Jagdish Sharma
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।। ॐ ।।
अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः।
सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान्॥१२/११॥
यदि इसे भी करने में असमर्थ है तो सम्पूर्ण कर्मों के फल का त्याग कर अर्थात् लाभ-हानि की चिन्ता छोड़कर 'मद्योग' के आश्रित होकर अर्थात् समर्पण के साथ आत्मवान् महापुरुष की शरण में जा। उनसे प्रेरित होकर कर्म स्वतः होने लगेगा।
समर्पण के साथ कर्मफल के त्याग का महत्त्व बताते हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं-"यथार्थगीता" #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #यथार्थ गीता
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