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#सनातन विज्ञान (विश्व जागरण से वसुधैव कुटुंबकम) #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
वैंज्ञानिक चिकित्स्क उद्योगपति नेता और शिक्षक एक साथं मिलकर अपनी क्षमता के दुरूपयोग से कैसे एक ' पूरी संभ्यता को पथनभ्रष्ट कऱ के विलुप्ति के कगार पर ला खडा कर सकते हैं ? यदि यह सप्रमाण जानना हो तो सनातन की धरती पर सनातन कीं दुर्दशा का इतिहास पढ़िए
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) #सनातन विज्ञान (विश्व जागरण से वसुधैव कुटुंबकम)
    इस्लामिक नाटो ' विश्व से पहले भारत के लिए केद्वारा ख़तरा ! निश्चय ही यह इस संघ पाकिस्तानी आतंकवाद को खुला समर्थन है ! भविष्य मे यह संगठन विश्व को एक ಊತಷ की ओरले जाएगा ! जो कि महाभारत से भी बड़ा और महाविनाशक होगा ! यूएन को ऐसे विघटनकारी वैश्विक संगठनो पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और भारत की वसुधैव कुटुंबकम् की नीति को आगे बढाना चाहिए ! क्योंकि संसार को शांति चाहिए षडयंत्र नहीं !
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
    आप आज परेशान इसलिए हैं कि आपसे कभी न कभी किसी न किसी रूप मे धर्म अपमानित हुआ है ! धर्म कर्मफल के सिद्धांत का प्रतिपादन करता है ! धर्म ्कर्म का सीधा संबंध है ! इसमे कोई दूसरा गणित नही है ! धर्म खराब होने से संस्कार तो खराब होते ही है संस्कारों की चुम्बकीय शक्ति के अदृश्य प्रभावों से उसके दायरे मे रहने वाले लोगों का व्यक्तित्व भी प्रभावित होता है यहां तक कि शिशु का भी जो उस क्षण उस তন্স লনা ট ! आप आज परेशान इसलिए हैं कि आपसे कभी न कभी किसी न किसी रूप मे धर्म अपमानित हुआ है ! धर्म कर्मफल के सिद्धांत का प्रतिपादन करता है ! धर्म ्कर्म का सीधा संबंध है ! इसमे कोई दूसरा गणित नही है ! धर्म खराब होने से संस्कार तो खराब होते ही है संस्कारों की चुम्बकीय शक्ति के अदृश्य प्रभावों से उसके दायरे मे रहने वाले लोगों का व्यक्तित्व भी प्रभावित होता है यहां तक कि शिशु का भी जो उस क्षण उस তন্স লনা ট !
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
    धर्म ग्रंथों मे यदि काली लक्ष्मी और सरस्वती को पूजनीय स्थान दिया गयां है ! सीता , सावित्रि और अहिल्या को महान बतायां गया है ! तो.सूर्पणखा, ताड़िका और पूतना को दंडित करके यह भी बताया गया है कि न्याय व्यवस्था मे कोई लिंगभेद नहीं है ! अर्थात "न्याय ही नैतिकता है !" धर्म ग्रंथों मे यदि काली लक्ष्मी और सरस्वती को पूजनीय स्थान दिया गयां है ! सीता , सावित्रि और अहिल्या को महान बतायां गया है ! तो.सूर्पणखा, ताड़िका और पूतना को दंडित करके यह भी बताया गया है कि न्याय व्यवस्था मे कोई लिंगभेद नहीं है ! अर्थात "न्याय ही नैतिकता है !"
