सुशील मेहता
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सावन नारली पूर्णिमा
बेहद उल्लासपूर्ण तरीके से मनाए जाने वाले इस त्योहार की सबसे खास बात है भाई-बहन के पवित्र रिश्तों की मिठास। यह पूरेरक्षाबंधन
रक्षा बंधन, एक प्रसिद्ध भारतीय त्योहार है जिसका हिंदू परिवारों में सभी बहनों और भाइयों द्वारा उत्सुकता से इंतजार किया जाता है, जो कि आने ही वाला है। यह राखी के नाम से भी जाना जाता है, यह एक भाई और बहन के विशेष बंधन का उत्सव है। यह हिंदू महोत्सव पूर्णिमा, श्रावण के पवित्र महीने के अंतिम दिन पर बहुत खुशी के साथ मनाया जाता है। राखी के अनुष्ठान हमेशा दिन के शुभ समय के दौरान किया जाना चाहिए। इस त्यौहार की सभी परंपराओं को देखने के लिए अपरान्ह के समय को सही समय माना जाता है। भाद्र के समय से सख्ती से बचा जाना चाहिए क्योंकि यह अशुभ होता है और किसी भी शुभ काम के लिए सही नहीं माना जाता है।
राखी के संबंध में पुराणों में कथा है कि यम, मृत्यु के देवता, 12 साल बाद अपनी बहन देवी यमुना के यहाँ आये । वह उत्साहित थी और उसने अपने भाई के लिए उसके सभी पसंदीदा व्यंजनों के साथ एक भव्य दावत तैयार की । जब वह उससे मिलने आये, तो उसने उनका तिलक के साथ स्वागत किया और उनके हाथ पर धागा बांध दिया। यम इससे काफी प्रभावित हुए और यमुना से उसके पसंदीदा उपहार के बारे में पूछा । जिस पर, उसने उन्हें नियमित रूप से उससे मिलने के लिए कहा। यम ने फिर उसे अमरत्व का आशीर्वाद दिया और किसी भी कठिनाई से उसे बचाने का वादा किया।भारत में मनाया जाता है। असल में श्रावण पूर्णिमा देश में हर प्रांत में अलग-अलग रूपों में मनायी जाती है।
श्रावण पूर्णिमा को दक्षिण भारत में नारयली पूर्णिमा व अवनी अवित्तम, मध्य भारत में कजरी पूनम, उत्तर भारत में रक्षा बंधन और गुजरात में पवित्रोपना के रूप में मनाया जाता है। हमारे त्योहारों की यही विविधता ही तो भारत की विशिष्टता की पहचान है। पश्चिमी घाट पर रहने वाले लोगों का एकमात्र आधार समुद्र ही है। समुद्री सामग्री पर जीवन निर्वाह करने वाले लोग इस दिन समुद्र के देवता वरुण की पूजा करते हैं। यह समय मानसून की वापसी का होता है इस कारण समुद्र भी शांत होता है। मछुआरे अपनी-अपनी नावों को सजाकर समुद्र के किनारे लाते हैं। नाचते गाते हैं और वरुण देवता को नारियल अर्पित कर प्रार्थना करते हैं कि उनका जीवन निर्वाह अच्छे से हो।
नारियल इसलिए अर्पित किया जाता है क्योंकि नारियल की तीन आँखे होने के कारण उसे शिव का प्रतीक माना जाता है। हमारे देश में किसी भी काम की शुरूआत से पहले भगवान को नारियल अर्पित करना उनसे आशीर्वाद लेने तथा उन्हें धन्यवाद देने का सबसे प्रचलित तरीका है। तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा और महाराष्ट्र में यजुर्वेद पढ़ने वाले ब्राह्मण इस दिन को अवनी अवित्तम के रूप में मनाते हैं। इस दिन पुराने पापों से छुटकारे के लिए महासंकल्प लिया जाता है। ब्राह्मण स्नान करने के बाद नया यज्ञोपवीत धारण करते हैं
उपक्रमम का अर्थ होता है शुरूआत। इसी दिन से यजुर्वेदी ब्राह्मण अगले छः महीने तक यजुर्वेद पढ़ने की शुरूआत करते हैं। यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय मिथकों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने ज्ञान के देवता हयाग्रीव के रूप में अवतार लिया था। यह त्योहार भी श्रावण पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है। कजरी पूर्णिमा को मध्य भारत में खासकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में मनाया जाता है। श्रावण अमावस्या के नौंवे दिन यानी कि कजरी नवमी से उसकी तैयारी शुरु हो जाती है। यह त्योहार पुत्रवती महिलाएँ मनाती हैं। कजरी नवमी के दिन महिलाएँ पेड़ के पत्तों के पात्रों में खेत से मिट्टी भरकर लाती हैं। इसमें जौ को बोया जाता है। इन पात्रों को अंधेरे में रखा जाता है। जहाँ ये पात्र रखे जाते हैं। वहाँ पर चावल के घोल से चित्रकारी भी की जाती है।
कजरी पूर्णिमा के दिन सारी महिलाएँ इन जौ को सिर पर रखकर जुलूस निकालती हैं और पास के किसी तालाब या नदी में विसर्जित कर देती हैं। महिलाएँ इस दिन उपवास रखकर अपने पुत्र की लंबी आयु की कामना करती हैं। गुजरात में शिव भगवान की उपासना बड़े जोर-शोर से होती है। पूरे साल लोग शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। श्रावण पूर्णिमा जल चढ़ाने का अंतिम दिन होता है। इस दिन शिव जी का पूजन भी होता है। पवित्रोपना के तहत रूई की बत्तियाँ पंचग्वया (गाय के घी, दुध, दही आदि) में डुबाकर शिव को अर्पित की जाती हैं
इस दिन को हमारे देश मनाने के कारण और तरीके कितने ही अलग क्यों न हो परंतु इन सबके मूल में रक्षा की भावना ही होती है। इससे हमारे देश की अनेकता में एकता की बात पुष्ट होती है। #शुभ कामनाएँ 🙏
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