Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
jasbir - Author on ShareChat
jasbir
517 views • 4 days ago
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Tu Guru Ji पुत्तर, जो सब्र के साथ इंतज़ार करना सीख जाते हैं, उनके पास हर चीज़ पहुँच जाती है। जो जल्दबाज़ी करता है, वो खो देता है; जो सब्र करता है॰ उसे सब मिल जाता हैl कभी जिस चीज़ को वो सुकून " बनकर मिलती है। जिसे तुम प्रेम समझकर माँग रहे थे, तुम पैसा समझ रहे थे, वो सेहत बनकर मिलती है। हम रूप पर अटके रहते हैं, परमात्मा अर्थ देता है परमात्मा तौल कर देता है, पक्षपात नहीं करता। उसका तराज़ू कहीं ज़्यादा सच्चा है। हम सोचते हैं कि उसने हमें कम గT ' दिया, पर वो हक़ से देता है, लालच से नहीं। जिसके हाथ जितने बड़े होते हैं उसे उतना ही देता है छोटे हाथों में समंदर नहीं दिया जाता पुत्तर, छलक जाएगा। और बड़े दिल वाले को वो कम भी देः तो वो बहुत ज़्यादा बन जाता है। सब्र किया नहीं जाता, सब्र सधता है; और जब सध जाता है॰ तो इंतज़ार बोझ नहीं लगता, पूजा लगने लगती है। नमः शिवाय , शिव जी सदा सहाय फ
4 shares

More like this

  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    9 Cek UU HI UU GURU Jr] पुत्तर, जेहड़ा इंसान अपने अंदर दा संतुलन बना लैंदा ऐ ना, ओही द्ुनिया दे वडे तों वड़े तूफ़ान विच वी अडिग खड़ा रहंदा ऐज़! मेरी एह गल्ल याद रख़ीं, जिंदगी विच कदे ्कदे मिली हारवी तैनूं उस मंज़िल तक पहुँचा देंदी ऐ जिसदी तूं कदे कल्पना वी नहीं सी कीती सी॰॰॰४! जीत हमेशा ओह्दी ही हुंदी ऐ॰ जेहड़ा़ अपने कर्म नाल प्यार करदा ऐ॰ नतीजे दी परवाह नहीं करदा...क़! तेरी हर रीझ, हर इच्छा पूरी होवे एह ज़रुरी ते नहीं... कुछ अधूरी इच्छावां वी तैनूं ज़िंदगी दा सही राह दिखा देंदियां ने...!! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4 9 Cek UU HI UU GURU Jr] पुत्तर, जेहड़ा इंसान अपने अंदर दा संतुलन बना लैंदा ऐ ना, ओही द्ुनिया दे वडे तों वड़े तूफ़ान विच वी अडिग खड़ा रहंदा ऐज़! मेरी एह गल्ल याद रख़ीं, जिंदगी विच कदे ्कदे मिली हारवी तैनूं उस मंज़िल तक पहुँचा देंदी ऐ जिसदी तूं कदे कल्पना वी नहीं सी कीती सी॰॰॰४! जीत हमेशा ओह्दी ही हुंदी ऐ॰ जेहड़ा़ अपने कर्म नाल प्यार करदा ऐ॰ नतीजे दी परवाह नहीं करदा...क़! तेरी हर रीझ, हर इच्छा पूरी होवे एह ज़रुरी ते नहीं... कुछ अधूरी इच्छावां वी तैनूं ज़िंदगी दा सही राह दिखा देंदियां ने...!! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4
