sn vyas
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#शुभ रविवार
`कई वर्ष पुराना प्रसंग है एवं प्रत्येक रविवार को इसे स्मरण करना आवश्यक है ।`
`"सूर्य देव केवल प्रकाश देते हैं , इसलिए प्रातःकाल उठकर जल चढ़ाना ही पर्याप्त है"`
`ये सोच सरल है... किन्तु शास्त्र कहते हैं सूर्योपासना केवल जल से नहीं , ज्ञान एवं स्तुति से पूर्ण होती है ।`
`यदि जल चढ़ाना ही पर्याप्त होता , तो याज्ञवल्क्य जी को नया यजुर्वेद नहीं मिलता ।`
`उन्होंने तो प्राणायाम एवं स्तोत्र से सूर्य को प्रसन्न किया था ।`
`क्या हम भी कर सकते हैं❔`
`तो फिर सुविधा के अनुसार केवल एक लोटा जल चढ़ाकर कर्तव्य पूरा मानना बंद कीजिए ।`
*#याज्ञवल्क्यकृत_श्री_सूर्य_स्तोत्र*
*#श्रीविष्णुपुराण_तृतीय_अंश_पंचम_अध्याय*
*#प्रसङ्ग –*
`महर्षि याज्ञवल्क्य जी ने क्रोध में गुरु वैशम्पायन को यजुर्वेद की विद्या वमन कर दी थी । पश्चाताप वे प्राणायाम करते हुए सूर्यदेव की आराधना करने लगे । सूर्यदेव अश्वरूप में प्रकट हुए एवं उन्हें अयातयाम शुक्ल यजुर्वेद की १५ नई शाखाएं दीं । इसी स्तोत्र से वे प्रसन्न हुए थे ।`
`#सम्पूर्ण_स्तोत्र_मूलश्लोक_सहित –`
*नमस्सवित्रे द्वाराय मुक्तेरमिततेजसे ।*
*ऋग्यजुस्सामभूताय त्रयीधाम्ने च ते नमः ॥१६॥*
`अर्थात 👉🏻 मुक्ति के द्वारस्वरूप , अपार तेज वाले , ऋग-यजु-साम रूप , तीनों वेदों के धाम सविता देव को नमस्कार ।`
*नमोऽग्निषोमभूताय जगतः कारणात्मने ।*
*भास्कराय परं तेजस्सौषुम्नरुचिभर्ते ॥१७॥*
`अर्थात 👉🏻 अग्नि-सोमात्मक , जगत के कारणभूत , परम् तेजस्वी , सुषुम्ना नाड़ी के प्रकाश को धारण करने वाले भास्कर को नमस्कार ।`
*कलाकाष्ठानिमेषादिकालज्ञानात्मरूपिणे ।*
*ध्येयाय विष्णुरूपाय परमाक्षररूपिणे ॥१८॥*
`अर्थात 👉🏻 कला-काष्ठा-निमेष रूप काल के ज्ञाता , ध्यान करने योग्य , विष्णुरूप , परब्रह्म अक्षर स्वरूप को नमस्कार ।`
*बिभर्ति यस्युरगणानप्यायेन्दुं स्वरश्मिभिः ।*
*स्वधामृतेन च पितृंस्तस्मै तृप्तात्मने नमः ॥१९॥*
`अर्थात 👉🏻 जो अपनी किरणों से देवगणों तथा चंद्रमा को पुष्ट करते हैं , स्वधा रूप अमृत से पितरों को तृप्त करते हैं , उन तृप्तस्वरूप को नमस्कार ।`
*हिमाम्बुघर्मवृष्टीनां कर्ता भर्ता च यः प्रभुः ।*
*तस्मै त्रिकालरूपाय नमस्सूर्याय वेधसे ॥२०॥*
`अर्थात 👉🏻 हिम , जल , ग्रीष्म/गर्मी , वर्षा के कर्ता-भर्ता ,औऱ भूत-भविष्य-वर्तमान रूप विधाता सूर्य को नमस्कार ।`
*अपहन्ति तमो यश्च जगतोऽस्य जगत्पतिः ।*
*सत्त्वाधारो देवो नमस्तस्मै विवस्वते ॥२१॥*
`अर्थात 👉🏻 जो जगतपति इस जगत का अंधकार नाश करते हैं , सत्त्वगुण के आधार देव विवस्वान को नमस्कार ।`
*सत्कर्मयोगो न जनो नैवापः शुद्धिकारणम् ।*
*यस्मिन्नुदिते तस्मै नमो देवाय भास्वते ॥२२॥*
`अर्थात 👉🏻 जिनके उदय हुए बिना मनुष्य सत्कर्म नहीं कर सकता , न जल शुद्धि का कारण बनता , उन भास्वान देव को नमस्कार ।`
*सृष्ट्वेदंशुभिर्लोकः क्रियायोग्यो हि जायते ।*
*पवित्रताकारणाय तस्मै शुद्धात्मने नमः ॥२३॥*
`अर्थात 👉🏻 जिनकी किरणों से यह लोक कर्म करने योग्य होता है , उन पवित्रता के हेतु/कारण शुद्धात्मा को नमस्कार ।`
*नमः सवित्रे सूर्याय भास्कराय विवस्वते ।*
*आदित्यायादिभूताय देवादीनां नमो नमः ॥२४॥*
`अर्थात 👉🏻 सविता , सूर्य , भास्कर , विवस्वान , एवं आदिभूत आदित्य – देवों के आदि देव को बारंबार नमस्कार ।`
*हिरण्मयं रथं यस्य केतवोऽमृतवाजिनः ।*
*वहन्ति भुवनालोकिचक्षुस्तं नमाम्यहम् ॥२५॥*
`अर्थात 👉🏻 जिनका सुवर्णमय रथ , अमृत रूपी अश्व तथा छंद रूपी ध्वजा वहन करते हैं , जो तीनों भुवनों के नेत्र हैं , उनको मैं नमस्कार करता हूँ ।`
*यही सूर्य हैं – जो स्वयं जलते हैं , किन्तु समस्त जगत को प्रकाश औऱ जीवन देते हैं ।*
`सूर्यभक्ति का अर्थ नकल करना नहीं है , अपितु सूर्यभक्ति का अर्थ है उनके जैसा "तेजस्वी" बनना ।`
*अपने आलस्य का अंधकार दूर करो ।*
*अपने प्रमाद का तम नाश करो ।*
*अपने अज्ञान को ज्ञान के प्रकाश से मिटाओ ।*
*एवं जगत को कर्म का प्रकाश दो ।*
*तदोपरांत आप सच्चे सूर्यभक्त कहलाओगे ।*
`शुभ रविवार ☀️ सूर्यदेव की कृपा आप समस्त पर बनी रहे💐💐💐`
`ॐ सूर्याय नमः🌼`
`ॐ भास्कराय नमः🚩`
`श्रीमात्रे नमः🚩`
`श्रीकाल्यै नमः🚩`
`श्रीतारायै नमः🚩`
`श्रीत्रिपुरायै नमः🚩`
`श्रीभुवनेश्वर्यै नमः🚩`
`श्रीअम्बिकायै नमः🚩`
`श्रीदुर्गापरमेश्वर्यै नमः🚩`
`नमश्चण्डिकायै🚩`
`श्रीदक्षिणामूर्तये नमः🚩`
`शिव शिव शिव शिव शिव🚩`
`हर हर शङ्कर🚩`
`जय जय शङ्कर🚩`
`🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄`
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