sn vyas
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#भक्ति #भक्ति भावना भक्ति के लक्षण प्रसन्नता एवं अप्रसन्नता ये भक्ति का लक्षण नहीं है। किसी भी स्थिति के प्रति स्वीकारोक्ति एवं प्रभु का धन्यवाद भक्ति का लक्षण है। भक्ति दुख नहीं मिटाती है, बस दुख सहने की क्षमता को इतना बढ़ा देती है कि बड़े से बड़ा दुख भी उसके आगे छोटा ही लगने लगता है। ये बात तो सत्य है कि भक्त के जीवन में भी दुख बहुत होते हैं लेकिन ये बात भी सत्य है कि प्रभु भक्त के चेहरे पर कभी खिन्नता अथवा अप्रसन्नता का भाव नहीं रहता। भक्ति मानव जीवन की अनमोल निधि है। जैसे बिना जल के बादल शोभाहीन एवं अनुपयोगी हो जाता है,_ _उसी प्रकार भक्तिहीन मानव का जीवन भी समझा जाना चाहिए।_ _स्वकल्याण और पर सेवा की भावना दृढ़ हो, इसके लिए भी भक्ति महारानी का सुदृढ़ आश्रय अनिवार्य हो जाता है। जय श्री कृष्ण 🔆🔆🔆🔆🔆🔆🔆🔆🔆🔆
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