    37
    7
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Zek Z ٦؟٢ ؟ ٨٥ (Gturstu पुत्तर, जिस कल दी फ़िक्र विच तू अपना आज गवा रहा एं, क्या पता यही आज तेरे आने वाले कल नूं संवार दे.. ! !इसलिए ऐवैं चिंता ' छड्ड दे... हर पल नूं उस परमात्मा दी रज़ा मान के जियो। मन विच सब्र रख, हर हाल विच मालिक दा शुक्राना कर, और fdgI' पक्का रख..!! तू बस अपना कर्म करदा जा, 3IUHT' जो कुछ भी होवेगा , ओ परमात्मा बाक़ी सब उस दातार ते 5 81' दी मेहर नाळ तेरे लई बेहतरीन ही होवेगा... उस दे घर विच देर हो सकदी ए॰ पर अंधेर कदे नहीं!ऊँ नमः शिवाय शिवाढ़ शिव जी মতা যঙায d Zek Z ٦؟٢ ؟ ٨٥ (Gturstu पुत्तर, जिस कल दी फ़िक्र विच तू अपना आज गवा रहा एं, क्या पता यही आज तेरे आने वाले कल नूं संवार दे.. ! !इसलिए ऐवैं चिंता ' छड्ड दे... हर पल नूं उस परमात्मा दी रज़ा मान के जियो। मन विच सब्र रख, हर हाल विच मालिक दा शुक्राना कर, और fdgI' पक्का रख..!! तू बस अपना कर्म करदा जा, 3IUHT' जो कुछ भी होवेगा , ओ परमात्मा बाक़ी सब उस दातार ते 5 81' दी मेहर नाळ तेरे लई बेहतरीन ही होवेगा... उस दे घर विच देर हो सकदी ए॰ पर अंधेर कदे नहीं!ऊँ नमः शिवाय शिवाढ़ शिव जी মতা যঙায d
    4
    9
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    2 = গুছণ্ছুজf4]) ছ3 জR4 @UQU @ पुत्तर जिस वी मनुष्य दा मन नीवा, मत उच्ची है औरजो इंसान रब दे दर ते ते अपण्यां दे अग्गे मन तों झुकदा ए॰ ओही असल विच भरदा ए॰॰!!अहंकार बंदे नूं अंदरों खोखला कर दिंदा ए और झुके बिना कदे किसी वी रूह नूं तृप्ति नहीं मिलदी..!! जे तेरा धर्म सिर्फ इक सामाजिक समझौता ए॰ जिसके पीछे छुप के तू अपनी कायरता ते बेईमानी नूं पुण्य दा नाम दे रहा है॰ तां याद खख़ी, तू रब नूं नहीं, सिर्फ खुद नूं ते दुनिया नूं मूर्ख बना रहा है..!!क़ँ नमः शिवाय शिवाफ शिव जी सदा सहाय..!! 2 = গুছণ্ছুজf4]) ছ3 জR4 @UQU @ पुत्तर जिस वी मनुष्य दा मन नीवा, मत उच्ची है औरजो इंसान रब दे दर ते ते अपण्यां दे अग्गे मन तों झुकदा ए॰ ओही असल विच भरदा ए॰॰!!अहंकार बंदे नूं अंदरों खोखला कर दिंदा ए और झुके बिना कदे किसी वी रूह नूं तृप्ति नहीं मिलदी..!! जे तेरा धर्म सिर्फ इक सामाजिक समझौता ए॰ जिसके पीछे छुप के तू अपनी कायरता ते बेईमानी नूं पुण्य दा नाम दे रहा है॰ तां याद खख़ी, तू रब नूं नहीं, सिर्फ खुद नूं ते दुनिया नूं मूर्ख बना रहा है..!!क़ँ नमः शिवाय शिवाफ शिव जी सदा सहाय..!!
