Jagdish Sharma
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।। ॐ ।।
तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसासरसागरात्।
भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्॥१२/७॥
केवल मुझमें चित्त लगानेवाले उन भक्तों का मैं शीघ्र ही मृत्युरूप संसार-सागर से उद्धार करनेवाला होता हूँ। इस प्रकार चित्त लगाने की प्रेरणा और विधि पर योगेश्वर प्रकाश डालते हैं- "यथार्थ गीता" #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #यथार्थ गीता
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