सुशील मेहता
श्रावन पुत्रदा एकादशी
श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत हिंदू पंचांग के दामोदर द्वादशी
भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार दामोदर द्वादशी व्रत भगवान विष्णु के भक्तों द्वारा आस्था पूर्वक बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। श्रावण महीने के महीने में शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर दमोदरा द्वादशी मनाई जाती है। दामोदरा भगवान विष्णु के कई नामों में से एक है। श्रावण माह आकाश में सितारों के श्रवण नक्षत्र की उपस्थिति से चिह्नित है। यह महीना मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। इस शुभ महीने के दौरान भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों को बहुत से लाभ मिल सकते हैं, जिन्हें भगवान शिव द्वारा आशीर्वादित किया जाता है। श्रावण माह मानसून के मौसम से भी जुड़ा हुआ है जो फसलों की कटाई और सूखे की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है। श्रवण महीनों को विशेष रूप से देवताओं के लिए माना जाता है। दमोदरा दवादाशी के पिछले दिन पवित्रा एकादशी व्रत या पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है जो भगवान विष्णु को भी समर्पित है। पुत्रदा एकादशी या पवित्र एकादशी का निरीक्षण करने वाले भक्त अक्सर भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद द्वादशी के दिन भगवान शिव को भोग लगा के फिर प्रसाद प्राप्त कर अपने उपवास को तोड़ते हैं और अपनी मनोकामना को पूर्ण प्रार्थना करते हैं। एक यादव कन्या थीं, जो एकादशी व्रत करती और द्वादशी को पारण करतीं. बेहद गरीब होने के चलते वह दही बेचकर जीवन यापन करती थी. एक बार उसने एकदाशी का व्रत किया और द्वादशी को पारण करना था. उसने सोचा कि आज दही थोड़ा है जल्द बिक जाएगा. उसे बेचने के बाद वह पारण कर लेगी. उस दिन कृष्ण और राधा रास कर रहे थे. उस दौरान राधा ने गूलर के वृक्ष जोर से हिलाया. गूलर का दिव्य पुष्प कन्या की मटकी में जा गिरा. जिसके प्रभाव से मटकी का दही बढऩे लगा जोकि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था. यह क्रम पूरे दिन चलता रहा है और अनजाने में कन्या ने द्वादशी का व्रत भी कर लिया, जिससे हरि प्रसन्न हुए और उस कन्या को बैकुंठ की प्राप्ति हुई। सावन मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. एकादशी तिथि का स्वामी विश्वेदेवा को माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा भी अवश्य करनी चाहिए. मुख्य रूप से यह व्रत विवाहित स्त्री-पुरुष द्वारा संतान प्राप्ति की इच्छा से भी किया जाता है. जो लोग सभी एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें इस व्रत का भी पालन करना चाहिए। श्रावण पवित्रा (पुत्रदा) एकादशी, जैसा कि नाम से ही विदित है श्रावण महीने में मनाई जाती है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा एवं उपासना की जाती है. सावन के महीने में आने के कारण ही यह एकादशी श्रावण एकादशी कहलाती है. पवित्रा (पुत्रदा) एकादशी होने से यह संतान देने वाली एकादशी भी मानी जाती है. इस प्रकार श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी जहां एक ओर पूरे विधि-विधान से पूजा करने के कारण और व्रत रखने के कारण आपकी सभी मनोवांछित इच्छाएं पूरी करती है, तो वहीं जो लोग संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें उत्तम संतान भी प्रदान करती है. इस व्रत के द्वारा भगवान विष्णु की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है और व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी बन जाता है। । भगवान विष्णु को प्रिय पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है. एक बार श्रावण मास में और दूसरी बार पौष मास में. उत्तर भारत में पौष मास की पुत्रदा एकादशी अधिक मनाई जाती है तो अन्य क्षेत्रों में श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी का अत्यंत महत्व है. इस श्रावण पुत्रदा एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है और कुछ लोग इसे पवित्रोपना एकादशी भी कहते हैं। #शुभ कामनाएँ 🙏