Jagdish Sharma
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।। ॐ ।।
यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति।
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥१२/१७॥
जो न कभी हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न कामना ही करता है तथा जो शुभ और अशुभ सम्पूर्ण कर्मों के फल का त्यागी है, जहाँ कोई शुभ विलग नहीं है, अशुभ शेष नहीं है, भक्ति की इस पराकाष्ठा से युक्त वह पुरुष मुझे प्रिय है। #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #❤️जीवन की सीख #यथार्थ गीता
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