    6
    10
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    [ i0 (uRuನ ٢٤٥ ؟٨ पुत्तर दुख के स्वभाव को कोई भी नहीं समझ पाया है। गरीब दुखी होता है क्योंकि उसकी आशाएँ पूरी नहीं होतीं। अमीर इसलिए दुखी होता है क्योंकि उसकी आशाएँ तो पूरी हो जाती हैं, लेकिन फिर भी मन को शांति और संतोष नहीं मिलता, और कुछ और पाने ' की तृष्णा ` उसे दुखी रखती है। दुख गरीब से भी ज्यादा गहरा' वह गरीब से भी अधिक दया का अमीरका पात्र है। गरीब के पास तो कम से कम यह आशा रहती है कि ' आज नहीं तो कल एक छोटा सा मकान बना लेंगे ॰ फिर सब सुख आ जाएगा। अमीर महल भी बना लेता है=और उस महल को बनाने में उसने न रात देखी न दिन, न चैन किया न विश्राम। लेकिन जब महल बन जाता है, तब समझ आता है कि శld కెౌ ' वे दिन वापस नहीं लौटाए जा सकते , और मन की आशा फिर भी पूरी नहीं हुई और ध्यान रख़ना, मैं तुम्हें तब तक अमीर नहीं कहूँगा जब तक सांसारिक आशा टूट न जाएः तब तक तुम गरीब ही हो। अगर तुम्हारे तुम्हारी भीतर अभी भी कोई आशा बची है, तो इसका मतलब है कि तुम अभी भी गरीब हो। मेरी परिभाषा में गरीब वही है, जिसकी आशा अभी शेष हैजो  अभी कुछ  सोचता है कि। और मिल जाएगा, तो सब ठीक हो जाएगा।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय फ [ i0 (uRuನ ٢٤٥ ؟٨ पुत्तर दुख के स्वभाव को कोई भी नहीं समझ पाया है। गरीब दुखी होता है क्योंकि उसकी आशाएँ पूरी नहीं होतीं। अमीर इसलिए दुखी होता है क्योंकि उसकी आशाएँ तो पूरी हो जाती हैं, लेकिन फिर भी मन को शांति और संतोष नहीं मिलता, और कुछ और पाने ' की तृष्णा ` उसे दुखी रखती है। दुख गरीब से भी ज्यादा गहरा' वह गरीब से भी अधिक दया का अमीरका पात्र है। गरीब के पास तो कम से कम यह आशा रहती है कि ' आज नहीं तो कल एक छोटा सा मकान बना लेंगे ॰ फिर सब सुख आ जाएगा। अमीर महल भी बना लेता है=और उस महल को बनाने में उसने न रात देखी न दिन, न चैन किया न विश्राम। लेकिन जब महल बन जाता है, तब समझ आता है कि శld కెౌ ' वे दिन वापस नहीं लौटाए जा सकते , और मन की आशा फिर भी पूरी नहीं हुई और ध्यान रख़ना, मैं तुम्हें तब तक अमीर नहीं कहूँगा जब तक सांसारिक आशा टूट न जाएः तब तक तुम गरीब ही हो। अगर तुम्हारे तुम्हारी भीतर अभी भी कोई आशा बची है, तो इसका मतलब है कि तुम अभी भी गरीब हो। मेरी परिभाषा में गरीब वही है, जिसकी आशा अभी शेष हैजो  अभी कुछ  सोचता है कि। और मिल जाएगा, तो सब ठीक हो जाएगा।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय फ
    19
    7
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    EekTuH Tuu Guru Ji पुत्तर, तेरे करमां दे बीज अच्छे होण या बुरे. अपने सही वक़्त तैनूं ' फल जरूर देंगे.. ! ! ते रुख़ ( पेड़) बनके ೩ಹ: मेरी इह गल्ल हमेशा याद रख़ीं पुत्तर, जो चंगे करम बिना किसे दिखावे ते छलावे दे चुंपचाप करदा जा रिहा एं॰ वही सच्चा पुण्य कहलाउँदा है। परमात्मा सब कुछ देख रिहा है..!! तूं अपने करमां नूं ही अपनी असली पहचान बना, वरना दुनिया विच एक ही नाम दे हज़ारां इंसान रुलेदे फिरदे ने...तेरे ' खुद दे करम ही तैनूं सबसे अलग बनाएंगे . !