सुशील मेहता
हेरम्ब संकष्टी चतुर्थीहेरम्बा संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करन से व्यक्ति को हर तरह के दुखों से छुटकारा मिल सकता है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। हर मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। ऐसे ही भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। बता दें कि हेरम्बा भगवान गणेश का ही एक स्वरूप है। हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से एक हेरम्बा की पूजा करने का विधान है। हेरम्बा भगवान के पांच मुख और दस हाथ है। एक हाथ वरदान की मुद्रा पर है और दूसरा में मोदक है। इसके साथ ही बचे हुए आठ हाथ क्रमश:फंदा,अंकुश, माला, दूर्वा, फल, माला, कुल्हाड़ी आदि लिए हुए हैं। इन्हें दुर्बलों का रक्षक माना जाता है। हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी के दिन भक्त सूर्योदय के समय उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें इसके बाद साफ वस्त्र धारण कर लें। सुबह के समय भगवान गणेश की विधिवत पूजा कर लें और दिनभर व्रत रखें।
शाम के समय भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। उन्हें फूलों और दूर्वा से सजाएं। इसके साथ ही उन्हें फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि अर्पित करने के बाद भोग में मोदक चढ़ाएं। इसके बाद घी की दीपक और धूप जलाकर गणेश मंत्र, गणेश चालीसा के साथ गणेश अष्टोत्र और संकटनाशन स्तोत्र’ का पाठ कर लें। अंत में विधिवत आरती कर लें। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ अपने व्रत को खोल लें।
#शुभ कामनाएँ 🙏