sn vyas
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🌷 सुप्रभातम 🌷
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स स्निग्धोऽकुशलान्निवारयति यस्तत्कर्म यन्निर्मलं,
सा स्त्री याऽनुविधायिनी स मतिमान् यः सद्भिरभ्यर्च्यते।
सा श्रीर्या न मदं करोति स सुखी यस्तृष्णया मुच्यते,
तन्मित्रं यदकृत्रिमं स पुरुषो यः खिद्यते नेन्द्रियैः॥
(हितोपदेशः सुहृद्भेदः- १४१)
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*अर्थात् 👉🏻 जो विपत्ति से बचाता है वही स्नेही है, जो निर्मल अर्थात् दोषरहित है वही कर्म है, जो (पति के) अनुसार में चले वही स्त्री है, जिसका सज्जन आदर करे वही बुद्धिमान् है, जो अहंकार को उत्पन्न न करे वही संपत्ति है, जो तृष्णा के रहित है वही सुखी है, जो निष्कपट है वही मित्र है और जो इन्द्रियों के वश में नहीं है वही पुरुष है।
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आपका दिन मंगलमय रहे
🙏🌹🚩जय श्री कृष्ण 🚩🌹🙏
#☝अनमोल ज्ञान #🙏 प्रेरणादायक विचार #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿
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