फ़ तेरा अपना व्यवहार ओह शीशा (दर्पण) है पुत्तर , जिस विच तेरे अंदर दा अहंकार और तेरे घर दे संस्कार... दोनों दी झलक तैनूं सा़फ दिखाई दे जावेगी... ! !ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ५ EekTuH Tuu Guru Ji पुत्तर, तेरे करमां दे बीज अच्छे होण या बुरे. अपने सही वक़्त तैनूं ' फल जरूर देंगे.. ! ! ते रुख़ ( पेड़) बनके ೩ಹ: मेरी इह गल्ल हमेशा याद रख़ीं पुत्तर, जो चंगे करम बिना किसे दिखावे ते छलावे दे चुंपचाप करदा जा रिहा एं॰ वही सच्चा पुण्य कहलाउँदा है। परमात्मा सब कुछ देख रिहा है..!! तूं अपने करमां नूं ही अपनी असली पहचान बना, वरना दुनिया विच एक ही नाम दे हज़ारां इंसान रुलेदे फिरदे ने...तेरे ' खुद दे करम ही तैनूं सबसे अलग बनाएंगे . !फ़ तेरा अपना व्यवहार ओह शीशा (दर्पण) है पुत्तर , जिस विच तेरे अंदर दा अहंकार और तेरे घर दे संस्कार... दोनों दी झलक तैनूं सा़फ दिखाई दे जावेगी... ! !ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ५
    11
    15
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    < 45 `ಸ Eek Tu Hi Tu Guru Ji पुत्तर, जदों मनुष्य जन्म लैंदा है॰ तां सारा संसार खुशियां उत्सव मनाता है... परंतु कुदरत बिल्कुल मौन मनाता है रहंदी है। क्योंकि प्रकृति जानती है   एह कोई नवां आगमन नहीं है, बल्कि एक पुरानी यात्रा दा ही अगला पड़ाव है। तूं वेख, पुत्तर तेरा नाम नया है, शरीर नया है, परिवार भी नया है॰॰॰ किंतु जो अपनी आँखों राहीं देख रहा है, वो ना नवा है ते ना ही पुराना। वो तां सिर्फ एक मुसाफिर है, इक यात्री है.॰ मनुष्य अपने कर्मों नाल अपना भविष्य बनाता है॰ पर पुत्तर, एह आधा सच है.॰ बाकी दा आधा सच एह है कि मनुष्य अपने पूर्वजन्मों दे संस्कारों नाल अपना वर्तमान जींदा है..!!असीं सारे इस जग विच सिर्फ मुसाफिर हां, जेहड़े अपने पुराने करमां दा हिसाब पूरा करन आए हां। बस उस परमात्मा दा सिमरन करदे रहो..!!ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4 < 45 `ಸ Eek Tu Hi Tu Guru Ji पुत्तर, जदों मनुष्य जन्म लैंदा है॰ तां सारा संसार खुशियां उत्सव मनाता है... परंतु कुदरत बिल्कुल मौन मनाता है रहंदी है। क्योंकि प्रकृति जानती है   एह कोई नवां आगमन नहीं है, बल्कि एक पुरानी यात्रा दा ही अगला पड़ाव है। तूं वेख, पुत्तर तेरा नाम नया है, शरीर नया है, परिवार भी नया है॰॰॰ किंतु जो अपनी आँखों राहीं देख रहा है, वो ना नवा है ते ना ही पुराना। वो तां सिर्फ एक मुसाफिर है, इक यात्री है.॰ मनुष्य अपने कर्मों नाल अपना भविष्य बनाता है॰ पर पुत्तर, एह आधा सच है.॰ बाकी दा आधा सच एह है कि मनुष्य अपने पूर्वजन्मों दे संस्कारों नाल अपना वर्तमान जींदा है..!!असीं सारे इस जग विच सिर्फ मुसाफिर हां, जेहड़े अपने पुराने करमां दा हिसाब पूरा करन आए हां। बस उस परमात्मा दा सिमरन करदे रहो..!!ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4
    12
    16
