sn vyas
538 views 1 days ago
#शुभ रविवार `कई वर्ष पुराना प्रसंग है एवं प्रत्येक रविवार को इसे स्मरण करना आवश्यक है ।` `"सूर्य देव केवल प्रकाश देते हैं , इसलिए प्रातःकाल उठकर जल चढ़ाना ही पर्याप्त है"` `ये सोच सरल है... किन्तु शास्त्र कहते हैं सूर्योपासना केवल जल से नहीं , ज्ञान एवं स्तुति से पूर्ण होती है ।` `यदि जल चढ़ाना ही पर्याप्त होता , तो याज्ञवल्क्य जी को नया यजुर्वेद नहीं मिलता ।` `उन्होंने तो प्राणायाम एवं स्तोत्र से सूर्य को प्रसन्न किया था ।` `क्या हम भी कर सकते हैं❔` `तो फिर सुविधा के अनुसार केवल एक लोटा जल चढ़ाकर कर्तव्य पूरा मानना बंद कीजिए ।` *#याज्ञवल्क्यकृत_श्री_सूर्य_स्तोत्र* *#श्रीविष्णुपुराण_तृतीय_अंश_पंचम_अध्याय* *#प्रसङ्ग –* `महर्षि याज्ञवल्क्य जी ने क्रोध में गुरु वैशम्पायन को यजुर्वेद की विद्या वमन कर दी थी । पश्चाताप वे प्राणायाम करते हुए सूर्यदेव की आराधना करने लगे । सूर्यदेव अश्वरूप में प्रकट हुए एवं उन्हें अयातयाम शुक्ल यजुर्वेद की १५ नई शाखाएं दीं । इसी स्तोत्र से वे प्रसन्न हुए थे ।` `#सम्पूर्ण_स्तोत्र_मूलश्लोक_सहित –` *नमस्सवित्रे द्वाराय मुक्तेरमिततेजसे ।* *ऋग्यजुस्सामभूताय त्रयीधाम्ने च ते नमः ॥१६॥* `अर्थात 👉🏻 मुक्ति के द्वारस्वरूप , अपार तेज वाले , ऋग-यजु-साम रूप , तीनों वेदों के धाम सविता देव को नमस्कार ।` *नमोऽग्निषोमभूताय जगतः कारणात्मने ।* *भास्कराय परं तेजस्सौषुम्नरुचिभर्ते ॥१७॥* `अर्थात 👉🏻 अग्नि-सोमात्मक , जगत के कारणभूत , परम् तेजस्वी , सुषुम्ना नाड़ी के प्रकाश को धारण करने वाले भास्कर को नमस्कार ।` *कलाकाष्ठानिमेषादिकालज्ञानात्मरूपिणे ।* *ध्येयाय विष्णुरूपाय परमाक्षररूपिणे ॥१८॥* `अर्थात 👉🏻 कला-काष्ठा-निमेष रूप काल के ज्ञाता , ध्यान करने योग्य , विष्णुरूप , परब्रह्म अक्षर स्वरूप को नमस्कार ।` *बिभर्ति यस्युरगणानप्यायेन्दुं स्वरश्मिभिः ।* *स्वधामृतेन च पितृंस्तस्मै तृप्तात्मने नमः ॥१९॥* `अर्थात 👉🏻 जो अपनी किरणों से देवगणों तथा चंद्रमा को पुष्ट करते हैं , स्वधा रूप अमृत से पितरों को तृप्त करते हैं , उन तृप्तस्वरूप को नमस्कार ।` *हिमाम्बुघर्मवृष्टीनां कर्ता भर्ता च यः प्रभुः ।* *तस्मै त्रिकालरूपाय नमस्सूर्याय वेधसे ॥२०॥* `अर्थात 👉🏻 हिम , जल , ग्रीष्म/गर्मी , वर्षा के कर्ता-भर्ता ,औऱ भूत-भविष्य-वर्तमान रूप विधाता सूर्य को नमस्कार ।` *अपहन्ति तमो यश्च जगतोऽस्य जगत्पतिः ।