sn vyas
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राधाकृष्ण युगलाष्टकम् : ---------------------------- राधाभक्ति- विभोर वैष्णव लोगों ने राधा और कृष्ण को दो शरीर होने से भी एक आत्मा के रूप में मान्यता देकर, युगलाष्टक स्तुति के साथ आराधना करते हैं। भिर्ण- भिर्ण भक्तो के द्वारा लिखित युगलाष्टक- स्तुति तो बहुत है किंतु रचयिताओं नाम उसमें नहीं है। उस स्तुतियों से चुनकर राधा- कृष्ण भक्तिरस से भरपूर एक स्तुति को हिंदी अर्थ के साथ यंहा समर्पित किया जाता है; यथा-- श्रीराधेकृष्ण शरणम...!! कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेममयो हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम॥१॥ भावार्थ : श्रीराधारानी, भगवान श्रीकृष्ण में रमण करती हैं और भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराधारानी में रमण करते हैं, इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥१॥ कृष्णस्य द्रविणं राधा राधायाः द्रविणं हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम॥२॥ भावार्थ : भगवान श्रीकृष्ण की पूर्ण-सम्पदा श्रीराधारानी हैं और श्रीराधारानी का पूर्ण-धन श्रीकृष्ण हैं, इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥२॥ कृष्णप्राणमयी राधा राधाप्राणमयो हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम।।३॥ भावार्थ : भगवान श्रीकृष्ण के प्राण श्रीराधारानी के हृदय में बसते हैं और श्रीराधारानी के प्राण भगवान श्री कृष्ण के हृदय में बसते हैं , इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥३॥ कृष्णद्रवामयी राधा राधाद्रवामयो हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम।।४॥ भावार्थ : भगवान श्रीकृष्ण के नाम से श्रीराधारानी प्रसन्न होती हैं और श्रीराधारानी के नाम से भगवान श्रीकृष्ण आनन्दित होते है, इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥४॥ कृष्ण गेहे स्थिता राधा राधा गेहे स्थितो हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम॥५॥ भावार्थ : श्रीराधारानी भगवान श्रीकृष्ण के शरीर में रहती हैं और भगवान श्रीकृष्ण श्रीराधारानी के शरीर में रहते हैं, इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥५॥ कृष्णचित्तस्थिता राधा राधाचित्स्थितो हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम॥६॥ भावार्थ : श्रीराधारानी के मन में भगवान श्रीकृष्ण विराजते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के मन में श्रीराधारानी विराजती हैं, इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥६॥ नीलाम्बरा धरा राधा पीताम्बरो धरो हरिः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम॥७॥ भावार्थ : श्रीराधारानी नीलवर्ण के वस्त्र धारण करती हैं और भगवान श्रीकृष्णपीतवर्ण के वस्त्र धारण करते हैं, इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥७॥ वृन्दावनेश्वरी राधा कृष्णो वृन्दावनेश्वरः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम॥८॥ भावार्थ : श्रीराधारानी वृन्दावन की स्वामिनी हैं और भगवान श्रीकृष्ण वृन्दावन के स्वामी हैं, इसलिये मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो॥८।। राधेकृष्ण #🙏जय-श्री राधेकृष्ण🌹राधेराधे🙏 ##जय श्री राधेकृष्ण 🙏🌹⛳ #🚩 जय श्री राधेकृष्ण...!!🚩 #🙏जय श्री राधेकृष्ण🌸
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