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    ؟ GURU JX EEK Tu ac पुत्तर, मेरे ओट आसरे की वजह से ही आज तेरी हस्ती है, वरना तू कब का वक्त के थपेड़ों में खो चुका होता। सिर्फ एक कदम अपनीसमर्जी का उठा कर देख ले, तुझे खुद पता चल जाएगा किजो आज तेरे अपने बनते हैं॰ वो सच में तेरे कितने अपने हैं। लोग सिर्फ तब तक साथ चलते हैं जब तक उनका स्वार्थ होता है, लेकिन एक गुरु का दर ही है जो बिना किसी मतलब के हर मोड़ पर तेरा साथ निभाता है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4 ؟ GURU JX EEK Tu ac पुत्तर, मेरे ओट आसरे की वजह से ही आज तेरी हस्ती है, वरना तू कब का वक्त के थपेड़ों में खो चुका होता। सिर्फ एक कदम अपनीसमर्जी का उठा कर देख ले, तुझे खुद पता चल जाएगा किजो आज तेरे अपने बनते हैं॰ वो सच में तेरे कितने अपने हैं। लोग सिर्फ तब तक साथ चलते हैं जब तक उनका स्वार्थ होता है, लेकिन एक गुरु का दर ही है जो बिना किसी मतलब के हर मोड़ पर तेरा साथ निभाता है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4
    12
    9
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    3i Qdl& & तेरा रहम है.! @ सांसें चलती हैं १ तेरा रहम है.! @ कारोबार चलता है, रहम है.! GxuRI ०९ मैं करता हूँ , मैंने किया है, बस मेरा वहम है fag शर्तों को जोड़ते जब तक तुम अपनी के खुशी रहोगे, तब तक तुम कभी खुश नहीं हो पाओगे। पर शर्तां नाल कदे खुशियां लख कोशिश करलो, नहीं मिलदीआं..!! जीवन में बहुत सी चीज़ें अनिश्चित हैं॰ इत्थे हर पल बदलदा है। पर याद रखीं पुत्तर.. इसी अनिश्चितता में ही सारा रोमांच छुपा है, असली आनंद ते रूह दा जीना तां रब्ब दी रज़ा विच ही छुपिया होइया 81 3i Qdl& & तेरा रहम है.! @ सांसें चलती हैं १ तेरा रहम है.! @ कारोबार चलता है, रहम है.! GxuRI ०९ मैं करता हूँ , मैंने किया है, बस मेरा वहम है fag शर्तों को जोड़ते जब तक तुम अपनी के खुशी रहोगे, तब तक तुम कभी खुश नहीं हो पाओगे। पर शर्तां नाल कदे खुशियां लख कोशिश करलो, नहीं मिलदीआं..!! जीवन में बहुत सी चीज़ें अनिश्चित हैं॰ इत्थे हर पल बदलदा है। पर याद रखीं पुत्तर.. इसी अनिश्चितता में ही सारा रोमांच छुपा है, असली आनंद ते रूह दा जीना तां रब्ब दी रज़ा विच ही छुपिया होइया 81
    14
    15
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    ٤» ٧٥٥ ٧٥ पुत्तर जी॰ बड़े ध्यान नाल समझो कि लोभ ते कंजूसी इंसान नू किस तरह अंदरों खोखला !पुत्तर, लोभ दा अर्थ है- जो दूजे दे कर देंदे नेः लोभ ते कंजूसी - दोनों माया दे फंदे कंजूसी दा अर्थ है- जो मेरे हृथ विच है॰ वो मेरे आ जावे! हथ विच है॰ वो मेरे हथ विच ही हथ विच रहे॰ किसे होर दे हथ विच ना चला जावे! कंजूसी असल विच लोभ दी ही कंजूस परछाई (छाया) है। पर मज़े दी गल्ल देखो॰ लोभी बंदा सदा दुखी रहंदा है ते सदा 3167 ' जिन्ना वी मिल जावे, बहुत कुछ डरिया होया..!! लोभी सदा दुखी रहंदा है, क्योंकि नहीं मिल्या, उही ओहनू हर पल पीडा़ दिंदा है। ओहनू सदा पाने नू बाकी रह जावेगा। जो सदा डरिया (भयभीत ) कंजूस ओदा डंक छाती विच छुरी वांगूं चुभदा रहंदा है।दूसरी तरफ ते ओहनू ओहनू हर वेले इहो डर खांदा है कि॰जो ओसदे हथ विच है॰ कोई qಪ रहदा तैयार बैठे ने, ते चारों 31೯ಠ . लगदा है कि सारे लोग झपट्टा खोह (छीन) ना लवे! মা दुश्मन ही खड़े ने. !! लोभ ते मोह दी इस माया तों ऊपर उठो। ना लोभ विच आ के UI ओदे विच शुकराना दुखी होवो, ते ना कंजूसी विच आ के डरो। जो परमात्मा ने दित्ता नाम धन' ते 'संतोष' विच है॰ दुनियावी अमानत विच करना सीखो, क्योंकि असली सुख ३॰ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय % नहीं..!! ٤» ٧٥٥ ٧٥ पुत्तर जी॰ बड़े ध्यान नाल समझो कि लोभ ते कंजूसी इंसान नू किस तरह अंदरों खोखला !