Jagdish Sharma
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।। ॐ ।।
ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि सन्न्यस्य मत्पराः।
अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते॥१२/६॥
जो मेरे परायण होकर सम्पूर्ण कर्मों अर्थात् आराधना को मुझमें अर्पण करके अनन्य भाव से योग अर्थात् आराधना-प्रक्रिया के द्वारा निरन्तर चिन्तन करते हुए भजते हैं-- "यथार्थगीता" #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #❤️जीवन की सीख #यथार्थ गीता
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