* *सत्त्वाधारो देवो नमस्तस्मै विवस्वते ॥२१॥* `अर्थात 👉🏻 जो जगतपति इस जगत का अंधकार नाश करते हैं , सत्त्वगुण के आधार देव विवस्वान को नमस्कार ।` *सत्कर्मयोगो न जनो नैवापः शुद्धिकारणम् ।* *यस्मिन्नुदिते तस्मै नमो देवाय भास्वते ॥२२॥* `अर्थात 👉🏻 जिनके उदय हुए बिना मनुष्य सत्कर्म नहीं कर सकता , न जल शुद्धि का कारण बनता , उन भास्वान देव को नमस्कार ।` *सृष्ट्वेदंशुभिर्लोकः क्रियायोग्यो हि जायते ।* *पवित्रताकारणाय तस्मै शुद्धात्मने नमः ॥२३॥* `अर्थात 👉🏻 जिनकी किरणों से यह लोक कर्म करने योग्य होता है , उन पवित्रता के हेतु/कारण शुद्धात्मा को नमस्कार ।` *नमः सवित्रे सूर्याय भास्कराय विवस्वते ।* *आदित्यायादिभूताय देवादीनां नमो नमः ॥२४॥* `अर्थात 👉🏻 सविता , सूर्य , भास्कर , विवस्वान , एवं आदिभूत आदित्य – देवों के आदि देव को बारंबार नमस्कार ।` *हिरण्मयं रथं यस्य केतवोऽमृतवाजिनः ।* *वहन्ति भुवनालोकिचक्षुस्तं नमाम्यहम् ॥२५॥* `अर्थात 👉🏻 जिनका सुवर्णमय रथ , अमृत रूपी अश्व तथा छंद रूपी ध्वजा वहन करते हैं , जो तीनों भुवनों के नेत्र हैं , उनको मैं नमस्कार करता हूँ ।` *यही सूर्य हैं – जो स्वयं जलते हैं , किन्तु समस्त जगत को प्रकाश औऱ जीवन देते हैं ।* `सूर्यभक्ति का अर्थ नकल करना नहीं है , अपितु सूर्यभक्ति का अर्थ है उनके जैसा "तेजस्वी" बनना ।` *अपने आलस्य का अंधकार दूर करो ।* *अपने प्रमाद का तम नाश करो ।* *अपने अज्ञान को ज्ञान के प्रकाश से मिटाओ ।* *एवं जगत को कर्म का प्रकाश दो ।* *तदोपरांत आप सच्चे सूर्यभक्त कहलाओगे ।* `शुभ रविवार ☀️ सूर्यदेव की कृपा आप समस्त पर बनी रहे💐💐💐` `ॐ सूर्याय नमः🌼` `ॐ भास्कराय नमः🚩` `श्रीमात्रे नमः🚩` `श्रीकाल्यै नमः🚩` `श्रीतारायै नमः🚩` `श्रीत्रिपुरायै नमः🚩` `श्रीभुवनेश्वर्यै नमः🚩` `श्रीअम्बिकायै नमः🚩` `श्रीदुर्गापरमेश्वर्यै नमः🚩` `नमश्चण्डिकायै🚩` `श्रीदक्षिणामूर्तये नमः🚩` `शिव शिव शिव शिव शिव🚩` `हर हर शङ्कर🚩` `जय जय शङ्कर🚩` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄` `© सर्वाधिकाट सुरक्षित । सर्वज्ञ शङ्कर🚩 चैनल` `#प्रभातवन्दन` `#सर्वज्ञशङ्कर` `#याज्ञवल्क्यकृत_श्री_सूर्य_स्तोत्र` `#श्रीविष्णुपुराण_तृतीय_अंश_पंचम_अध्याय` `#ॐ_घृणि_सूर्याय_नमः` `#सूर्यदेव` `#वाजसनेयी` `#अयातयाम_यजुर्वेद` `#तेज` `#सूर्यभक्ति` `#रविवार` `#आलस्यमुक्ति` `#सनातन_ज्ञान` `#ॐसूर्यायनमः`
18 likes
9 shares

More like this