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
    हर चीज किसी न किसी दूसरी चीज के भीतर स्थित है ! चीज की उपस्थिति भी किसी तीसरी 3k 34 दूसरी चीज में है ! इसी प्रकार से संपूर्ण ब्रह्मांडों को अपने भीतर समेटे यह अंतरिक्ष जिसमे स्थित है वही परब्रह्म है इसका अनुभव सिर्फ निरंतर दीर्घकालिक अध्यात्मिक चिंतन से ही संभव है ! विज्ञान ने यह कहकर कि यह ब्रह्मांड प्रकाश की गति से भी अधिक तेजी से फैल रहा है,पहले आधुनिक विज्ञान ही अपने हाथ खड़े कर दिए हैं ! यह की स्वीकारोक्ति है कि हम कभी ब्रह्मांड की सीमा नहीं नाप सकते ! यदि पहले कभी किसी प्राचीन विज्ञान ने इस ब्रह्मांड को मापने का प्रयास न किया गया होता तो अनंत शब्द कहां से आता ? और ईश्वर के संदर्भ मे अनंत और अविनाशी की उपमा भी न होती ! हर चीज किसी न किसी दूसरी चीज के भीतर स्थित है ! चीज की उपस्थिति भी किसी तीसरी 3k 34 दूसरी चीज में है ! इसी प्रकार से संपूर्ण ब्रह्मांडों को अपने भीतर समेटे यह अंतरिक्ष जिसमे स्थित है वही परब्रह्म है इसका अनुभव सिर्फ निरंतर दीर्घकालिक अध्यात्मिक चिंतन से ही संभव है ! विज्ञान ने यह कहकर कि यह ब्रह्मांड प्रकाश की गति से भी अधिक तेजी से फैल रहा है,पहले आधुनिक विज्ञान ही अपने हाथ खड़े कर दिए हैं ! यह की स्वीकारोक्ति है कि हम कभी ब्रह्मांड की सीमा नहीं नाप सकते ! यदि पहले कभी किसी प्राचीन विज्ञान ने इस ब्रह्मांड को मापने का प्रयास न किया गया होता तो अनंत शब्द कहां से आता ? और ईश्वर के संदर्भ मे अनंत और अविनाशी की उपमा भी न होती !
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
    जीवन है तो समस्याएं आएंगी ही आएंगी ! उनको आने से नहीं रोका जा सकता ! इसलिए समस्याओं पर नहीं बल्कि समाधान पर फोकस कीजिए ! वह हम नकारात्मक होकर कभी भो सकारात्मक रहकर कभार सफल हो सकते हैं लेकिन सकारात्मकता हमेशा 424 जीवन है तो समस्याएं आएंगी ही आएंगी ! उनको आने से नहीं रोका जा सकता ! इसलिए समस्याओं पर नहीं बल्कि समाधान पर फोकस कीजिए ! वह हम नकारात्मक होकर कभी भो सकारात्मक रहकर कभार सफल हो सकते हैं लेकिन सकारात्मकता हमेशा 424
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
    ज्ञान किताब मे नहीं होता ! किताबों में तो सिर्फ लिए शब्द और शब्द और वाक्य होते हैं ! सभी के वाक्य हमेशा वही होते हैं लेकिन उनके प्रयोग की विद्या जब देवता सीखते हैं तो सृजन करते हैं और जब दानव सीखते हैं तो सर्वनाश करते हैं ज्ञान किताब मे नहीं होता ! किताबों में तो सिर्फ लिए शब्द और शब्द और वाक्य होते हैं ! सभी के वाक्य हमेशा वही होते हैं लेकिन उनके प्रयोग की विद्या जब देवता सीखते हैं तो सृजन करते हैं और जब दानव सीखते हैं तो सर्वनाश करते हैं
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
    बच्चे आहत होते हैं जब वो अपनी धार्मिक मान्यताओं और विश्वासों के विरूद्ध उठे प्रश्नों के उत्तर नहीं दे या जब कुछ लोगो के सामने उनका उपहास பd बनता है ! कारण यह नहीं है कि वे प्रश्न अनुचित होते हैं या फिर उनके उत्तर नहीं हैं ! बल्कि कारण यह है कि अब आपके घरों मे रामायण , आदिशक्ति , महादेव और महाभारत जैसे सीरीज नहीं देखे जाते और ना ही आप अपने बच्चों से अपने धार्मिक पात्रों के द्वारा प्रस्तुत ज्ञान पर चर्चा करते हैं ! बच्चे आहत होते हैं जब वो अपनी धार्मिक मान्यताओं और विश्वासों के विरूद्ध उठे प्रश्नों के उत्तर नहीं दे या जब कुछ लोगो के सामने उनका उपहास பd बनता है ! कारण यह नहीं है कि वे प्रश्न अनुचित होते हैं या फिर उनके उत्तर नहीं हैं ! बल्कि कारण यह है कि अब आपके घरों मे रामायण , आदिशक्ति , महादेव और महाभारत जैसे सीरीज नहीं देखे जाते और ना ही आप अपने बच्चों से अपने धार्मिक पात्रों के द्वारा प्रस्तुत ज्ञान पर चर्चा करते हैं !
