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#ॐ गं गणपतये नमः #ॐ गं गंपतेये नमः
`ॐ गं गणपतये नमः`
`जय श्री गणेश🙏🏻🐘`
*॥ अथ श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रम् ॥*
`स्रोत – श्रीगणेशपुराण , उपासना खण्ड , अध्याय ९२.३५–४७`
*मुनिरुवाच ।*
*अनुक्रमेण कथय नामानि द्वादशैव मे ।*
*श्रवणात् पठनादेषां सर्वं निर्विघ्नतामियात् ॥३५॥*
*ब्रह्मोवाच ।*
*सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः ।*
*लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः ॥ ३६॥*
*धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः ।*
*द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ॥ ३७॥*
*विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।*
*सङ्ग्रामे सङ्कटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ॥ ३८॥*
*शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।*
*प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ ३९॥*
*कोटिकन्याप्रदानानि कोटियज्ञं व्रतानि च ।*
*तपांसि यानि सर्वाणि तीर्थान्यायतनानि च ॥ ४०॥*
*स्वर्णभारसहस्राणि कोटिदानि यान्यपि ।*
*कृच्छ्राणि तप्तकृच्छ्राणि पराकेन्दुव्रतानि च ॥ ४१॥*
*शतांशमेषां पुण्यस्य तानि नाम्नां न यान्ति च ।*
*इमानि प्रातरुत्थाय शुचिर्भूत्वा समाहितः ॥ ४२॥*
*यः पठेन्मानवो भक्त्या विघ्ना नो यान्ति तं नरम् ।*
*सिद्ध्यन्ति सर्वकार्याणि मोक्षमन्ते व्रजत्यसौ ॥ ४३॥*
*तस्य दर्शनतो लोका देवाः पूता भवन्ति च ।*
*अत एव मुने ! सर्वाः शाक्ताः शैवाश्च वैष्णवाः ॥ ४४॥*
*उक्त्वा द्वादश नामानि सर्वकार्याणि कुर्वते ।*
*गाणेशा अपि कुर्वन्ति किमत्रापि च कौतुकम् ॥ ४५॥*
*न सिद्ध्यन्ति हि कार्याणि द्वादशान्यतमस्य ह ।*
*उच्चारणं विना ब्रह्मँस्तस्मादेकं समुच्चरेत् ॥ ४६॥*
*दुष्टानां नास्तिकानां चकार्यं यद् यद्धि सिद्ध्यति ।*
*तेऽपि बीजं समुच्चार्यमज्ञानादपि कुर्वते ॥ ४७॥*
*॥ इति श्रीगणेशद्वादशनामास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥*
*#प्रसङ्ग –*
`एक बार मुनियों ने ब्रह्माजी से पूछा कि ऐसा कौन सा उपाय है जिससे जीवन के सभी कार्य बिना विघ्न के संपन्न हों । तब ब्रह्माजी ने श्रीगणेश के १२ दिव्य नामों का उपदेश दिया । कहा कि इन नामों के श्रवण एवं पाठ मात्र से मनुष्य के समस्त विघ्न नष्ट हो जाते हैं । प्रथम पूज्य गणेशजी को कोई भी कार्य आरम्भ करने से पूर्व समस्त सम्प्रदाय – ☆स्मार्त , ☆शैव , ☆वैष्णव , ☆शाक्त , ☆सौर , तथा ☆गाणपत्य – स्मरण करते हैं ।`
*#श्लोकार्थ –*
`हे मुनियों ! गणेश जी के १२ नाम हैं – सुमुख , एकदन्त , कपिल , गजकर्णक , लम्बोदर , विकट , विघ्ननाश , गणाधिप , धूम्रकेतु , गणाध्यक्ष , भालचन्द्र , औऱ गजानन ।`
*जो मनुष्य*`विद्या आरम्भ , विवाह , गृह प्रवेश , यात्रा , युद्ध एवं संकट` *के समय इन नामों का पाठ करता है उसके जीवन में कोई विघ्न नहीं आता है ।*
`करोड़ कन्यादान , करोड़ यज्ञ , हजारों स्वर्णदान तथा सभी तीर्थों` *का पुण्य भी इन नामों के* `सौवें भाग` *के समान/बराबर नहीं है ।*
*जो प्रातःकाल शुद्ध होकर भक्ति से इनका पाठ करता है उसके समस्त कार्य सिद्ध होते हैं औऱ अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है । बिना इनमें से एक नाम लिए भी कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है ।*
*#भावार्थ –*
`१. सुमुख` *– सुंदर मुख वाले , जो जीवन में माधुर्य दें ।*
`२. एकदन्त` *– एकाग्रता के प्रतीक , लक्ष्य भेदन ।*
`३. कपिल` *– तेजस्वी , ज्ञान के वर्ण वाले ।*
`४. गजकर्णक` *– बड़े कान , सबकी सुनने वाले ।*
`५. लम्बोदर` *– सम्पूर्ण ब्रह्मांड को उदर/पेट में धारण करने वाले ।*
`६. विकट` *– विकट परिस्थिति को भी सरल बनाने वाले ।*
`७. विघ्ननाश` *– नाम ही बताता है , सभी बाधा हरने वाले ।*
`८. गणाधिप` *– गणों के नायक, नेतृत्व के देव ।*
`९. धूम्रकेतु` *– नकारात्मकता को धुएं के समान उड़ा देने वाले ।*
`१०. गणाध्यक्ष` *– सभी गणों के स्वामी ।*
`११. भालचन्द्र` *– मस्तक पर शीतलता का प्रतीक चंद्रमा ।*
`१२. गजानन` *– बुद्धि एवं बल के संगम ।*
*प्रातःकाल नित्यकर्म उपरांत* `शुक्लाम्बरधरं शशिवर्णं` *का ध्यान करके इन १२ नामों का जप करें । दिनभर* `विघ्नरहित` *तथा* `सिद्धिदायक` *रहेगा ।*
*वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।*
*निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥*
`आप समस्त का आज का दिवस मङ्गलमय हो , गणपति महाराज सभी के कार्य निर्विघ्न पूर्ण करें💐🚩`
`ॐ गं गणपतये नमः`
`ॐ वक्रतुण्डाय नमः`
`गणाधिपतये नमः`
`हर हर महादेव🔱`
`जय जय शङ्कर🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
`~ सर्वज्ञ शङ्कर🚩`
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