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लोन की EMI वसूली के नाम पर बैंक एजेंट का दबाव कितना जायज? जानिए ग्राहक के अधिकार और RBI के नियम
जन-क्रांति कार्यालय से विशेष रिपोर्ट
EMI बकाया होने पर बैंक संपर्क कर सकता है, लेकिन धमकी, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न की इजाजत नहीं; रिकवरी एजेंटों के व्यवहार पर RBI की स्पष्ट गाइडलाइन
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 22 अगस्त, 2026)। आज के समय में घर, वाहन, शिक्षा, कारोबार या अन्य जरूरतों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थानों से लोन लेना आम बात हो गई है। लेकिन किसी कारणवश यदि ग्राहक की EMI समय पर जमा नहीं हो पाती है, तो उसके बाद बैंक या बैंक की ओर से नियुक्त रिकवरी एजेंट द्वारा लगातार फोन करने और भुगतान के लिए दबाव बनाने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
सवाल यह है कि क्या बैंक एजेंट द्वारा EMI भुगतान के लिए दबाव बनाना सही है?
इसका सीधा जवाब है—बकाया EMI की वसूली के लिए संपर्क करना बैंक का अधिकार है, लेकिन वसूली के नाम पर ग्राहक को धमकाना, अपमानित करना या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना सही नहीं है।
EMI बकाया होने पर बैंक क्या कर सकता है?
यदि किसी ग्राहक की EMI समय पर जमा नहीं हुई है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया राशि के भुगतान के लिए कह सकता है। बैंक या अधिकृत रिकवरी एजेंट भुगतान की स्थिति, बकाया रकम और आगे की प्रक्रिया के संबंध में ग्राहक से बातचीत कर सकता है।
लेकिन वसूली की प्रक्रिया सम्मानजनक और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। RBI ने बैंकों और उनके recovery agents को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे कर्ज वसूली के दौरान intimidation या harassment का सहारा न लें।
कब गलत माना जा सकता है एजेंट का दबाव?
यदि कोई रिकवरी एजेंट—
बार-बार फोन करके परेशान करता है,
गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है,
धमकी देता है,
परिवार, रिश्तेदारों या दोस्तों को परेशान करता है,
ग्राहक को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश करता है,
झूठी या भ्रामक जानकारी देकर डराता है,
सोशल मीडिया या मोबाइल पर अनुचित संदेश भेजता है,
या वसूली के लिए किसी तरह का शारीरिक अथवा मानसिक दबाव बनाता है,
तो ऐसी कार्रवाई RBI की निर्धारित recovery practices के विपरीत हो सकती है। RBI ने स्पष्ट किया है कि recovery agents को ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए।
सुबह-शाम फोन करने की भी सीमा
RBI के 12 अगस्त 2022 के निर्देशों के अनुसार overdue loans की recovery के लिए borrower को सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद फोन नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही लगातार परेशान करने वाली कॉल और धमकी भरे फोन भी प्रतिबंधित हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि EMI बकाया होने पर बैंक कार्रवाई नहीं कर सकता। बैंक अपने वैध अधिकारों के तहत भुगतान की मांग और निर्धारित recovery process अपना सकता है, लेकिन तरीका नियमों के दायरे में होना चाहिए।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
रिकवरी एजेंट की हरकत के लिए बैंक भी जिम्मेदार
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंक किसी recovery agency को नियुक्त कर देने के बाद अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता।
RBI के निर्देशों के अनुसार regulated entity अपने outsourced service providers और recovery agents की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार रहती है। इसलिए यदि किसी अधिकृत recovery agent के व्यवहार को लेकर शिकायत है, तो ग्राहक संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था के grievance redressal mechanism में शिकायत दर्ज कर सकता है।
ग्राहक को क्या करना चाहिए?
अगर किसी ग्राहक को लगता है कि EMI वसूली के नाम पर उसके साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है, तो उसे घबराने के बजाय व्यवस्थित तरीके से शिकायत करनी चाहिए।
सबसे पहले बैंक की शाखा या संबंधित वित्तीय संस्था के ग्राहक शिकायत निवारण अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करें। फोन कॉल, मैसेज, WhatsApp संदेश या अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना भी उपयोगी हो सकता है।
शिकायत करते समय ग्राहक को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसका लोन खाता कौन-सा है, कितनी EMI बकाया है और recovery agent ने किस प्रकार का व्यवहार किया।
EMI नहीं भर पाने पर ग्राहक भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता
यह भी समझना जरूरी है कि RBI की recovery-agent guidelines का अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक EMI चुकाने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है।
यदि वास्तविक रूप से EMI बकाया है, तो ग्राहक को बैंक से बातचीत कर अपनी आर्थिक स्थिति बतानी चाहिए और उपलब्ध वैध विकल्पों—जैसे भुगतान की व्यवस्था, पात्रता के अनुसार restructuring या अन्य बैंक-स्वीकृत समाधान—के बारे में जानकारी लेनी चाहिए।
बैंक का पैसा वापस मांगना अधिकार है, लेकिन ग्राहक को डराना या अपमानित करना अधिकार नहीं है।
सवाल बैंकिंग व्यवस्था से भी
जरूरत इस बात की है कि बैंक और वित्तीय संस्थाएं अपने recovery agents को संवेदनशील तरीके से काम करने के लिए प्रशिक्षित करें। RBI पहले भी इस बात पर जोर देता रहा है कि recovery agents को ग्राहकों के साथ सावधानी और संवेदनशीलता से व्यवहार करने, कॉलिंग के समय और ग्राहक की निजता जैसे पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
EMI बकाया है तो बैंक भुगतान मांग सकता है, लेकिन वसूली के नाम पर मनमानी नहीं कर सकता। ग्राहक से संपर्क करना और बकाया भुगतान की मांग करना एक वैध प्रक्रिया है, जबकि धमकी, गाली-गलौज, लगातार परेशान करना, परिवार को दबाव में लेना या सार्वजनिक रूप से अपमानित करना स्वीकार्य recovery practice नहीं है।
इसलिए जरूरत है कि बैंक और ग्राहक दोनों अपने-अपने अधिकार और जिम्मेदारियों को समझें। ग्राहक भी समय पर EMI भुगतान को प्राथमिकता दे और यदि आर्थिक परेशानी के कारण भुगतान संभव नहीं है तो बैंक से बातचीत करे। वहीं बैंक और उसके recovery agents भी RBI के नियमों के अनुसार सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से वसूली प्रक्रिया अपनाएं।
जन-क्रांति की अपील:
यदि किसी पाठक को EMI वसूली के नाम पर धमकी, अभद्रता या अनुचित दबाव का सामना करना पड़ रहा है, तो बिना घबराए संबंधित बैंक के आधिकारिक शिकायत निवारण माध्यम का इस्तेमाल करें और बातचीत/संदेश से जुड़े प्रमाण सुरक्षित रखें।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। #🆕 ताजा अपडेट ##Samastipur news #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #samastipur
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