sn vyas
520 views • 9 hours ago
#राधे-राधे
श्री वृन्दावन मध्य बिराजत उच्च सिंहासन।
शीष चंद्रिका भाल तिलक केशर छवि आनन।।
बिंबा फल सम ओष्ठ मंद मुस्कान मनोहर।
राजत उर बनमाल युगल बरचरण महावर।।
गोबरधन पद परसनी,जन मन की हृदयेश्वरी।
मम अंतर हृद में प्रविश,देवें सुख सब कृपा करी।।
॥राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे॥
.
2 shares