सुशील मेहता
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रक्षा पंचमी
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की पंचमी को रक्षा पंचमी के नाम से जाना जाता है. रक्षा पंचमी का यह पर्व रक्षाबंधन के पांचवे दिन और कृष्ण जन्माष्टमी से तीन दिन पूर्व मनाया जाता है. इस तिथि के बारे में मान्यता है कि जो बहनें किसी कारणवश श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन अपने भाई को राखी नहीं बांध पाई होती हैं, वह रक्षा पंचमी पर भाई की कलाई में राखी बांधकर उसकी रक्षा की कामना कर सकती हैं. रक्षा पंचमी भगवान शिव के अवतार 'बटुक भैरव' को समर्पित एक महत्वपूर्ण त्यौहार है और इसे उड़ीसा राज्य में पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। इसे 'रेखा पंचमी' या 'रख्य पंजामी' के नाम से भी जाना जाता है।
रक्षा पंचमी उड़िया कैलेंडर के 'भाद्रपद' महीने में 'कृष्ण पक्ष' (चंद्रमा का क्षीण चरण) की 'पंचमी' (पांचवें दिन) तिथि को मनाई जाती है। पारंपरिक हिंदू कैलेंडर में इसे 'श्रावण' महीने के 'कृष्ण पक्ष पंचमी' पर मनाया जाता है। इस तिथि के बारे में मान्यता है कि जो बहनें किसी कारणवश श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन अपने भाई को राखी नहीं बांध पाई होती हैं, वह रक्षा पंचमी पर भाई की कलाई में राखी बांधकर उसकी रक्षा की कामना कर सकती हैं. इस दिन की विशेष बात यह है कि इस तिथि को भगवान शिव एवं उनके पुत्र गणेश जी की पूजा की जाती है. इस वर्ष रक्षा रक्षा पंचमी का पर्व मूलतः उड़ीसा में मनाया जाता है. इस पर्व को रेखा पंचमी, शांति पंचमी भी कहते हैं. यह पर्व बटुक भैरव को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है. हिंदू शास्त्रों के अनुसार रक्षा पंचमी पर वक्रतुण्ड स्वरूप हरिद्रा गणेश पर दूर्वा और पीला सरसों चढ़ाया जाता है. यह सुरक्षा के लिए मनाया जाता श्रावण पूर्णिमा के दिन अगर कोई बहन अपने भाई को किसी वजह से राखी नहीं बांध सकी होती है, वह रक्षा पंचमी के दिन राखी बांध सकती है. इससे भाई सदा स्वस्थ रहता है और परिवार में सुख एवं शांति रहती है, दुश्मन आपसे परास्त होते हैं. गुजरात में इस दिन को गोगा पंचमी के नाम से मनाया जाता है, जिसमें गुजराती समाज के लोग नागों की पूजा करते हैं.पक्ष
#शुभ कामनाएँ 🙏
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