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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - सबको एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाना है कोई कितना भी तेज भाग ले श्मशान घाट से आगे नही जा सकता , सफर कितना भी वीआईपी क्यों न हो, अंतिम स्टॉप सबका श्मशान ही है, कोई खुद को कितना भी तुर्रम ख़ाँ समझे शतरंज का खेल खत्म होने के बाद, राजा और प्यादा एक ही डिब्बे में रखे जाते हैं, अकड़ तो सब में है॰ मगर राख बनने के बाद सब एक रंग के हो जाते | जीवन सबका अलग अलग है मगर अंत सबका एक है, बस कहानियों में अंतर हैं। माटी कहे कुम्हार से॰ तू क्या रूंधे मोय। एक दिन ऐसा आएगा, मैं रूँधूंगी तोय ।। घमंड ना करे, सबको एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाना है चाहे राजा हो या रंक सबको एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाना है कोई कितना भी तेज भाग ले श्मशान घाट से आगे नही जा सकता , सफर कितना भी वीआईपी क्यों न हो, अंतिम स्टॉप सबका श्मशान ही है, कोई खुद को कितना भी तुर्रम ख़ाँ समझे शतरंज का खेल खत्म होने के बाद, राजा और प्यादा एक ही डिब्बे में रखे जाते हैं, अकड़ तो सब में है॰ मगर राख बनने के बाद सब एक रंग के हो जाते | जीवन सबका अलग अलग है मगर अंत सबका एक है, बस कहानियों में अंतर हैं। माटी कहे कुम्हार से॰ तू क्या रूंधे मोय। एक दिन ऐसा आएगा, मैं रूँधूंगी तोय ।। घमंड ना करे, सबको एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाना है चाहे राजा हो या रंक - ShareChat