव शिव शिव🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
`जय जय शङ्कर🚩`
`🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄`
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