sn vyas
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#🪔राधा अष्टमी🙏🌸 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏श्री कृष्ण वचन🌹 #🦚 भगवान श्री कृष्ण की पौराणिक कथाएं 📚 #🌺राधा कृष्ण💞
राधारानी ने सबसे पहले किसे देखा था?
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ब्रजभूमि में एक अद्भुत और दिव्य चमत्कार हुआ, जब राजा वृषभानु और माता कीर्तिदा के घर एक दिव्य कमल पर श्री राधारानी का प्राकट्य हुआ। उनका जन्म किसी सामान्य बालिका की तरह नहीं, बल्कि स्वयं भगवान की परम आनंदमयी शक्ति के रूप में हुआ था।
परन्तु जन्म के बाद एक ऐसी बात हुई जिसने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया। नन्हीं राधा अपनी आँखें नहीं खोलती थीं। दिन बीतते गए, फिर भी उनकी पलकों में कोई हलचल नहीं हुई। राजा वृषभानु और माता कीर्तिदा को लगा कि उनकी पुत्री शायद जन्म से ही दृष्टिहीन है। यह सोचकर उनका हृदय अत्यंत दुखी रहने लगा।
राधारानी ने आँखें क्यों नहीं खोलीं? 👇🏻
पुराणों के अनुसार श्री राधा कोई साधारण बालिका नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की ह्लादिनी शक्ति और माता लक्ष्मी का दिव्य स्वरूप हैं।
पृथ्वी पर अवतरित होने से पहले उन्होंने एक संकल्प लिया था
"मैं इस संसार में अपनी आँखें तभी खोलूँगी, जब सबसे पहले मेरे प्रियतम श्रीकृष्ण के दर्शन होंगे।"
इसी दिव्य प्रण के कारण उन्होंने जन्म के बाद भी अपनी आँखें बंद रखीं।
बाल कृष्ण से पहला मिलन 👇🏻
कुछ समय बाद जब गोकुल में राधारानी के जन्म का समाचार पहुँचा, तब नंद बाबा और माता यशोदा अपने नन्हे लालन श्रीकृष्ण को साथ लेकर राजा वृषभानु के घर शुभकामनाएँ देने पहुँचे।
महल में सभी बड़े परस्पर में बातचीत में व्यस्त थे, किन्तु बाल गोपाल अपनी चंचल मुस्कान के साथ घुटनों के बल रेंगते हुए धीरे-धीरे उस पालने तक पहुँच गए, जहाँ नन्हीं राधारानी विश्राम कर रही थीं।
श्रीकृष्ण ने पालने को पकड़ा, झुककर राधा जी के समीप आए और प्रेमपूर्वक उन्हें स्पर्श किया।
उसी क्षण राधारानी ने अपने प्रियतम के दिव्य स्पर्श और अलौकिक सुगंध को अनुभव किया।
जैसे ही श्रीकृष्ण उनके सामने आए, राधारानी ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं।
उनकी पहली दृष्टि सीधे अपने आराध्य श्रीकृष्ण के दिव्य मुखकमल पर पड़ी।
दोनों की आँखें मिलीं और उसी क्षण ब्रह्मांड के सबसे पवित्र, सबसे मधुर और शाश्वत प्रेम का प्रथम मिलन हुआ।
राधारानी को पहली बार आँखें खोलकर मुस्कुराते देखकर राजा वृषभानु, माता कीर्तिदा और वहाँ उपस्थित सभी ब्रजवासी आनंद से भर उठे।
अब उन्हें समझ आ गया कि उनकी पुत्री अंधी नहीं थी। वह तो केवल उस क्षण की प्रतीक्षा कर रही थी, जब उसके नयन सबसे पहले अपने प्रिय श्रीकृष्ण के दर्शन करेंगे।
यही वह दिव्य क्षण है जिसे यह चित्र दर्शाता है—बाल श्रीकृष्ण प्रेम से पालने के ऊपर झुककर नन्हीं राधारानी को निहार रहे हैं, और राधारानी पहली बार अपने नेत्र खोलकर केवल अपने श्यामसुंदर के दर्शन कर रही हैं।
साभार~ पं देव शर्मा🔥
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