sn vyas
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 शरीर छूटने के बाद कहाँ जाती हैं वासनाएँ और संस्कार? पुनर्जन्म का सबसे गहरा रहस्य ... ​जब मृत्यु के समय यह भौतिक शरीर माटी में मिल जाता है, आँखें-कान और सारी इंद्रियाँ शांत हो जाती हैं—तो फिर वे अधूरी इच्छाएँ और संस्कार कहाँ टिकते हैं जिनके कारण जीव को बार-बार नया जन्म लेना पड़ता है?भौतिक शरीर छूटता है, सूक्ष्म शरीर नहीं ​अध्यात्म और दर्शन के अनुसार, हमारे तीन स्तर होते हैं—स्थूल शरीर (यह दिखने वाला मांस-मज्जा का पुतला), सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। ​जब मृत्यु होती है, तो केवल स्थूल शरीर पंचतत्वों में विलीन होता है। ​लेकिन हमारे मन, अहंकार और जन्म-जन्मांतर के संस्कारों का पूरा डेटाबेस सूक्ष्म और कारण शरीर में सुरक्षित रहता है। यह नष्ट नहीं होता, बल्कि ऊर्जा के रूप में आगे बढ़ जाता है इसे ऐसे समझें जैसे आपके पास एक कंप्यूटर है। अचानक वह कंप्यूटर खराब होकर टूट जाता है खत्म हो जाता है। ​उसका हार्डवेयर (स्थूल शरीर) तो खत्म हो गया, लेकिन क्या उसकी हार्ड डिस्क में सेव किया गया डेटा (संस्कार और वासनाएँ) भी मिट गया? ​कतई नहीं! डेटा नष्ट नहीं होता। जब आप एक नया कंप्यूटर लाते हैं, तो वही डेटा उसमें लोड हो जाता है। ​ठीक इसी तरह, संस्कारों का यह पूरा डेटा ऊर्जा की सूक्ष्म तरंगों के रूप में अस्तित्व में बना रहता है, और नया शरीर (गर्भ) मिलते ही फिर से प्रकट हो जाता है। ​यह जन्म-मरण का खेल तब तक चलता रहता है जब तक यह डेटा (संस्कार) और अज्ञान का पहिया घूम रहा है। ​लेकिन जिस दिन आत्मबोध का दीया जलता है और इंसान यह जान लेता है कि "मैं वह कंप्यूटर या डेटा नहीं हूँ, बल्कि इस सबका देखने वाला शुद्ध और अमर दृष्टा हूँ"—उसी क्षण संस्कारों का यह पूरा डेटा हमेशा के लिए डिलीट हो जाता है। जब कोई वासना ही नहीं बचती, तो पुनर्जन्म का चक्र भी सदा के लिए थम जाता है और जीव अपनी परम शांति में लीन हो जाता है। ॐ हरि
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