पुत्तर, लोभ दा अर्थ है- जो दूजे दे कर देंदे नेः लोभ ते कंजूसी - दोनों माया दे फंदे कंजूसी दा अर्थ है- जो मेरे हृथ विच है॰ वो मेरे आ जावे! हथ विच है॰ वो मेरे हथ विच ही हथ विच रहे॰ किसे होर दे हथ विच ना चला जावे! कंजूसी असल विच लोभ दी ही कंजूस परछाई (छाया) है। पर मज़े दी गल्ल देखो॰ लोभी बंदा सदा दुखी रहंदा है ते सदा 3167 ' जिन्ना वी मिल जावे, बहुत कुछ डरिया होया..!! लोभी सदा दुखी रहंदा है, क्योंकि नहीं मिल्या, उही ओहनू हर पल पीडा़ दिंदा है। ओहनू सदा पाने नू बाकी रह जावेगा। जो सदा डरिया (भयभीत ) कंजूस ओदा डंक छाती विच छुरी वांगूं चुभदा रहंदा है।दूसरी तरफ ते ओहनू ओहनू हर वेले इहो डर खांदा है कि॰जो ओसदे हथ विच है॰ कोई qಪ रहदा तैयार बैठे ने, ते चारों 31೯ಠ . लगदा है कि सारे लोग झपट्टा खोह (छीन) ना लवे! মা दुश्मन ही खड़े ने. !! लोभ ते मोह दी इस माया तों ऊपर उठो। ना लोभ विच आ के UI ओदे विच शुकराना दुखी होवो, ते ना कंजूसी विच आ के डरो। जो परमात्मा ने दित्ता नाम धन' ते 'संतोष' विच है॰ दुनियावी अमानत विच करना सीखो, क्योंकि असली सुख ३॰ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय % नहीं..!!
    13
    8
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    GURU JI EK Tu HI Tu पुत्तर, मौत तो सबकी पक्की है... पर जीना अपने हाथ विच 5R है। ज़्यादातर लोग ज़िंदगी दी तैयारी करते करते ही पूरी उम्र लँघा (बिता) देते हैं। वो हमेशा उसे दिन का इंतज़ार करते रहते हैं कि जब सब कुछ ठीक होवेगा, तब जिएंगे... पर पुत्तर, वो दिन कदी नहीं आता..!! हर एक पल को उस परमात्मा दी रज़ा विच खुश होकर बिताना सीखो। जिंदगी॰को कल पे मत टालो, इसे आज और अभी जी लो... सारों के साथ प्रेम करो, हँसो, नच्चो, ध्यान लगाओ और हर पल शुकराना करो। याद रखना पुत्तर... मौत तो बस इस शरीर का अंत है, पर बिना जिए सिर्फ़ साँसें लेना सबसे बड़ी त्रासदी से पूछो कि क्या तुम सिर्फ़ साँस ले रहे हो... 8..!! आज अपने आप या सचमुच जिंदगी को जीरभी रहे हो?...!! ऊँ नमः शिवाय शिवजी सदा सहाय Ul" GURU JI EK Tu HI Tu पुत्तर, मौत तो सबकी पक्की है... पर जीना अपने हाथ विच 5R है। ज़्यादातर लोग ज़िंदगी दी तैयारी करते करते ही पूरी उम्र लँघा (बिता) देते हैं। वो हमेशा उसे दिन का इंतज़ार करते रहते हैं कि जब सब कुछ ठीक होवेगा, तब जिएंगे... पर पुत्तर, वो दिन कदी नहीं आता..!! हर एक पल को उस परमात्मा दी रज़ा विच खुश होकर बिताना सीखो। जिंदगी॰को कल पे मत टालो, इसे आज और अभी जी लो... सारों के साथ प्रेम करो, हँसो, नच्चो, ध्यान लगाओ और हर पल शुकराना करो। याद रखना पुत्तर... मौत तो बस इस शरीर का अंत है, पर बिना जिए सिर्फ़ साँसें लेना सबसे बड़ी त्रासदी से पूछो कि क्या तुम सिर्फ़ साँस ले रहे हो... 8..!! आज अपने आप या सचमुच जिंदगी को जीरभी रहे हो?...!! ऊँ नमः शिवाय शिवजी सदा सहाय Ul"
    13
    11
Home
Explore
Wallet
Video