sn vyas
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#🔱शिवपुराण कथा📖 #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱हर हर महादेव #जय मां दुर्गा "जब पूरी सृष्टि का संहार रोकने के लिए खुद ब्रह्मांड के रचयिता को अपनी अर्धांगिनी के चरणों में लेटना पड़ा — जानिए महाकाली और भोलेनाथ के मिलन की सबसे रोमांचक कथा!" ​क्रोध की वह ज्वाला, जिसे कोई रोक न सका ​रक्तबीज और शुंभ-निःशुंभ जैसे महादैत्यों के वध के बाद भी माँ काली का प्रचंड क्रोध शांत नहीं हो रहा था। उनके इस विकराल और उग्र रूप से तीनों लोक थर-थर कांपने लगे। माँ का हर एक कदम धरती को हिला रहा था, और ऐसा लग रहा था कि यह क्रोध संपूर्ण ब्रह्मांड को लील जाएगा। ​सभी देवता भयभीत होकर देवर्षि नारद के साथ कैलाश पहुंचे और देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना की— "हे प्रभु! माँ काली के इस रुद्र रूप को रोकिए, अन्यथा सृष्टि का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।" ​जब महादेव ने उठाया अनोखा कदम ​भोलेनाथ अपनी सहज करुणा और योग-दृष्टि से समझ गए कि इस समय केवल प्रेम और समर्पण ही इस प्रलय को शांत कर सकता है। वे तुरंत रणक्षेत्र में पहुँचे और उस मार्ग पर लेट गए जिस ओर माँ काली उग्र गति से बढ़ रही थीं। ​अनोखा मिलन: रणभूमि में बिखरे शवों के बीच जब माँ काली का अगला चरण साक्षात भगवान शिव की छाती पर पड़ा, तो वे अचानक स्तब्ध रह गईं। ​पश्चाताप का क्षण: अपनी ही शक्ति और ऊर्जा के स्रोत यानी अपने प्रियतम भोलेनाथ को पैरों के नीचे देखकर माँ काली का प्रचंड क्रोध एक ही पल में करुणा और लज्जा में बदल गया। उनकी जीभ दांतों के बीच दब गई (जो आज भी उनकी प्रसिद्ध मूर्ति में दिखाई देती है)। ​इस दिव्य प्रसंग का गहरा अध्यात्मिक रहस्य ​यह घटना केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन और प्रकृति का सबसे बड़ा दर्शन है: ​शिव और शक्ति की अभिन्नता: शिव शव समान निष्क्रिय हैं यदि उनके भीतर शक्ति (काली) का संचार न हो, और शक्ति तब तक विश्राम नहीं पा सकती जब तक उसे शिव रूपी चेतना का आधार न मिले। ​अहंकार का समर्पण: यह प्रसंग सिखाता है कि कितना भी उग्र क्रोध या अहंकार क्यों न हो, वह प्रेम, चेतना और समर्पण के स्पर्श से स्वतः शांत हो जाता है।
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