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
     संस्कृति, अलग-्अलग प्रकार की भाषा, अलग ्अलग प्रकार अलग ्अलग प्रकार का पहनावा, अलगन्अलग प्रकार के व्यंजन, अलग ्अलग प्रकार की ऋतुएं अलग-्अलग प्रकार की फसलें ,  चुनौतियों अलग प्रकार के त्यौहार ! की अलगन्अलग  प्रकृति का सामना करने के लिए निर्धारित किए गए ये सारे अलगाव हमारे पूर्वजों की बुद्धिमत्ता को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करते हैं ! उन्होंने के साथ मिलकर, उसके हर रंग मे रंग कर हंसना, गाना, प्रकृति झूमकर नाचना और खुशियां मनाना सीखा को धन्यवाद प्रकृति कहने के लिए उसके हर उपकार का ऋणी होने की स्वीकार्यता को प्रकट करने के लिए अलग ्अलग रूप , आकार और नाम देकर पूजन उत्सव की ऐसी परंपरा बनाई जो कि मनुष्य को अध्यात्मिक ज्ञान देने के साथन्साथ के विज्ञान को भी स्पष्ट प्रकृति करते हैं ! वह भी इतने सरल तरीके से कि शिक्षित और अशिक्षित दोनो ही प्रकृति और जीव दोनो की अभिन्नता को हर क्षण महसूस कर सकें ! लेकिन बदले मे हमने संसार के सामने असभ्य राष्ट्रों के द्वारा उनको अपमानित करवाया भी और किया भी ! सर्वश्रेष्ठ परित्याग कर, आडंबर को अपनाकर और उनकी सीखों का का उपहास करके !  संस्कृति, अलग-्अलग प्रकार की भाषा, अलग ्अलग प्रकार अलग ्अलग प्रकार का पहनावा, अलगन्अलग प्रकार के व्यंजन, अलग ्अलग प्रकार की ऋतुएं अलग-्अलग प्रकार की फसलें ,  चुनौतियों अलग प्रकार के त्यौहार ! की अलगन्अलग  प्रकृति का सामना करने के लिए निर्धारित किए गए ये सारे अलगाव हमारे पूर्वजों की बुद्धिमत्ता को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करते हैं ! उन्होंने के साथ मिलकर, उसके हर रंग मे रंग कर हंसना, गाना, प्रकृति झूमकर नाचना और खुशियां मनाना सीखा को धन्यवाद प्रकृति कहने के लिए उसके हर उपकार का ऋणी होने की स्वीकार्यता को प्रकट करने के लिए अलग ्अलग रूप , आकार और नाम देकर पूजन उत्सव की ऐसी परंपरा बनाई जो कि मनुष्य को अध्यात्मिक ज्ञान देने के साथन्साथ के विज्ञान को भी स्पष्ट प्रकृति करते हैं ! वह भी इतने सरल तरीके से कि शिक्षित और अशिक्षित दोनो ही प्रकृति और जीव दोनो की अभिन्नता को हर क्षण महसूस कर सकें ! लेकिन बदले मे हमने संसार के सामने असभ्य राष्ट्रों के द्वारा उनको अपमानित करवाया भी और किया भी ! सर्वश्रेष्ठ परित्याग कर, आडंबर को अपनाकर और उनकी सीखों का का उपहास करके !
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    #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
    फसल कैसी होगी ? यह बीज की गुणवत्ता भूमि व मौसम की अनुकूलता, किसान की जागरूकता और उसके परिश्रम पर निर्भर है ! किसी भी एक चीज मे कमी रह गई तो उसका प्रभाव अवश्य दिखेगा 34 प्रकार से वर्तमान मे माता-पिता का परिश्रम, उनकी जागरूकता तथा गुरू एवं उनके द्वारा चयनित किताबों व मित्र संगति रूपी अनुकूलता ही यह तय करती है कि भविष्य मे मानव सभ्यता कैसी होगी ? बहुत सारे युवाओं को हिंसा, अपराध और সাত ক नशे मे लिप्त देखकर क्या आपको ये नहीं लगता कि वर्तमान समाज के लोग कोई भारी चूक कर रहे है ? फसल कैसी होगी ? यह बीज की गुणवत्ता भूमि व मौसम की अनुकूलता, किसान की जागरूकता और उसके परिश्रम पर निर्भर है ! किसी भी एक चीज मे कमी रह गई तो उसका प्रभाव अवश्य दिखेगा 34 प्रकार से वर्तमान मे माता-पिता का परिश्रम, उनकी जागरूकता तथा गुरू एवं उनके द्वारा चयनित किताबों व मित्र संगति रूपी अनुकूलता ही यह तय करती है कि भविष्य मे मानव सभ्यता कैसी होगी ? बहुत सारे युवाओं को हिंसा, अपराध और সাত ক नशे मे लिप्त देखकर क्या आपको ये नहीं लगता कि वर्तमान समाज के लोग कोई भारी चूक कर रहे है ?
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