sn vyas
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#जय श्री राम #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🔱हर हर महादेव #🔱बम बम भोले🙏
तब कर अस बिमोह अब नाहीं।
रामकथा पर रुचि मन माहीं॥
कहहु पुनीत राम गुन गाथा।
भुजगराज भूषन सुरनाथा॥
अर्थ: मुझे अब पहले जैसा मोह नहीं है, अब तो मेरे मन में रामकथा सुनने की रुचि है। हे शेषनाग को अलंकार रूप में धारण करने वाले देवताओं के नाथ! आप श्री रामचन्द्रजी के गुणों की पवित्र कथा कहिए॥
भावार्थ: माता पार्वती भगवान शिव से कह रही हैं कि पिछले जन्म में (सती के रूप में) जब उन्होंने श्रीराम की परीक्षा ली थी, तब उनके मन में जो अज्ञान और संशय (बिमोह) था, वह अब पूरी तरह नष्ट हो चुका है। अज्ञान के मिटते ही चंचल मन शांत हो गया है और अब अंतःकरण में भगवान की भक्ति का उदय हुआ है। जब तक मन में सांसारिक मोह रहता है, तब तक ईश्वर की कथा में रस नहीं मिलता। मोह के समाप्त होते ही जीव के मन में हरि-कथा सुनने की तीव्र प्यास जाग उठती है।
प्रसंग और गहरा महत्वभ्रम का नाश: पूर्व जन्म (सती रूप) में माता पार्वती को श्रीराम के ईश्वर होने पर संदेह (मोह) हो गया था। इस चौपाई में वे स्वीकार करती हैं कि भगवान शिव के उपदेशों से उनका वह पुराना संदेह और अज्ञान पूरी तरह नष्ट हो चुका है।जिज्ञासा का उदय: जब मनुष्य के भीतर से अज्ञान हटता है, तभी ईश्वर की कथा और भक्ति में सच्ची रुचि और प्रेम पैदा होता है।शिवजी का विशेषण: 'भुजगराज भूषन' कहकर पार्वती जी शिवजी के कल्याणकारी और वैराग्यमय रूप की वंदना करती हैं, जो विषैले सर्पों को भी गले का हार बना लेते हैं और अपने भक्तों का हर संकट हर लेते हैं।
भक्ति संदेश: यह चौपाई हमें जीवन के तीन बड़े भक्ति सूत्र सिखाती है:मोह का नाश ही भक्ति की शुरुआत है: जब तक मन सांसारिक भ्रम और अहंकार में डूबा है, तब तक भगवान के सत्य स्वरूप को नहीं समझा जा सकता। संशय मिटने पर ही सच्ची श्रद्धा पैदा होती है।सत्संग और हरि-कथा की महिमा: ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत करने का सबसे सरल माध्यम भगवान की लीलाओं और गुणों का श्रवण (सुनना) है।सच्चे गुरु के आगे आत्मसमर्पण: माता पार्वती ने भगवान शिव (जो कि परम गुरु हैं) के सामने अपनी अज्ञानता स्वीकार की। आध्यात्मिक प्रगति के लिए गुरु के समक्ष सरल और निष्कपट होना आवश्यक है।
🙏!!जय श्री राम!!🙏
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